Wednesday, June 28, 2023

घनेरी घटाओं का आलय – मेघालय – 9

 



12 मई – शानदार शिलौंग के भव्य दर्शनीय स्थल

11 मई का दिन बहुत रोमांचक तथा शारीरिक और मानसिक थकन भरा था ! लिविंग रूट ब्रिज, जिसके बारे में आपने विस्तार से पिछली पोस्ट  में पढ़ा होगा, तक जाना और आना, फिर दूर पार्किंग में खड़ी बस तक पहुँचने की कवायद और फिर मावलिन्नोंग विलेज में पैदल घूमना कुल मिला कर शरीर पर कुछ अधिक ही अत्याचार सा हो गया ! ये डर था अगले दिन सुबह समय से उठ भी पायेंगे या नहीं, उठ गए तो ठीक से खड़े भी हो पायेंगे या नहीं और खड़े हो गए तो घूमने जाने की हिम्मत बची होगी या नहीं ! लेकिन सुबह जब नींद खुली तो बिलकुल वैसा ही तरोताजा और सामान्य अनुभव कर रहे थे जैसे रोज़ करते हैं ! रात को सोने से पहले वोलोनी स्प्रे और ट्यूब दोनों से ही घुटनों की खूब अच्छी तरह से सेवा कर ली थी ! एक पेन किलर भी खा ली थी तो सुबह कोई परेशानी नहीं हुई ! झटपट नहा धोकर तैयार हो गए और नीचे डाइनिंग रूम में जाकर ठीक से नाश्ता भी कर लिया ! विद्या जी के पैरों में बड़ा दर्द था ! वे नाश्ते के लिए भी नीचे नहीं आईं ! उनको मैंने वोलोनी ट्यूब और स्प्रे दिया लगाने के लिए जिसके प्रयोग के कुछ देर बाद उन्हें कुछ राहत मिली ! उन्होंने नाश्ता भी कमरे में ही किया ! पहले वे सोच रही थीं कि दिन में कमरे में ही आराम करेंगी ! साथ में घूमने नहीं जायेंगी ! लेकिन फिर उनका भी मन नहीं माना और वो भी साथ जाने के लिए तैयार हो गईं ! उनके नहीं जाने की बात से हम सभी थोड़ा उदास हो गए थे ! ग्रुप में किसी एक को भी तकलीफ हो तो सब चिंतित हो जाते हैं ! स्वाभाविक भी है ! लेकिन जैसे ही उन्हें तैयार होते देखा सबके चहरे खिल गए !

लेडी हैदरी पार्क

आज हमें मेघालय की राजधानी शिलौंग में घूमना था ! एक छोटा सा पहाड़ी शहर लेकिन पूरी तरह से आधुनिक एवं सभी आवश्यक सुविधाओं से संपन्न एवं सुसज्जित ! होटल से निकलते ही सबसे पहले जिस स्थान पर गए उसका नाम था लेडी हैदरी उद्यान ! इस उद्यान का नाम अकबर हैदरी  की पत्नी के नाम पर रखा गया है जो अंग्रेजों के शासन काल में पहले भारत सरकार के वित्त विभाग में एक छोटे अफ़सर के रूप में नियुक्त हु बाद में भारत के सर्वप्रथम 'कन्ट्रॉलर ऑफ़ ट्रेजरी' बने ! इस पद पर नियुक्त होने वाले वे सर्वप्रथम भारतीय थे ! 1941 में उनकी मृत्यु हो गयी !

बच्चों के लिए यहाँ पर एक छोटा सा चिड़ियाघर है साथ ही यहाँ एक ख़ूबसूरत झरना और स्वीमिंग पूल भी है ! जू में बहुत कम प्राणी थे ! अधिकतर केज खाली थे ! कुछ पक्षी, एक लंगूर, एक लोमड़ी और चंद बत्तख ही दिखाई दिए ! लेडी हैदरी पार्क में रंग बिरंगे बेहद खूबसूरत फूलों की बहुत ही सुन्दर क्यारियाँ हैं ! पार्क में पैदल चलने वालों के लिए सुरम्य मार्ग बनाए गए हैं जो मैनीक्योर किए गए लॉन में टहलना आसान बनाते हैं ! पार्क की सुरम्य हरियाली, नीले गुलमोहर के पेड़ और खूबसूरत फूलों की क्यारियों के साथ फोटोग्राफी का आनंद दोगुना हो जाता है ! यहीं पर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट मेघालय का एक छोटा सा फॉरेस्ट म्यूज़ियम भी है जिसमें कई छोटे बड़े जानवरों और पक्षियों के कंकाल, खाल, हिरन व बारासिंगा आदि के सींग और बड़े जानवरों के स्कल्स और टेक्सीडर्मीज़ प्रदर्शन के लिए रखे हुए थे !

वायु सेना संग्रहालय

लेडी हैदरी उद्यान के बाद हम लोग जिस महत्वपूर्ण स्थान को देखने गए वह था शिलौंग का एयर फ़ोर्स म्यूज़ियम ! वयस्कों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी यह एक ज़बरदस्त आकर्षण एवं ज्ञान का शानदार स्रोत है !  वायु सेना का यह संग्रहालय हमें अपने रक्षा बलों के बारे में,  मुख्य रूप से भारतीय वायु सेना के  बहादुर उड़ान योद्धाओं और रक्षा इतिहास के बारे में समग्र जानकारी प्रदान करता है ! इस संग्रहालय में भारत-चीन युद्ध और भारत-पाकिस्तान युद्ध के अनेकों चित्र प्रदर्शित हैं ! तस्वीरों की विस्तृत श्रृंखला एवं अस्त्र शस्त्रों की विविध किस्मों के प्रदर्शन की वजह से यह हर तरह से चमत्कृत तो करता ही है हमारी जिज्ञासा एवं कौतुहल को भी शांत करने की अद्भुत क्षमता रखता है ! संग्रहालय में दर्शक अजगर की खाल भी देख सकते हैं ! यहाँ की जीवन शैली, रहन सहन, लोक जीवन में प्रयोग में आने वाली वस्तुओं, घरेलू औजारों, वस्त्र, गहने एवं वाद्य यंत्रों का भी यहाँ बड़े ही कलात्मक ढंग से प्रदर्शन किया गया है !

संग्रहालय में वायु सेना के जांबाज़ अधिकारियों की तस्वीरों के साथ पायलटों द्वारा पहनी जाने वाली वर्दी, मेडल्स, टाई, मिसाइल, रॉकेट और वायु-शिल्प के लघु मॉडेल्स के साथ-साथ अन्य अनेकों यंत्र व उपकरण भी प्रदर्शित हैं ! परिसर में उपहार की एक दुकान भी है जहाँ से आवश्यकता का सामान एवं स्मृति चिन्ह खरीदे जा सकते हैं ! संग्रहालय सार्वजनिक अवकाश के दिन बंद रहता है और इसमें प्रवेश के लिए कोई टिकिट नहीं है ! इतने अभूतपूर्व संग्रहालय को देख कर मन गर्व से भर उठा और भारतीय वायु सेना के इन जांबाज़ सेनानियों के लिए मन में अपार श्रद्धा और कृतज्ञता के भाव जागृत हो गये जिनकी वजह से हम अपने घरों में सुरक्षित रहते हैं ! यहाँ का अनुभव बहुत ही रोमांचक था ! मैंने यहाँ से फ्रिज मेग्नेट खरीदे !

