Sudhinama
Wednesday, March 30, 2011
विडम्बना
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सोचा था जब मिलेंगे वो रोयेंगे बहुत हम , दरिया में ग़म के उनको डुबोयेंगे फकत हम , जिनकी हथेली पोंछती अश्कों को हमारे , था उनके आँसुओं को ही...
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Friday, March 25, 2011
झील के किनारे
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चल मन ले चल मुझे झील के उसी किनारे ! जहाँ दिखा था पानी में प्रतिबिम्ब तुम्हारा , उस इक पल से जीवन का सब दुःख था हारा , कितनी म...
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Tuesday, March 22, 2011
हैरान हूँ
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हैरान हूँ सदियों से मुठ्ठी में बंद यादों के स्निग्ध, सुन्दर, सुनहरे मोती अनायास ही अंगार की तरह दहक कर मेरी हथेलियों को जला क्यों रहे हैं ! ...
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Thursday, March 17, 2011
सुखद खबर – अब देश गरीब नहीं रहा !
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पिछले पूरे सप्ताह दुःख भरी खबरें ही देखने और सुनने को मिलीं | क्रिकेट मैचों में भारत का प्रदर्शन साधारण रहा, नये-नये घोटालों की खबरें आती ...
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Friday, March 11, 2011
खामोशी
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खामोशी की जुबां कभी कभी कितनी मुखर हो उठती है मैंने उस कोलाहल को सुना है ! खामोशी की मार कभी कभी कितनी मारक होती है मैंने उसके वारों को झेला...
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Wednesday, March 9, 2011
मसीहा
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मैं तो सदैव दीन दुखियों का मसीहा बन के रहा हूँ सबकी समस्याओं के समाधान मैंने सुझाये हैं , तुम्हारे दुखों की आँच पता नहीं कैसे मुझ तक पहुँच ह...
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Sunday, March 6, 2011
खिडकी
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वह तो सुदूर आकाश में स्वच्छंद उड़ने वाली , ताज़ी हवा में जीने वाली और चाँद सूरज के निर्मल , प्रखर और प्राणदायी प्रकाश को भरपू...
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