Followers

Tuesday, March 29, 2016

बोलो, तुम कौन सा हिस्सा लोगे ?



आज बाँटना हैं तुमसे

कुछ भूली सी यादें

कुछ भीगे से पल

कुछ छिटकते से आज

कुछ छूटे से कल

कुछ रुसवा सी रातें

कुछ गुमसुम से दिन

कुछ झूठे से लम्हे

कुछ सच्चे पल छिन

कुछ कड़ुआती आँखें  

कुछ सीली सी आग

कुछ धुँधलाते रस्ते

कुछ भूले से राग

कुछ रूखे से मौसम

कुछ टूटे से ख्वाब 

कुछ तीखे से जुमले

कुछ हटते नकाब

और इस सब के बीच

कुछ खुले से तुम

कुछ छिपे से हम

  कुछ ढके से तुम  

कुछ उघड़े से हम

कुछ मौन से तुम

कुछ मुखर से हम

कुछ सख्त से तुम

  कुछ पिघले से हम  

कुछ सिमटे से तुम

कुछ बिखरे से हम

कुछ सुलझे से तुम

कुछ उलझे से हम

  कुछ अपने से तुम  

 कुछ बेगाने से हम 

बोलो कौन सा हिस्सा

तुम लेना चाहोगे ?

दोनों हिस्सों में  

अब कोई फर्क नहीं है

जो लेना चाहो ले लो !

क्योंकि ज़िंदगी के इस मोड़ पर

किसी भी हिस्से का हासिल  

अब सिर्फ दर्द ही तो है !

फिर चाहे वह

तुम्हारा नसीब हो

या फिर हमारा

   क्या फर्क पड़ता है !  



साधना वैद