चाय के बागान

एयर फ़ोर्स म्यूज़ियम के पास ही नीची पहाड़ियों पर फैले चाय के बड़े बड़े बागान थे ! सब खूब मौज मस्ती के मूड में थे ! सबने तरह तरह के पोज़ बना कर चाय के बागों में खूब फोटोग्राफी की ! बड़ा दिलकश नज़ारा था ! जहाँ तक नज़र जा रही थी दूर-दूर तक चाय के बाग़ ही बाग़ नज़र आ रहे थे ! न जाने कितनी फिल्मों के दृश्य आँखों के सामने तैर गए जिनमें नायक नायिका ऐसे ही चाय के बागों में रोमांटिक गीत गाते हुए फिल्माए गए हैं ! ग्रुप के सभी सदस्य एक दूसरे की तस्वीरें लेने में लगे हुए थे ! यहाँ आकर मन जोश और उत्साह से भर गया !

डॉन बोस्को म्यूज़ियम

हमारा अगला पडाव था डॉन बोस्को म्यूज़ियम ! सच कहूँ तो देश विदेश के कई संग्रहालय देखने का अवसर मिला लेकिन इतना भव्य, इतना व्यवस्थित और इतना सुनियोजित संग्रहालय मैंने अन्यत्र कहीं नहीं देखा ! डॉन बॉस्को संग्रहालय एशियाई महाद्वीप का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संग्रहालय है ! यह मावलाई शिलौंग में स्थित है और मिजोरम, नागालैंड, असम, अरुणांचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा की संस्कृति और परम्परा को प्रदर्शित करता है !

संग्रहालय कलाकृति, अलंकरण, क्षेत्रीय पोशाक, हथियार, हस्तशिल्प और तस्वीरों का एक विस्तृत संग्रह प्रदर्शित करता है ! सात मंज़िला संग्रहालय आगंतुकों को 14 से अधिक बेहद सुन्दर, मनोरंजक, अत्यधिक आकर्षक और सूचनापरक दीर्घाओं के माध्यम से पूर्वोत्तर प्रदेशों के सामाजिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक अनुभव को साझा करता है ! इस संग्रहालय में नया जोड़ा गया स्काई वॉक अद्भुत है जो आगंतुकों को उत्तर पूर्व की खूबसूरत क्वीन सिटी शिलौंग का 360° विहंगम दृश्य दिखाता है ! संग्रहालय मानवशास्त्रीय पहलुओं के साथ जनसंख्या भूगोल और प्राकृतिक संसाधनों के संदर्भ में प्रत्येक राज्य की अनूठी विशेषताओं को प्रदर्शित करता है ! यह नृत्य और संगीत, कला और शिल्प जैसे सभ्यता के सांस्कृतिक आयामों को भी दर्शाता है जिन्हें वीडियो, मॉडल, चित्रों और नवीनतम मल्टीमीडिया प्रौद्योगिकियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है ! मुझे तो इस संग्रहालय को देखने का अनूठा तरीका बहुत पसंद आया ! यह संग्रहालय सात मंज़िल का है ! इसकी तीन मंज़िल ग्राउंड फ्लोर से नीचे हैं और चार मंज़िल ग्राउंड फ्लोर से ऊपर हैं ! नीचे भूतल की तीनों मंज़िलों में संग्रहालय की बड़ी सुन्दर दीर्घाएं हैं ! उतरने के लिए बड़ी ही आरामदायक सीढियाँ हैं ! आप तीन मंज़िल कब देख लेते हैं पता ही नहीं चलता ! न ही ज़रा भी थकान होती है ! सबसे नीचे जाकर आप टॉप फ्लोर तक लिफ्ट से जा सकते हैं ! वहाँ स्काई वॉक का आनंद लेकर, सारे शहर का खूबसूरत नज़ारा देख कर आप इसी तरह संग्रहालय की बाकी चार मंज़िलों की गैलरीज़ को भी देखने में व्यस्त हो जाते हैं ! हर दीर्घा में इतने व्यवस्थित तरीके से इन प्रदेशों के जन जीवन के विविध रंगों की झाँकियों का प्रदर्शन किया गया है कि चार मंज़िलें कब समाप्त हो जाती हैं पता भी नहीं चलता ! प्राय: ऊपर चढ़ने में लोगों को थकान होती है लेकिन इस संग्रहालय का यह सिस्टम मुझे बहुत पसंद आया कि आपको कहीं भी चढ़ना नहीं पड़ता ! ग्राउंड फ्लोर पर सोवेनियर्स और हैन्डीक्राफ्टस की बड़ी अच्छी दूकान है ! मैंने वहाँ से भी बड़े सुन्दर फ्रिज मैगनेट खरीदे ! हमारे आठ लोगों के ग्रुप में सिर्फ एक ही कैमरा इस्तेमाल करने की परमीशन मिली थी ! यामिनी श्रीवास्तव जी का कैमरा ही फोटो खींच पा रहा था ! अक्सर हम लोग बिछड़ जाते थे तो यहाँ मन चाही तस्वीरें नहीं खींच सके इसका अफ़सोस रहा ! लेकिन इस संग्रहालय में आनंद बहुत आया यह एक निर्विवाद सत्य है !  

वार्ड्स लेक

डॉन बोस्को संग्रहालय को देखने के बाद आज के दिन का अंतिम पर्यटन स्थल खासी हिल्स में स्थित वार्ड्स लेक देखना बाकी रह गया था ! एक बटरफ्लाई म्यूज़ियम देखने का प्लान हम लोगों ने पहले ही कैंसिल कर दिया था ! कल की थकान अब अपना असर दिखाने लगी थी ! लेकिन वार्ड्स झील पहुँच कर तन मन और आँखें सबको बहुत आराम मिला ! बड़ा ही रमणीक स्थान है !

वार्ड्स झील शिलौंग के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है जिसे अवश्य देखना चाहिए ! इसे पोलक झील (नान पोलोक) के नाम से भी जाना जाता है ! यह लगभग 130 वर्ष से भी पुरानी झील है !  इस झीँँल की परिकल्पना असम के तत्कालीन मुख्य आयुक्त सर विलियम वार्ड ने की थी ! इसीलिये इसका नाम वार्ड्स लेक पड़ा ! इसका निर्माण वर्ष 1894 में कर्नल हॉपकिंस ने करवाया था ! यह शिलौंग शहर के मध्य में स्थित है ! यह खूबसूरत झील, रंग बिरंगे सुन्दर फूलों की क्यारियों, कोबल-पत्थर के फुटपाथों और एक मंत्रमुग्ध कर देने वाले फव्वारे के अलावा हरे-भरे बगीचों से घिरी हुई है ! झील के बीच में एक लकड़ी का पुल है जहाँ से झील की मछलियों को खाना भी खिला सकते हैं ! छोटी छोटी बत्तखें झील में तैर रही थीं जिन्हें देख कर बड़ा अच्छा लग रहा था ! झील में बोटिंग की भी सुविधा है ! परिसर में विभिन्न प्रकार के जलपान और पेय पदार्थों के साथ एक कैफेटेरिया भी है !  यह स्थानीय लोगों और छुट्टियों पर आने वाले बाहरी पर्यटकों के बीच समान रूप से लोकप्रिय है ! उस दिन भी कुछ बहुत प्यारी-प्यारी लड़कियों के कई ग्रुप्स हमने देखे ! उनकी चुहलबाजियाँ और हँसना खिलखिलाना बड़ा अच्छा लग रहा था ! एक बात जो नोटिस की वह यह थी कि पढी लिखी आधुनिक लडकियाँ भी वहाँ की पारंपरिक खासी ड्रेस में थीं जिसे मेखला चादर कहते हैं ! कुछ बड़ी महिलाओं की ड्रेस तो बहुत कीमती और शानदार लग रही थी ! उन लोगों से परमीशन लेकर मैंने उनकी कुछ तस्वीरें भी लीं तो वो बहुत खुश हुईं !

