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Tuesday, September 23, 2014

पन्नों में दबी प्रेम कहानी





पन्नों के बीच

सूखी सी पाँखुरियाँ

गीली सी यादें !


तुम्हारी बातें

आती हैं याद जब

जगाती रातें ! 


भीगी सड़क

रिमझिम फुहार

हाथों में हाथ !


जाना  था साथ 

ज़मीन आसमान

जहाँ हों पास !


तोड़ा गुलाब

अलकों में सजाया

मन हर्षाया ! 


कितनी बातें

प्यार की कहानी में

कितने किस्से !


उठाई गयीं   

ढेर सारी कसमें

ढेर से वादे !


बातों बातों में

जाने कब आ गयी

विदा की बेला !


बिछड़ा साथी

हुआ मन अकेला

छूटा जो हाथ !


आँसू का रेला

नैनों से बह चला

डूबा संसार ! 


जी भर आया

धीमे से सहलाया

लाल गुलाब !


प्यारा तोहफा  

किताब में दबाया

पन्नों के बीच ! 


हुआ विछोह

अलग हुए रास्ते

फिर ना मिले !


व्यस्त हो गये

अपने संसार में

सदियाँ बीतीं !


बरसों बाद

मिली जो अचानक

वही किताब !


भीगी पलकें

छुल गया हाथ से

सूखा गुलाब !


कितना कुछ 

जो बीता मन पर

याद आ गया ! 


विरहाग्नि में

पल-पल जलना

याद आ गया !


याद आ गया 

दिया तुम्हारा वह 

लाल गुलाब ! 


याद आ गयी

वह प्रेम कहानी

पन्नों में दबी !



साधना वैद