Monday, June 30, 2014

आइये कुछ देर हँस लें


यह सत्य है कि हम सार्क देश विश्व के अन्य कई देशों की तुलना में कम संपन्न एवं विकसित हैं लेकिन जीवट और विनोदप्रियता में हम संसार के अनेक देशों को पछाड़ने का माद्दा रखते हैं इसमें कोई संदेह नहीं है ! आइये देखें क्या कहती हैं ये तस्वीरें अपने देश की जिंदादिली और जीवन दर्शन के बारे में ! पाठकों से विनम्र अनुरोध है कि इन तस्वीरों में केवल मनोरंजन ही देखने और आत्मसात करने की चेष्टा करें ! किसी भी देश की प्रतिष्ठा एवं वहाँ के नागरिकों के सम्मान के प्रति अनादर की भावना से इन्हें आपके सामने प्रस्तुत नहीं किया गया है ! सभी चित्र गूगल से साभार लिये गये हैं !
  

नेपाल 


















पाकिस्तान 















अफगानिस्तान 
 
































बांग्लादेश 

 






















मालद्वीप 







 






















श्रीलंका 











 

















भूटान 













 



















भारत 


















  



















        
                                                                              














तो कहिये दोस्तों ! मज़ा आया या नहीं ! यह थी एक मजेदार झलक हमारे सार्क देशों की !


साधना वैद     

Saturday, June 28, 2014

रंग - ( तांका )


बनी जोगन
धार केसरी बाना
तजा संसार   
मीरा विरक्त हुई
हुए रंग असार !

अस्त होने को
सुनहरे से लाल
हुआ सूरज
रक्तिम मुख लिये  
छिपा नीलांचल में !

सावन आया
धानी चूनर ओढ़
धरा मुस्काई
पीले गोटे के फूल
पल्लू में टाँक लाई !

सजा व्योम में 
 लाल, नारंगी, नीला
पीला सुंदर
न्यारा इन्द्रधनुष
    जगती सारी खुश !  



साधना वैद









Monday, June 23, 2014

नारी


जा पहुँची है
शान से सफलता
के शिखर पे,
सामान्य नारी ही है
पूज पाओगे उसे ?

नारी पूज्य है
मंदिरों में ही बस
पाषाणी बनी, 
लड़ती है बाहर
अस्तित्व की लड़ाई !

अस्थि मज्जा से
निर्मित किया सदा 
तन तुम्हारा
   आत्मा को भी सजाया    
संस्कार की कूँची से !

साधना वैद

Friday, June 20, 2014

रोज़ देते हैं नया इक इम्तहाँ


इस कदर डूबे रहे खुद में कि तुम
भूल बैठे वक्त की फितरत सनम !
ज़िंदगी हर हाल में बढ़ती रही
बस पिछड़ती जा रही उल्फत सनम !

हर कदम पर फासले बढ़ते रहे
आस होती जा रही कम हर कदम !
रोज़ रोशन इक शमा है बुझ रही
रोज़ तारीकी में भटके दम ब दम !

तुम सितारों से गले मिलते रहे
ज़र्रे-ज़र्रे ने किये हम पर करम !
रोज़ दिल पर सौ कहर बरपा किये
रोज़ दिल में आ ठहर जाते हैं ग़म !

रोज़ बदले ज़िंदगी के फलसफे
रोज़ मुश्किल राह पर चलते हैं हम !
एक तुझको देखने की चाह में
रोज़ तूफानों तले पलते हैं हम !

देख तो लो पास आकर तुम हमें
किस तरह हर रोज़ मिट जाते हैं हम !
रोज़ देते हैं नया इक इम्तहाँ
रोज़ मिट-मिट कर सँवर जाते हैं हम !

साधना वैद



चित्र - गूगल से साभार