वार्ड्स लेक देख कर पुलिस बाज़ार में हमें शॉपिंग के लिए जाना था लेकिन हम सीनियर लोग सभी बहुत थक गए थे ! संतोष जी और विद्या जी तो बहुत अधिक थक गयी थीं ! प्रमिला जी की तबीयत भी बुखार के कारण पहले से ही ढीली थी ! हमें भी कोई विशेष खरीदारी नहीं करनी थी इसलिए हम पाँच लोग बस से होटल लौट आये और अंजना जी, रचना जी और यामिनी पुलिस बाज़ार शॉपिंग करने के लिए चली गईं ! होटल में आने के बाद हाथ मुँह धोकर फ्रेश हुए ! गरमागरम चाय बनाई ! सुबह के लिए ज़रूरी सामान निकाल कर बाकी सारा सामान ठीक से पैक किया क्योंकि 13 तारीख की सुबह ही हमें गुवाहाटी के लिए निकलना था ! गुवाहाटी से दिन में 1 बजे अगरतला के लिए हमारी फ्लाइट थी और हमें 10.30 तक एयरपोर्ट पर रिपोर्ट करना था ! शिलौंग से गुवाहाटी पहुँचने में लगभग तीन चार घंटे लगते हैं ! इसलिए यह तय हुआ कि सब सुबह सात बजे तैयार हो कर ही नीचे डाइनिंग हॉल में जायेंगे और नाश्ता करके सीधे बस में बैठेंगे ! सुबह की सारी तैयारी करके मैं निश्चिन्त हो गयी थी ! कुछ देर किताब पढ़ती रही ! आठ बजे तक हमारे ग्रुप के युवा सदस्यों वाला छोटा ग्रुप भी शॉपिंग करके पुलिस बाज़ार से आ गया ! सबने जल्दी ही खाना खा लिया और निंद्रा देवी की शरण में चले गए ! अब मुझे भी चलना चाहिए ! पोस्ट भी लम्बी हो गयी है ! रात भी बहुत हो गयी है और साथ ही थकान भी महसूस हो रही है ! तो मुझे इजाज़त दीजिये अभी ! अगले अध्याय में आपको बहुत ही रोमांचक संस्मरण सुनाने हैं अगरतला के ! तो थोड़ी सी प्रतीक्षा करिए ! अगला अध्याय आपको भी रोमांचित कर देगा यह मेरा वायदा है आप से ! आज के लिए नमस्कार एवं शुभ रात्रि !

साधना वैद


Sunday, June 25, 2023

घनेरी घटाओं का आलय – मेघालय – 8

 



11 मई – लिविंग रूट ब्रिज – रोमांचक अनुभव

खूबसूरत डौकी में तृप्तिदायक बोटिंग के बाद हम मगन मन शिलौंग की तरफ बढ़ रहे थे ! इतनी सारी तस्वीरें इतनी सारी बातें मन में उमड़ घुमड़ रही थीं कि कब साँझ उतर आई पता ही नहीं चला ! एकाध स्थान पर बस रोकने के लिए कहा भी तो दिन्तू ने रोकी नहीं ! “बस थोड़ी दूर और है !” यही कहता रहा और बस हवा से बातें करती रही ! हमें समझ ही नहीं आ रहा था कि एक टॉयलेट पर रोकने के लिए इसे बस को इतना दौड़ाना क्यों पड़ रहा है ! अंतत: एक बहुत ही छोटी सी जगह पर बस रुकी ! यहाँ लोकल हैन्डीक्राफ्ट की और फल फ्रूट्स की कुछ छोटी छोटी दुकानें थीं ! टॉयलेट तो कहीं दूर दूर तक दिखाई नहीं दिया ! खैर राजन को छोड़ कर लगभग सभी लोग बस से नीचे उतर चुके थे ! मैंने भी उतरने का मन बना लिया ! राजन नीचे नहीं आ रहे थे तो अपना फोन का पाउच मैंने उन्हें थमाया ! यह पाउच मेरे सामान का सबसे आवश्यक और महत्वपूर्ण हिस्सा था ! इसमें कुछ रुपये, मेरे दोनों फोन और हम दोनों के आई कार्ड्स रखे रहते थे ! यह हमेशा मेरे गले में लटका रहता था इसीलिये कहीं भी फोटो लेनी हो, कोई पेमेंट करना हो या अपना आई कार्ड दिखाना हो मुझे देर नहीं लगती थी ! रास्ता ज़रा ऊबड़ खाबड़ था तो दुद्दू ने बस से उतरते ही मुझे मेरी बाँस की लाठी थमा दी !

एक टूटे फूटे से कमरे में बड़ा खराब सा टॉयलेट था ! लेकिन कोई विकल्प नहीं था तो उसीसे काम चलाना पड़ा ! एक छोटी सी बालिका बोतल से पानी डाल कर हाथ धुला रही थी और दस रुपये चार्ज कर रही थी ! मैंने सोचा अभी किसीसे लेकर दे दूँगी फिर बस में लौटा दूँगी क्योंकि मेरा पाउच तो राजन के पास बस में ही था ! दो चार कदम आगे बढ़ी तो देखा राजन तो नीचे ही खड़े थे ! मैंने पाउच के बारे में पूछा तो बोले वह तो बस में ही है सीट पर ! मैं जल्दी से बस की ओर जाने लगी तो दुद्दू दिन्तू ने मुझे एक नए रास्ते पर कंधा पकड़ कर घुमा दिया ! “आंटी, इधर जाना है ! इधर रास्ता है !” मैं हैरान थी ! मैंने कहा बस तो उधर खड़ी है तो उसने बताया हम लोग लिविंग रूट ब्रिज देखने जा रहे हैं ! मैंने देखा हमारे ग्रुप के सभी लोग उसी रास्ते पर चल रहे थे ! दुद्दू दिन्तू के बस को दौड़ाने का आशय अब समझ में आया ! रात न हो जाए और हम लोग समय से इस जगह को देख लें इसीलिये वे लोग बस को भगा रहे थे ! मुझे बड़ा अफ़सोस हो रहा था न मेरे पास फोन था और न ही पैसे ! कोई मुश्किल आने पर न किसीसे कांटेक्ट कर सकते थे, न फोटो खींच सकते थे, न ही कुछ पसंद आ जाए तो खरीद ही सकते थे ! रास्ते के दोनों ओर हैन्डीक्राफ्ट आइटम्स की, ठंडे पानी की बोतल, कोल्ड ड्रिंक्स, नमकीन, चिप्स, वेफर्स आदि की अनेक दुकाने थीं ! हमारे पास भी पानी की बोतल, नमकीन, बिस्किट्स वगैरह सब कुछ थे लेकिन वह बैग भी तो बस में ही था ! सब लोग अपनी अपनी स्पीड से चल रहे थे ! संतोष जी, प्रमिला जी, विद्या जी, मैं और राजन धीरे धीरे चल रहे थे, अंजना जी, रचना और यामिनी आगे निकल गयी थीं ! काफी दूर जाने के बाद ढेर सारी सीढ़ियाँ दिखाई दीं ! सीढ़ियाँ पत्थरों के ब्लॉक्स की थीं और बहुत रफ और ऊँची थीं ! प्रमिला जी, संतोष जी ने तो अपने हाथ खड़े कर दिए ! मुझे भी राजन की चिंता हो रही थी ! अभी मेघालय के इस ट्रिप पर आने से पहले 23 अप्रेल को दिल्ली में हुमायूँ टूम पर ऐसी ही ऊँची नीची सीढ़ियों पर चढ़ने की वजह से इन्हें पीठ में बहुत तकलीफ हो गयी थी ! यहाँ तो सीढ़ियों पर कोई रेलिंग भी नहीं थी ! लेकिन लिविंग रूट ब्रिज देखने की मेरी इच्छा बहुत प्रबल थी ! राजन ने मुझे पीछे से वापिस लौट आने के लिए आवाज़ दी ! उन्हें मेरी चिंता हो रही थी कि मुझे सीढियाँ चढ़ने में बहुत तकलीफ होती है और वापिस लौटने वाले सैलानी बता रहे थे कि अभी तो बहुत नीचे जाना है ! ये सीढ़ियाँ ख़त्म होने के बाद नेचुरल ऊबड़ खाबड़ रास्ते पर ट्रेकिंग करके भी काफी नीचे और उतरना होगा ! मैंने मन ही मन तय कर लिया था नीचे ब्रिज तक तो जाना ही है किसी भी तरह ! मैंने पलट कर राजन से वापिस बस में लौट जाने के लिए कहा और उन्हें यह भी आश्वस्त कर दिया कि मैं जहाँ तक आसानी से जा सकूँगी जाउँगी वरना लौट आउँगी ! विद्या जी भी साथ हैं ! फिर जल्दी से मैं मुड़ गयी ! कहीं ऐसा न हो कि ये स्ट्रोंगली मना कर दें तो मैं फिर जा ही न पाऊँ ! राजन बस की तरफ जाने लिए वापिस लौट गए और मैं ब्रिज की तरफ जाने के लिए सीढ़ियाँ उतरने लगी ! लाठी का ही इस समय सबसे बड़ा सहारा था क्योंकि रास्ता चौड़ा था ! आने जाने वालों की भीड़ थी और पकड़ने के लिए रेलिंग भी नहीं थी ! हम और विद्या जी अपनी अपनी स्पीड से आगे पीछे चल रहे थे ! गला सूख रहा था ! बेहद प्यास लग रही थी लेकिन बोतल खरीदने के लिए पैसे नहीं थे ! धीरे धीरे रुकते रुकाते मैं नीचे चली जा रही थी ! अभी तो रोशनी थी दिन की ! डर लग रहा था अन्धेरा हो गया तो कैसे दिखाई देगा कुछ ! बीच में विद्या जी भी एक साइड में बैठी मिलीं ! बोलीं बहुत थक गयी हैं अब और आगे नहीं जायेंगी ! यहीं से लौट जायेंगी ऊपर ! मुझे भी यही ठीक लगा ! तकलीफ हो गयी तो कैसे जायेंगी और हम लोग ही कितनी मदद कर पायेंगे उनकी ! मैंने अनुमोदन में सर हिलाया और यही सलाह दी आराम आराम से जाइयेगा ! ज़रुरत हो तो किसीकी हेल्प ले लीजिएगा ! और आगे बढ़ गयी !

