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Wednesday, December 10, 2014

जीवन आधारे - वृक्ष हमारे


कितना देते 
फल, फूल, सुगंध 
वृक्ष हमारे ! 

खुश होते हैं 
हिला कर पल्लव 
वृक्ष साथ में ! 

जिलाते हमें 
देकर प्राण वायु 
वृक्ष उदार !

सुन्दर वन 
रखते हैं स्वच्छ 
पर्यावरण ! 

सिर्फ देते हैं 
कुछ नहीं माँगते 
वृक्ष हमसे ! 

ऊँची डालियाँ 
धूप छाहीं जालियाँ
मोहक रूप ! 

घर का वैद्य
तुलसी का बिरवा
रोगनाशक ! 

केले का पेड़ 
हर रूप में भोज्य 
स्वाद का पुंज ! 

तने से बँधे 
वटसावित्री  पर 
आस्था के धागे ! 

शोभित वृक्ष 
धरा के बदन पर 
आभूषण से ! 

सुदृढ़ वृक्ष 
कमनीय लताएँ 
गाते विहग ! 

शीतल छाँह 
पल्लवों के चँवर
पेड़ों की भेंट ! 

साजिन्दे वृक्ष 
गीत गाती पवन 
मगन धरा ! 

फुदकते हैं 
तरु डालियों पर 
नन्हे परिंदे ! 

झूले की पींगें 
कजरी के अलाप 
नीम का पेड़ ! 

आम  का पेड़ 
खट्टी मीठी कैरियाँ 
यादों का घर ! 

वृक्षों  के जैसा 
दूजा परोपकारी 
कहाँ मिलेगा ! 

वृक्ष जागते 
जगत जब सोता 
बन प्रहरी !

रक्षा वृक्षों की 
कर्तव्य हमारा 
मानना होगा ! 

प्रण लेते हैं 
कटने नहीं देंगे 
एक भी पेड़ !




साधना वैद