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Saturday, January 3, 2026
संकल्प नए साल का
Thursday, December 25, 2025
सेंटा न आया
आज बड़ा दिन था
! सुबह से सड़कों पर बड़ी चहल-पहल थी ! पास के चर्च से बड़े ही सुन्दर हिम्स की आवाज़
सुनाई दे रही थी ! लगातार लोगों के समूह प्रार्थना करने के लिए चर्च में जा रहे थे
! रात को ठीक 12 बजे यीशु के आगमन के साथ ही चर्च के घंटे बज उठे थे ! पुनिया ने पुल
के नीचे अपनी छोटी सी खोली को बड़े उत्साह के साथ यथासंभव सजाया था ! उसने सुना था
क्रिसमस के दिन सेंटा क्लॉज़ आते हैं और बच्चों के लिए ढेर सारे तोहफे भी लाते हैं
! सुबह से अपने तकिये के नीचे, गद्दी के नीचे वह बार-बार
टटोल कर देख चुकी थी ! अभी तक कोई उपहार उसे नहीं मिला था ! सड़क पर तमाम बच्चों को
बड़े सारे उपहारों के पैकिट लिए वह अपने माता-पिता के साथ जाते हुए देख रही थी ! दिन
के 12 बज चुके थे ! उसका चेहरा कुम्हला गया था ! आँखों में आँसू भर आए थे ! सोच
रही थी क्या सेंटा भी उपहार बड़े घर के बच्चों के लिए ही लाते हैं ! उस जैसे ग़रीब
बच्चों के लिए नहीं ? सुबह से कुछ खाया भी नहीं था ! अस्फुट स्वरों से उसके मुख से
दुआ निकल रही थी, "और कुछ भले ही न लाओ न लाओ प्यारे सेंटा बस एक रोटी ही ला दो ताकि
तुम्हारी राह देखने के लिए आँखें तो खुल सकें !"
अपना घर
जतन से सजाया
सेंटा न आया
साधना वैद
Wednesday, December 17, 2025
नानी का डंडा
घर में शादी की खूब रौनक और चहल-पहल थी ! सारा घर खुशी-खुशी शादी की रस्मों
रिवाजों को मनाने में लगा हुआ था ! नई बहू नव्या के साथ उसकी छ: वर्षीय भांजी इशिका
साए की तरह लगी रहती थी ! पल भर को भी नव्या से दूर रहना उसे मंज़ूर न था ! सुबह
होते ही झटपट तैयार होकर नव्या के पास आ जाती और अपनी मीठी-मीठी बातों से उसका मन
बहलाए रखती ! नए घर नए परिवेश में नव्या का भी इशिका के साथ बड़ा प्यारा सा रिश्ता
जुड़ गया था ! दोनों आपस में खूब हिल-मिल गई थीं !
आज नई बहू से पहली बार रसोई छुलवाई गई थी ! नव्या ने अपनी सासू माँ के आदेश का
पालन करते हुए सबके लिए बड़े अरमानों के साथ मूँग की दाल का हलवा बनाया था ! खूब
केसर, पिश्ते, बादाम, काजू, किशमिश डाल कर पाक कला की अपनी सारी प्रतिभा को उसने
आज इस हलवे में मिला दिया था ! इशिका रसोई में भी नव्या के आस-पास ही मंडराती रही
!
डाइनिंग टेबिल पर सब हलवे का बेसब्री के साथ इंतज़ार कर रहे थे ! सबने खूब सराह-सराह
कर हलवा खाया और नव्या को नेग में ढेर सारे नोटों से भरे हुए लिफ़ाफ़े भी मिले !
जैसे ही सासू माँ ने हलवा चखा उन्होंने नव्या को प्यार से अपने पास बुलाया और
बोलीं, “बेटा हलवा तो बहुत अच्छा बना है लेकिन इसमें चीनी कुछ ज्यादह है ! सबको
यहाँ शुगर की बीमारी है इसलिए आगे से कम शक्कर डालना !”