अब सीढ़ियाँ समाप्त हो गयी थीं ! नेचुरल चट्टानी रास्ता था उतार पर ! मुझे मन ही मन घबराहट हो रही थी अगर यहाँ मैं गिर गयी तो फोन के बिना किसीको कैसे इन्फॉर्म करूँगी कि क्या हुआ है ! या बेहोश हो गयी तो ‘अज्ञात’ महिला की पहचान के साथ कहाँ पहुँचा दी जाऊँगी ! सोचती जाती थी और अपना सर झटक कर हर दुश्चिंता को खारिज भी करती जाती थी ! हर चार छ: कदम के बाद लोगों से पूछती थी और कितना उतरना है और फिर हिम्मत बाँध कर लाठी के सहारे अपने कदम बढ़ा देती थी ! मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी अंधे कुँए में प्रवेश करने जा रही हूँ जहाँ के खतरों से मैं अनजान भी हूँ और उनका सामना करने के लिए मेरे पास पर्याप्त साधन भी नहीं हैं ! फिर भी एक जूनून सा था कि लिविंग रूट ब्रिज तक तो जाना ही है किसी भी हाल में ! भले ही इस समय मेरे साथ कोई नहीं था लेकिन एक भरोसा था हमारे ग्रुप के तीन बहुत ही समर्पित और ऊर्जावान साथी अंजना जी, रचना और यामिनी नीचे हैं ! कोई ज़रुरत पड़ी तो उनसे सहायता ज़रूर मिल जायेगी ! बस इन्हीं ख्यालों में गुम लाठी के सहारे मैं आगे बढ़ती जा रही थी ! कितना और जाना होगा आगे पता नहीं था लेकिन सम्मोहित सी मैं आगे खिंची जा रही थी ! और अचानक देखा सामने थोड़ी दूरी पर रूट ब्रिज दिखाई दे रहा था ! मन खुशी से बल्लियों उछल रहा था ! जीवन के 75 वें साल में यह मैदान तो मार लिया था मैंने ! ब्रिज देखते ही घबराए हुए मन में जोश का संचार हो गया ! चहरे पर चमक आ गयी और चाल में तेज़ी आ गयी कि पीछे से आवाज़ आई, “ओ आंटी जी, टिकिट तो लो पहले !” पैरों में जैसे ब्रेक लग गया ! यह क्या आफत आई ! मेरे पास तो पैसे ही नहीं हैं ! अब क्या करें ! क्या मंज़िल तक आकर टिकिट न ले पाने के कारण बिना देखे लौट जाना होगा ! इतनी मेहनत, इतने प्रयत्न सब व्यर्थ हो जायेंगे ! मैंने पीछे मुड़े बिना हाथ हिला दिए, “मेरे पास इस समय पैसे नहीं हैं भाई ! पर्स बस में रह गया ! लौट कर पैसे दे दूँगी ! आप किसीको मेरे साथ भेज देना !” “हैं ?” कुछ देर सन्नाटा रहा ! फिर बड़ी ज़ोर से हँसने की आवाज़ आई, “आप तो जाइए आंटी ! कोई बात नहीं बाद में दे देना पैसे !” मेरी जान में जान आ गयी ! लिविंग रूट ब्रिज पर पाँव रखते ही मन झूम उठा ! कुदरत और इंसान की कारीगरी का यह अनोखा नमूना है जो न जाने कितने सालों से खड़ा हुआ है ! इसमें किसी किस्म का मानव निर्मित स्तम्भ, कलपुर्जा या सपोर्ट के लिए कोई गर्डर एंगिल आदि नहीं लगा है लेकिन फिर भी यह इतना मजबूत है कि सालों से लाखों सैलानियों के बोझ को आराम से उठा रहा है और ज़िंदा है ! एक ख़ास तरह के रबर के पेड़ की लचीली जड़ों को गूँथ कर यह पुल बनाया गया है जो दूर से बड़े से झूले का आभास देता है ! इस पेड़ का बॉटोनिकल नाम है ( Ficus elastica ) ! यहाँ के लोग पेड़ों की जड़ों को मन चाही दिशा देकर विकसित करने के कौशल में माहिर हैं ! जहाँ ज़रुरत होती है दोनों किनारों पर उगे हुए पेड़ों को इसी प्रकार मन वांछित दिशा देकर बढ़ने देते हैं और पर्याप्त बढ़ जाने पर उनकी कोमल जड़ों को आपस में गूँथ पुल का आकार दे देते हैं ! बीच के हिस्से में मिट्टी डाल कर उसे समतल करके रास्ता बना दिया जाता है ! अद्भुत है ना ! यह पुल लोहे पत्थर सीमेंट कॉन्क्रीट का नहीं है ! यह पेड़ की जड़ों को गूँथ कर बनाया हुआ पुल है ! पुल बहुत लंबा नहीं है लेकिन निश्चित रूप से दर्शनीय है ! नीचे से अंजना जी, रचना और यामिनी ने जैसे ही मुझे देखा तो उन्हें भी अपनी आँखों पर भरोसा नहीं हुआ ! मुझे इसी बात का अफ़सोस रहा कि मोबाइल पास नहीं था इसलिए मैं इस अजीबो गरीब रास्ते और सीढ़ियों की फोटो नहीं खींच पाई ! थोड़ी देर बाद विद्या जी भी पहुँच गईं ! अब तो नीचे ब्रिज तक आने वाला हमारा पूरा ग्रुप इकट्ठा हो गया था ! खूब जम के फोटोग्राफी हुई ! थोड़ा समय नीचे जलधारा के पास गुज़ारा ! और लौट चले वापिसी के रास्ते पर ! अन्धेरा होने लगा था ! टिकिट विंडो पर अंजना जी ने मेरे टिकिट के पैसे दे दिए ! यामिनी को मैंने बता दिया था मुझे ऊपर चढ़ने में दिक्कत होती है उस समय मेरे साथ रहना ! यामिनी सच में बहुत प्यारी और बहुत हेल्पिंग हैं ! पूरे रास्ते वो मेरे साथ रहीं ! पानी पिलाती रहीं ! जहाँ ज़रुरत पडी हाथ पकड़ कर ऊपर चढ़ने में भी सहायता की ! रास्ते में जो लोग मिल रहे थे हमारी हौसला अफजाई कर रहे थे ! अच्छा लग रहा था ! अंतत: यह मेराथन भी जीत ली और हम पसीने से लथपथ ऊपर भी पहुँच ही गए ! लेकिन पार्किंग में तो हमारी बस थी ही नहीं ! पता चला आधा किलोमीटर दूर एक और पार्किंग है बस वहाँ पर है ! अंजना जी और रचना आगे निकल गए थे ! विद्या जी भी अलग हो गयी थीं ! मैं और यामिनी साथ थे ! धीरे धीरे पैदल चलते हुए जब बस तक पहुँचे तो जान में जान आई ! इस समय ग्रुप के सभी साथियों को एक साथ देख कर एक बड़ी जीत का अहसास हो रहा था !

