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Saturday, August 9, 2014

है बैठा सुबह से मेरी छत पे कागा



न चूड़ी न कंगन
न सिक्कों की खन खन
न गोटे की साड़ी
न पायल की छन छन
न गहना न गुरिया
न चूनर न लहँगा   
न देना मुझे कोई
उपहार महँगा !
मुझे चाहिए बस  
दुआओं का तोहफा
मुरव्वत का तोहफा
   मुहब्बत का तोहफा !  
मुझे चाहिये एक
तुमसे ये वादा
निभाना उसे चाहे
हो कोई बाधा !
रहोगे सदा वृक्ष
की छाँह बन कर
जियोगे सदा दीप
  की ज्योत बन कर !
रखोगे सदा नेह
का हाथ सिर पर
चले आओगे एक
आवाज़ सुन कर !
है बैठा सुबह से
मेरी छत पे कागा
तुम्हें खींच लायेगा
राखी का धागा !
खड़ी द्वार पर हूँ  
हैं पथ पर निगाहें
चले आओ भैया
मैं तकती हूँ राहें !
प्रभु आज तुमसे है
इतनी सी विनती
हों भैया की झोली में
खुशियाँ अनगिनती !

साधना वैद