“नहीं माँ ! हलवे में चीनी तो बराबर है भाभी से कहिये आगे से ग्लव्ज़ पहन कर बनाएं
हलवा ! उनके हाथों की मिठास भी तो घुल गयी है इसमें !” यह चुटकी देवर सौरभ की थी !
सारा कमरा ठहाके से गूँज उठा !
इशिका अलर्ट हो गयी ! उसने
नव्या को नीचे झुका लिया और बड़े रहस्यमय अंदाज़ में उसके कान में फुसफुसा कर बोली, “मामी
आप बिलकुल मत डरना मैंने नानी की डंडा अपने कमरे में छुपा दिया है !”
नव्या हैरान थी, “क्यों इशिका ? अब नानी को चलने में परेशानी होगी ना ! तुमने डंडा
क्यों छिपाया?”
“वो मेरी दादी बुआ से रोज़ कहती हैं ठीक से खाना बनाना नहीं सीखेगी तो ससुराल में
रोज़ सास के डंडे खाने पड़ेंगे ! इसीलिये मैंने नानी का डंडा छिपा दिया !”
साधना वैद
Sunday, December 14, 2025
त्रिपदा छंद
Friday, December 12, 2025
कुछ कतौता
छाया कोहरा !
घर में घुसा रवि
छिपा कर चेहरा !
ठण्ड की रात
भारी अलाव पर
छाया घना कोहरा !
सीली लकड़ी
बुझ गया अलाव
जल उठा नसीब !
आज भी ‘हल्कू’
बिताते सड़क पे
पूस की ठण्डी रात
कहाँ बदला
नसीब किसानों का
स्वतन्त्रता के बाद !
साधना वैद
Wednesday, December 10, 2025
दहेज़ का दानव
इन सारी बातों के अलावा शादी विवाह में इतना दिखावा और फिजूलखर्ची का चलन हो गया कि आम औसत आमदनी के व्यक्ति के लिए ऐसी आडम्बरपूर्ण शादियाँ करना बिलकुल बस के बाहर हो गया ! लेकिन बेटी के ससुराल पक्ष के लोगों की डिमांड्स पूरी करने के लिए उन्हें इस तकलीफ से भी गुज़रना पड़ता है जो कि बहुत ही शर्मनाक एवं कष्टप्रद अनुभव होता है !
साधना वैद
Sunday, December 7, 2025
आप तो ऐसे न थे – लघुकथा
शोभना के पास न तो नीले रंग की कोई साड़ी ही थी न कोई सूट ! उसने तय कर लिया कि वह पार्टी में नहीं जाएगी ! लेकिन उसका मन बहुत उदास था !
नीलेश ने उसका अनमनापन भाँप लिया, “क्या बात है शोभना कुछ परेशान सी हो !”
“नहीं तो ! ऐसी तो कोई बात नहीं है !” मुँह फेर कर शोभना ने बात टाल दी !
“अच्छा ? तुम्हारी किटी नहीं हुई अभी तक इस महीने ! कब होगी बताया नहीं तुमने !”
“सोमवार को है लेकिन मैं नहीं जा रही इस बार !”
“क्यों ? तुम्हें तो बड़ा मज़ा आता है किटी में ! क्यों नहीं जाओगी ? कुछ चाहिए क्या ?”
शोभना चकित थी ! क्या नीलेश को टेलीपैथी भी आती है ! उसकी आँखें भर आईं !
“हाँ, इस बार सबने ड्रेस कोड रखा है लाल बॉर्डर की नीली साड़ी पहननी है सबको ! मेरे पास नहीं है इसीलिये नहीं जाऊँगी !” शोभना बोल ही पड़ी !
“बस इतनी सी बात ! चलो जल्दी से तैयार हो जाओ ! बाज़ार चलते हैं तुम्हारी साड़ी लाने !”
शोभना मुग्ध होकर नीलेश को देख रही थी !
उसके मौन अधर बार-बार दोहरा रहे थे, “आप तो ऐसे न थे !”
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