यहाँ से मावलिन्नांग विलेज जाना था जो लिविंग रूट ब्रिज से मात्र 2-3 किलोमीटर दूर ही था ! मेघालय का गाँव मावलिन्नांग, राजधानी शिलौंग और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से 90 किलोमीटर दूर स्थित है ! इस गाँव को एशिया के सबसे स्वच्छ गाँव का खिताब मिला हुआ है ! मावलिन्नांग गाँव इसलिए साफ है क्योंकि यहाँ के लोग सफाई को लेकर बहुत जागरूक हैं ! 

अपनी स्वच्छता के लिए मशहूर मावलिन्नांग को देखने के लिए हर साल पर्यटक भारी तादाद में आते हैं ! 'मावलीन्नांग' गाँव को 'भगवान का अपना बगीचाभी कहा जाता है ! 500 लोगों की जनसंख्या वाले इस छोटे से गाँव में करीब 95 खासी जनजातीय परिवार रहते हैं !

मावलिन्नांग गाँव मातृसत्तात्मक है, जिसके कारण यहाँ की औरतों को ज्यादा अधिकार प्राप्त हैं और गाँव को स्वच्छ रखने में वो अपने अधिकारों का बखूबी प्रयोग करती हैं ! मावलिन्नांग के लोगों को कंक्रीट के मकान की जगह बाँस के बने मकान ज्यादा पसंद हैं !

मावलिन्नांग में पॉलीथीन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है और यहाँ इधर उधर थूकना मना है ! गाँव के रास्तों पर जगह-जगह कूड़े फेंकने के लिए बाँस के कूड़ेदान लगे हुए हैं ! इसके अलावा रास्ते के दोनों ओर फूल-पौधों की क्यारियाँ और स्वच्छता का निर्देश देते हुए बोर्ड भी लगे हुए हैं ! परिवार का हर सदस्य गाँव की सफाई में हर रोज़ भाग लेता है और अगर कोई ग्रामीण सफाई अभियान में भाग नहीं लेता है तो उसे सजा के तौर पर घर में खाना नहीं मिलता है ! यहाँ अधिकतर घरों में होम स्टे की सुविधा है ! पर्यटकों के लिए यह बहुत ही सुखद अनुभव होता है !

यहाँ गाँव के प्रवेश स्थल पर ही स्थानीय आर्ट और हैंडीक्राफ्ट की कई दुकाने थीं ! हम लोगों ने स्वादिष्ट गरमागरम चाय का आनंद लिया ! और कुछ छोटी छोटी सोवेनियर टाइप चीज़ें भी खरीदीं जो अन्य स्थानों की तुलना में यहाँ बहुत किफायती दरों पर मिल रही थीं ! बहुत थकान होने के कारण मैं गाँव के अन्दर बहुत दूर तक नहीं गयी आस पास घूम कर ही लौट आई !

अब रात घिर आई थी ! शिलौंग पहुँच कर हॉट बाथ लेकर सोने का मन हो रहा था ! बस में बैठने के बाद कुछ झपकी सी भी आ रही थी ! हम लोग रात को आठ बजे तक शिलौंग में अपने होटल लैंडमार्क हिल्स विक्टोरिया पहुँच गए थे ! गनीमत यही रही कि उसी फ्लोर पर कमरा मिल गया ! होटल के वाई फाई से अपने फोन कनेक्ट करवाए ! नहा धोकर फ्रेश हुए और खाना खाने जब डाइनिंग हॉल में पहुँचे तो हमारे ग्रुप के लोगों का खाना लगभग समाप्त हो चुका था ! हमने भी जल्दी से खाना खाया और अपने बेहद थके हुए शरीर को बिस्तर के हवाले कर दिया ! इस वक्त भी रात के लगभग एक बज रहे हैं ! वही थकान इस समय भी हो रही है ! तो अब आपसे विदा लेती हूँ ! इजाज़त दीजिये ! शेष संस्मरण अगली पोस्ट में ! शुभ रात्रि !

साधना वैद

 


Thursday, June 22, 2023

सीख लें योग




 आप सभी को योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !

सीख लें योग

योग दिवस
सिखलाता है हमें
जीने का ढंग

योग साधना
हमारे जीवन की
हो आराधना

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साधना वैद

Monday, June 19, 2023

घनेरी घटाओं का आलय – मेघालय – 7

 



11 मई, बाय बाय चेरापूँजी


चेरापूँजी से विदा लेने का दिन आ गया था ! 11 मई की सुबह जल्दी उठ कर हमें शिलौंग के लिए निकलना था और रास्ते में कुछ दर्शनीय स्थलों को देखते हुए जाना था ! स्मोकी फॉल्स रिज़ोर्ट की खूबसूरत वादियों
, पहाड़ियों से जैसे बड़ी दोस्ती सी हो गयी थी इन दो ही दिनों में ! सुबह सुबह नर्म धूप की सुनहरी चुनरी ओढ़े हुए उन पहाड़ियों को जी भर कर आख़िरी बार देख लिया और ढेर सारी बातें भी कर लीं मन ही मन ! दोबारा जल्दी आने का प्रॉमिस भी कर दिया ! पूरा होगा या नहीं कभी कौन जाने लेकिन अपनी सखियों के आमंत्रण को ठुकराना पसंद नहीं था मुझे ! रिज़ोर्ट का डाइनिंग हॉल अमूमन देर से खुलता है ! लेकिन उस दिन हमारा बटर ब्रेड का ब्रेकफास्ट पैक करके देने के लिए कुछ जल्दी खुल गया था ! चाय पीकर अपना सारा सामान समेट कर हम लोगों ने अपनी बस की ओर प्रस्थान किया और गायत्री मन्त्र, और गणपति स्तुति के समवेत उद्घोष के साथ शिलौंग की राह पर हमारा काफिला आगे चल पड़ा ! रास्ते में हमारे अनुरोध पर दुद्दू दिन्तू ने हम सभी उम्र दराज़ महिलाओं के लिए मोटे मजबूत बाँस की चार लाठियाँ बना कर ला दीं जिनकी सहायता से हमारा कई स्थानों का घूमना संभव हो पाया ! इस बार हमारा रास्ता मेघालय प्रदेश के आतंरिक भागों से होकर गुज़र रहा था और बाँस के घने जंगल हमारा मन मोह रहे थे ! सारे रास्ते लीची, केले, आम, सुपारी, नारियल, कटहल के फलों से लदे पेड़ों को देख कर हम हैरान थे कि इन निर्जन स्थानों पर कुदरत के इन अनमोल तोहफों का सदुपयोग कौन करता होगा ! रास्ते में जगह जगह छोटे बड़े अनाम झरने भी खूब देखने को मिले ! चेरापूँजी वर्षा बहुल क्षेत्र है और यहाँ गहरी गहरी घाटियाँ भी हैं तो जहाँ भी पानी अधिक जमा हो जाता है झरने का रूप धारण कर बह निकलता है और सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देता है !

