Sudhinama
Saturday, June 15, 2013
बरगद से बाबूजी
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आज भी तपती धूप में जब सिर पर बादल की छाँह आ जाती है तो उन बादलों के बीच मुझे आपका ही आश्वस्त करत...
Saturday, June 8, 2013
किसे सहेजूँ ........?
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कहो जीवन के सफर की इस लंबी रात में चहुँ ओर फैले घनघोर अँधेरे को सहेज कर रखूँ या फिर बियाबान जंगल में ...
Monday, June 3, 2013
हृदय गवाक्ष
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आज बहुत धीरे से अपने मन की बंद खिड़की की वर्षों बाद झाड़ पोंछ कर मैंने साँकल खोली है ! डरती थी सालों से बंद मेरे मन के उस ...
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