Followers

Tuesday, December 31, 2013

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें


आप सभीको नया साल 2014 बहुत बहुत मुबारक हो !


नवांकुर, नव कोंपल.
नव किसलय, नव पल्लव
नव सुमन, नव सौरभ
नव वितान, नव विधान
नवाकाश, नव अभिलाष
कामना है कुसुमित हों
नव वर्ष की प्रथम भोर में
प्रथम सूर्य की प्रथम रश्मि के
    प्रथम आलोक में !   
उल्लसित हो हर प्राण
हर्षित हो हर हृदय
विकसित हो बस
प्यार, प्यार, प्यार 
और अनुपम प्यार !

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !


साधना वैद

Saturday, December 28, 2013

मैं एकाकी






चित्र गूगल से साभार ! 

साधना वैद

Wednesday, December 25, 2013

सेंटा न आया


बड़े दिन की हार्दिक शुभकामनायें




चित्र गूगल से साभार 

साधना वैद

मैं हूँ ना !






चित्र - गूगल से साभार

साधना वैद

Sunday, December 22, 2013

व्योम के उस पार


दूर क्षितिज तक पसरे
तुम्हारे कदमों के निशानों पर
अपने पैर धरती
तुम तक पहुँचना चाहती हूँ !
सारी दिशाएँ खो जायें,
सारी आवाजें गुम हो जायें,
सारी यादें धुँधला जायें,
मेरी डायरी में लिखे
तुम्हारे पते की स्याही
वक्त के मौसमों की मार से
भले ही मिट जाये
मेरे मन की मरुभूमि की रेत पर
अंकित ये निशान आज भी
उतने ही स्पष्ट और ताज़े हैं
जितने वो उस दिन थे
जब वर्षों पहले मुझसे
आख़िरी बार मिल कर
तुम्हारे पल-पल दूर जाने से
मेरे मन पर बने थे !  
तुम्हारे कदमों के
उन्हीं निशानों पर पैर रखते हुए
चलते रहना मुझे बहुत
अच्छा लगता है !
फासले कुछ कम होते से
लगते हैं और
उम्मीद की शाख हरी
होने लगती है !
जानती हूँ राह अनन्त है
मंज़िल का कोई ओर छोर भी
दिखाई नहीं देता
लेकिन मुझे विश्वास है
तुम्हारे पैरों के इन निशानों पर
पैर रखते हुए मैं
एक न एक दिन ज़रूर  
तुम तक पहुँच जाऊँगी
फिर चाहे यह मुलाक़ात
इस लोक में हो या
व्योम के उस पार !


साधना वैद    

Friday, December 20, 2013

देश के कर्णधार हैं .......





चित्र -- गूगल से साभार 


साधना  वैद



Monday, December 16, 2013

संकल्प



जीवन यदि सुरभित एवँ
निष्कंटक बनाना है तो
अंतर के सारे शूलों को
चुन कर मन उपवन के
कोने-कोने की
सफाई करनी होगी !  
हृदय के सारे गरल को
एक पात्र में एकत्रित कर  
नीलकंठ बन अपने ही
गले के नीचे
उतारना होगा !
अंतर में दहकते
ज्वालामुखी के सारे लावे को
सप्रयास बाहर निकाल
शीतल जल की फुहार से
उसके भीषण ताप को
ठंडा करना होगा !
हाथ भले ही जल जायें
हृदय में सुलगते अंगारों पर
राख डाल इस धधकती
अग्नि का भी शमन
करना ही होगा !
मन की नौका को
तट पर लाना है तो
सागर की उत्ताल तरंगों से
कैसा घबराना !
डूब जायें या तर जायें
पतवार उठा कर
नाव को तो खेना ही होगा !
मुझे पता है तूने
कभी हार नहीं मानी है
आज भी अपने कदमों को
डगमगाने मत देना !
जितना तेरा संकल्प दृढ़ होगा
उतना ही तेरा आत्मबल बढ़ेगा
और उतना ही यह संसार
प्रीतिकर हो जायेगा !
एक अलौकिक
दिव्य संगीत की धुन
तुझे सुनाई देने लगेगी जिसे सुन
तू मंत्रमुग्ध हो जायेगा !
फिर तेरे मन में यह
असमंजस और संदेह कैसा !
चल उठ देर न कर !
नव निर्माण के पथ पर
अपने कदम बढ़ा
और संसार के सारे सुख
अपनी झोली में भर ले !


साधना वैद