सुबह स्मोकी फॉल्स रिज़ोर्ट से जल्दी निकले थे तो किसीसे भी कुछ ठीक से खाया नहीं गया था ! हमने बटर ब्रेड के कुछ पीसेज पैक भी करवा लिए थे लेकिन चलती बस में पानी के साथ उन्हें कौन खाता ! तलब तो गरम चाय की लगी थी ! दुद्दू दिन्तू के पास हमारी हर समस्या का समाधान होता था ! जैसे ही उन्हें बताया कि गरमागरम चाय पीने का मन हो रहा है उन्होंने रास्ते में एक बड़े ही सुन्दर से के. बी. आर. नाम के रेस्टोरेंट पर गाड़ी रोक दी ! यहाँ और भी बहुत लोग थे ! हम सबने जी भर के इडली साम्भर और साम्भर वड़े का स्वादिष्ट नाश्ता किया ! एक बात सभी ने नोटिस की कि मेघालय में हर छोटी बड़ी जगह पर चाय बहुत ही स्वादिष्ट मिलती थी ! बेमिसाल रंग और खुशबू और लाजवाब स्वाद ! अक्सर मुझे बाहर की चाय कम पसंद आती है तो मैं कॉफ़ी लेना ही प्रिफर करती हूँ लेकिन मेघालय त्रिपुरा के इस ट्रिप में एयरपोर्ट को छोड़ कर मैंने कहीं भी कॉफ़ी नहीं पी ! इस रेस्टोरेंट के दरवाज़ों के हैंडिल्स बड़े कलात्मक थे और दरवाज़े पर यहाँ की टिपीकल खासी ड्रेस में सुसज्जित स्वागत में खड़ी युवती की आदमकद प्रतिमा सबको आकर्षित कर रही थी ! यात्रा के बीच में कुछ ब्रेक मिल गया तो सब फ्रेश हो गए ! यहाँ भी खूब फोटोग्राफी हुई ! और फिर चल पड़ा हमारा काफिला शिलौंग की दिशा में !   

रास्ते में हमारे साथ-साथ पन्ने से हरे रंग की पानी वाली एक बड़ी ही खूबसूरत नदी भी बल खाती इठलाती बह रही थी ! पूछने पर पता चला यह डौकी नदी है जो भारत और बांग्लादेश दोनों में बहती है ! अचानक से ग्रुप में उत्साह का संचार हो गया ! तो क्या हम बांग्लादेश की सीमा पर हैं ? यहाँ से कुछ ही दूरी पर बांग्ला देश के खेत, मैदान और कुछ कच्चे घर दिखाई दे रहे थे ! और यह तो वही नदी है जिसका नाम विश्व की चंद बेहद साफ़ नदियों में शुमार है ! सड़क काफी ऊँचाई पर थी नदी गहरी घाटी में ! अचानक से सड़क के एक सकरे से स्थान पर  हमारी बस रुक गयी ! यहाँ कोई पार्किंग नहीं थी ! कई कारें, बसें सब सड़क के किनारे खड़ी हुई थीं ! नीचे से कुछ नाव वाले भी ऊपर आ गए ! बहुत सारी ऊबड़ खाबड़ सी सीढ़ियों पर कुछ दुद्दू दिन्तू की सहायता से और कुछ नाव वालों की सहायता से ट्रेकिंग करते हुए हम नीचे पहुँच गए और फिर शुरू हुआ भारत की सबसे साफ़ सबसे प्यारी नदी डौकी में नौकायन का शानदार अनुभव !

नदी का पानी सच में इतना साफ़ था कि नीचे के पत्थर, मछलियाँ सब साफ़ दिखाई दे रहे थे ! कुछ दूर पर एक टापू सा दिखाई दे रहा था ! नाव वाले ने बताया वह बांग्ला देश की सीमा में है ! हम लोग उसके पास तक गए लेकिन वहाँ उतर नहीं सके ! उस टापू पर भी काफी भीड़ थी और दुकानों पर सामान बिक रहा था ! वो शायद बांगलादेश के सैलानी होंगे !

प्रमिला वर्मा जी की तबीयत कुछ नासाज़ थी वे नीचे नहीं आई थीं ! एक नाव में तीन से अधिक लोगों को नहीं बैठाया जा सकता था ! हम लोगों ने तीन नावें की ! एक में मैं और राजन थे, दूसरी में संतोष जी, विद्या जी और यामिनी जी ! तीसरी नाव में अंजना जी और रचना पाण्डेय जी ! पहाड़ी से उतरते वेगवान झरने से, जहाँ डौकी नदी का उदगम था, बांग्ला देश के टापू तक और नदी के इस किनारे से लेकर दूसरे किनारे तक हम सबने खूब जम कर बोटिंग की ! सच बहुत आनंद आया ! नदी के ऊपर एक पुल भी दिखाई दे रहा था ! बोटिंग के बाद नाव वालों की ही सहायता से हम लोग ऊपर अपनी बस तक पहुँचे ! नाव वाले बच्चे इतने अच्छे और भोले भाले थे कि उन पर मुझे बड़ा स्नेह उमड़ रहा था ! स्मोकी रिजोर्ट से मक्खन ब्रेड का और रात के पुलाव का जो नाश्ता हम लोगों के साथ रख दिया गया था वह सब मैंने उन बच्चों को दे दिया ! दोनों बहुत खुश हो गए !

नदी से जो पुल दिखाई दे रहा था उसी पुल से होकर हम बांग्लादेश के सीमावर्ती गाँव तामाबिल पहुँचे ! यहाँ पर भारत की सीमा समाप्त होती है और बांग्लादेश की सीमा आरम्भ हो जाती है ! उधर से कुछ बांग्ला देशी नागरिक भी इस स्थान पर आये हुए थे ! हम लोगों के साथ बहुत प्यार से मिले ! फोटो भी खिंचवाई साथ में ! उन लोगों में शायद एक नव विवाहित जोड़ा भी था ! महिला बुर्के में थी ! उसने अपने मेंहदी रचे हाथ दिखाए ! बोले, “हम भी वही सब करते हैं जैसा आपके यहाँ होता है ! बँटवारा करवा के अँगरेज़ बहुत बुरा कर गए हम लोगों के साथ !” नेता और कुछ सिरफिरे लोग कितने ही ‘दुश्मन-दुश्मन’ के नारे लगाते रहें आम लोगों के दिलों में एक दूसरे के लिए प्यार भी है और सम्मान भी है ! साथ ही कहीं यह मलाल भी है कि अगर बँटवारा न हुआ होता, भारत एक समग्र विशाल देश होता तो विश्व में कितनी बड़ी ताकत के रूप में उभरता !

यहाँ भी सबने खूब तस्वीरें लीं ! कुछ बांग्लादेश के अधिकारी गण भी थे जो हमारे साथ फोटो खिंचवाने आ गए थे ! यहाँ आकर सबसे मिल कर आत्मिक प्रसन्नता का अनुभव हुआ !    

डौकी नदी चेरापूँजी और शिलौंग के मध्य में बहती है ! डौकी नदी का एक नाम उम्नगोट नदी भी है और अंग्रेज़ी में ‘Dawki’ स्पेलिंग होने की वजह से इसे ‘दावकी’ के नाम से भी पुकारा जाता है ! यहाँ से हमें शिलौंग के लिए आगे बढ़ना था ! रास्ते में हम बांगलादेश की सीमा के साथ साथ चल रहे थे क्योंकि मेघालय बांग्ला देश से बिलकुल लगा हुआ है ! यहाँ पर हमने बी. एस. एफ़. ( बोर्डर सीक्योरिटी फ़ोर्स ) द्वारा लगाई जा रही स्मार्ट फेंसिंग के कुछ हिस्से भी देखे ! यह स्मार्ट फेंसिंग सीमा पर अवैध सामान एवं मानव तस्करी पर रोक थाम व अवांछनीय घुस पैठ पर नियन्त्रण रखने के लिए लगाई गयी है ! कुछ वर्ष पहले यहाँ पर बी. जी. बी. ( बॉर्डर गार्ड बांग्ला देश ) द्वारा एक नि:शस्त्र भारतीय इन्स्पेक्टर की ह्त्या कर दी गयी थी जो पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उन भारतीय मछुआरों को वापिस लौटा कर लाने के लिए सीमा पार गया था जो भटक कर बांगला देश की सीमा में चले गए थे ! इस घटना को लेकर बी. एस. एफ़. और बी. जी. बी. के बीच काफी तनाव हो गया ! दोनों तरफ से गोली बारी हुई और काफी जन धन की हानि हुई ! उस घटना के बाद इस फेंसिंग को लगाने का निर्णय लिया गया ! बांग्लादेश की ओर जाने वाले रास्तों को कटीले तारों से अवरुद्ध कर स्थाई रूप से बंद कर दिया गया और पहरा सख्त कर दिया गया !  लेकिन अब ऐसा कोई तनाव नहीं है और दोनों देशों के बीच बहुत ही मधुर और मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध दोबारा से स्थापित हो चुके हैं !

अभी आपको एक और बहुत ही अद्भुत स्थान की सैर करवानी है लेकिन पोस्ट भी लम्बी हो गयी है और रात भी बहुत हो चुकी है ! तो बस थोड़ी सी प्रतीक्षा और करिए ! मैं जल्दी ही आती हूँ एक और नए स्थान की रोचक जानकारी के साथ ! तब तक के लिए मुझे इजाज़त दीजिये और आप भी इन खूबसूरत तस्वीरों का मज़ा लीजिये ! मिलती हूँ जल्दी ही ! शुभरात्रि  !

 

साधना वैद    

  

 


Saturday, June 17, 2023

घनेरी घटाओं का आलय – मेघालय – 6

 



10 मई, चेरापूँजी के दर्शनीय स्थल

ऑरेंज रूट्स रेस्टोरेंट का स्वादिष्ट खाना खाने के बाद हमारा काफिला फिर से अपनी बस में सवार हो गया था ! मन में मलाल रह गया था कि चेरापूँजी से विदा लेने में थोड़ा ही समय बाकी है और बारिश की एक भी बूँद अभी तक बदन पर नहीं पड़ी ! ईश्वर ने शायद हमारे मन की बात पढ़ ली ! आसमान में हल्के हल्के बादल से छा गए और हवाओं की गति कुछ तीव्र हो गयी ! तापमान भी कुछ कम हो गया ! मौसम सुहाना हो गया ! हम मज़े में खिड़की से बाहर का नज़ारा लेने में व्यस्त थे कि अचानक से बस रुक गयी ! पता चला हम फिर किसी जल प्रपात पर पहुँच गए हैं ! साथियों इस जलप्रपात का नाम था डेन्थलेन वाटर फॉल !

डेन्थलेन वॉटरफॉल्स

डेन्थलेन फॉल्स मेघालय के खूबसूरत झरनों में से एक है ! यह चेरापूँजी के पास पूर्वी खासी हिल्स जिले में स्थित है ! करीब 90 मीटर की ऊँचाई से गिरकर पानी घने जंगल की पहाड़ियों से गुज़र कर तेज़ी से नीचे गिरता है ! इस झरने से जुड़ी एक बड़ी ही लोमहर्षक कहानी प्रचलित है पुराने समय में एक बहुत ही खतरनाक अजगर साँप था जिसे लोग यू थलेन के नाम से पुकारते थे ! कहते हैं अगर किसीको धन दौलत समृद्धि की चाह होती थी तो वे इस साँप की पूजा करते थे और इसके सामने नरबलि दिया करते थे ! यह साँप बहुत ही भयानक और विशाल था और इसके डर के मारे लोगों ने घर बाहर निकलना छोड़ दिया था ! न बच्चों को ही बाहर जाने देते थे ! इस तरह डर में रहते रहते बहुत समय हो गया तो सबने इस साँप के छुटकारा पाने का इरादा किया ! वह खतरनाक अजगर इसी वाटर फॉल के पास एक गुफा में रहता था ! एक दिन सभी गाँव वाले एक साहसी युवक की अगुआई में इस साँप को मारने के लिए आये ! साँप के साथ भीषण युद्ध हुआ लेकिन अंतत: उस दुष्ट एवं खतरनाक अजगर को सबने मिल कर मार डाला और उसके कई टुकड़े करके सबने पका कर खा लिया ! स्थानीय लोगों द्वारा झरने के शीर्ष पर मारे गए इस अजगर के नाम पर झरने का नाम ‘डेन्थलेन’ रखा गया है। डेन्थलेन का अर्थ है अजगर साँप के कटे हुए टुकड़े ! झरने के पास कुछ पत्थर हैं जो इस हिंसक लेकिन अलौकिक वीरतापूर्ण घटना की गवाही देते हैं !

यह झरना पथरीले पठार पर है और इसमें छोटे बड़े अनेकों पानी से भरे गड्ढे हैं ! घाटी की तरफ़ रेलिंग भी लगी है लेकिन कई जगह यह रेलिंग टूटी हुई भी थी ! अपने भव्य नीले पानी और काई की चट्टानों के कारण यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है जो आपको ऐसा महसूस कराता है जैसे आप किसी दूसरी दुनिया में पहुँच गए हैं !  यहाँ पास की गुफाओं में और चट्टानों पर अदभुद नक्काशी है ! यह चेरापूँजी में सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है  जिसमें एक सुंदर मार्ग है जो झरने के आधार की ओर जाता है ! रास्ते में कई स्विमिंग पूल हैं जो इसे पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए आराम करने और मौज-मस्ती करने के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं ! यह शहर के केंद्र से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ! मानसून में जब झरने में पानी बढ़ जाता है यह क्षेत्र और जीवंत हो जाता है !  लेकिन यह प्रपात साल भर पर्यटकों को आमंत्रित करता है ! डेन्थलेन फॉल्स में स्नान, तैराकी, पिकनिक, ट्रेकिंग, फोटोग्राफी का आनंद लिया जा सकता है !  

मौसम बहुत ही सुहाना हो गया था ! ठंडी हवा चल रही थी ! हम सबने भी खूब तस्वीरें खींचीं और पानी भरे गड्ढों से बचते बचाते झरने के जितने पास जा सकते थे गए ! बीच बीच में जहाँ रेलिंग नहीं थी मामला रिस्की भी था ! असावधानीवश दुर्घटना भी हो सकती है ! लेकिन दिन का समय था हम सब लोग सकुशल सुरक्षित खूब एन्जॉय करके फिर अपने वाहन में सवार हो गए ! हल्की हल्की बूँदा बाँदी शुरू हो गयी थी ! सबके चहरे पर बत्तीस इंच की मुस्कान फ़ैल गयी थी !

रामकृष्ण मिशन आश्रम, चेरापूँजी

हमारा अगला पड़ाव था रामकृष्ण परमहंस मिशन आश्रम ! यहाँ पहुँचते पहुँचते बारिश बहुत तेज़ हो गयी थी ! बस से उतर कर हम लोग दौड़ते हुए भवन में घुसे ! बड़ा ही रमणीय स्थान है और वहाँ का वातावरण भी बहुत ही बढ़िया था ! स्कूल चल रहा था ! एन सी सी की ड्रेस में कुछ छात्राएं जो शायद तभी किसी कार्यक्रम में भाग लेकर आई थीं सीढ़ियों के ऊपर अपने फोटो खिंचवाने में और मस्ती करने में मशगूल थीं ! उन्हें देख कर अपना बचपन और अपना छात्र जीवन याद आ गया जब एन सी सी की परेड के बाद हम लोग भी इसी तरह मस्ती में डूबे रहते थे ! भीगने से बचते हुए प्रार्थना सभा तक पहुँचे वहाँ अन्दर माँ शारदा देवी, स्वामी विवेकानंद और परम श्रद्धेय रामकृष्ण परमहंस जी की तस्वीरें विराजमान थीं ! आश्रम के परिसर में ही एक लोकल आर्ट एवं क्राफ्ट का छोटा सा म्यूज़ियम भी है और एक हैंडीक्राफ्ट आइटम्स की दूकान भी है जहाँ पर बहुत ही रीज़नेबिल रेट्स पर सामान मिल रहा था ! स्कूल का विशाल परिसर, हँसते खिलखिलाते चहकते बच्चे, खेल के मैदान देख कर मन प्रसन्न हो गया ! अब खूब जम के बारिश हो रही थी ! छाते साथ न लाने का मलाल भी हो रहा था लेकिन बारिश में भीगने का भी अलग ही सुख होता है ! अगला पड़ाव ‘नोह का लिकाई’ वाटर फॉल था ! इतनी तेज़ बारिश हो रही थी कि पहले सोचा इसे आज रहने देते हैं कल देख लिया जाए ! लेकिन हमारे गाइड दुद्दू और दिन्तू ने कहा अगले दिन संभव नहीं होगा क्योंकि हम दूसरे रूट से शिलौंग जायेंगे ! ऐसे में इसे फिर नहीं देख सकेंगे ! सबकी सहमति यही हुई कि भीग ही तो जायेंगे थोड़ा सा लेकिन ‘नोह का लिकाई’ वाटर फॉल तो देखने ज़रूर जायेंगे ! इसके बाद रिज़ोर्ट ही तो लौटना था तो जाते ही कपड़े बदल लेंगे और सब ठीक हो जायेगा ! बस फिर क्या था ! चल पड़ा हमारा जत्था एक और रोमांचक स्थल को देखने !

‘नोह का लिकाई’ वाटरफॉल

‘नोह का लिकाई’ वॉटरफॉल्स भारत का सबसे ऊँचा वाटरफॉल है ! इसकी ऊँचाई 340 मीटर है ! यह मेघालय राज्य में चेरापूँजी के पास स्थित है ! यह वॉटरफॉल देश के सबसे सुंदर और भव्य झरनों में से एक है और मेघालय राज्य का गौरव है ! उत्तर पूर्व में देखने के लिए ‘नोह का लिकाई’ वाटरफॉल सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है ! इस वाटरफॉल से भी जुड़ी एक बड़ी ही दुख भरी कहानी है ! 

इस फॉल्स का नाम  का लिकाई’ नाम की एक महिला से जुड़ा है, जिसने अपने पति की मृत्यु के बाद दोबारा किसी अन्य पुरुष से शादी की ! का लिकाई की एक छोटी सी बच्ची भी थी ! खुद के भरण-पोषण के लिए और अपनी बेटी को खिलाने के लिए उसे स्वयं कुली बन कर बहुत मेहनत करनी पड़ती थी ! जब वह घर पर होती थी तो उसका अधिकांश समय अपनी बच्ची की देखभाल करने में बीतता था और उसका शेष समय जीविका कमाने के लिए कुली का काम करने में बीतता था इसलिए वह अपने दूसरे पति को वह प्यार और समय नहीं दे पाती थी जो वह चाहता था ! इस कारण उसके पति में ईर्ष्या की भावना विकसित हुई जो का लिकाई की बेटी के प्रति घृणा में प्रकट हुई ! एक दिन जब का लिकाई बाहर काम करने गयी उस आदमी ने का लिकाई की बेटी को मार डाला और उसके माँस को पका कर उसने उसी की माँ का लिकाई को परोसा ! का लिकाई ने खाना खा लिया लेकिन उसे अपनी बेटी कहीं दिखाई नहीं दी ! वह अपनी बेटी को हर जगह ढूँढने लगी और ऐसा करते समय उसे सुपारी की टोकरी में अपनी बेटी के हाथों की उँगलियाँ मिलीं ! वह सब समझ गई ! इस असह्य दुख को वह झेल नहीं पाई और पहाड़ की चोटी से नीचे गहरी घाटी में छलांग लगा कर उसने आत्महत्या कर ली ! जिस झरने से उसने छलांग लगाई उसका नाम ‘नोह का लिकाई’ रखा गया ! बड़ी दर्दभरी कहानी है ! मन विचलित हो गया ! लेकिन यहाँ आकर बहुत अच्छा लगा ! बहुत सुन्दर स्थान है !

सबने बारिश में भीगने का भी का खूब आनंद लिया ! विद्या जी तो पूरी तैयारी से आई थीं ! उनका तो रेनकोट भी निकल आया ! तेज़ हवा से सबके छाते उलटे जा रहे थे ! हमारे पास तो छाते भी नहीं थे सो हम तो विशुद्ध बारिश का मज़ा ले रहे थे ! बारिश के बावजूद भी सबने अपने मोबाइल्स को ढकते छिपाते यथा संभव फ़ोटोज़ ले ही लिए ! १० मई का यह हमारा अंतिम पड़ाव था !

‘नोह का लिकाई’ फॉल देखने के बाद हम लोग अपने रिज़ोर्ट पहुँचे ! सबने जल्दी जल्दी कपड़े बदले और गरमागरम चाय बिस्किट्स का आनंद लिया ! रात को डिनर के लिए रिज़ोर्ट के किचिन इनचार्ज को समय से वेज बिरियानी का आर्डर दे दिया जो उसने ठीक आठ बजे सर्व कर दी ! हम सबने साथ बैठ कर डिनर का लुत्फ़ लिया ! पुलाव वाकई बहुत अच्छा बना था ! इस दिन बादलों की वजह से सिग्नल आ नहीं रहे थे इसलिए किसीसे बात नहीं हो पाई ! खाना खाकर सब जल्दी ही सो गए ! आप भी अब विश्राम करिए ! कल आपको और भी कई खूबसूरत स्थान घुमाने हैं ! तो मेरी अगली पोस्ट की प्रतीक्षा करिए और मुझे अब इजाज़त दीजिये ! शुभ रात्रि !

 

साधना वैद

 


Thursday, June 8, 2023

घनेरी घटाओं का आलय – मेघालय – 5

 



10 मई – चेरापूँजी के दर्शनीय स्थल

1.नोह्शंगथियांग फॉल्स अथवा सेवेन सिस्टर्स फॉल्स

ऊदी घटाओं से घिरे रिजोर्ट स्मोकी फॉल्स की बेहद खूबसूरत पहाड़ियों से ढेर सारी कानाफूसी करके और सुबह के सूरज से ढेर सारी रोशनी और ऊर्जा लेकर हम नियत समय पर अपनी मिनी बस में सवार हो गए और समवेत स्वर में गायत्री मन्त्र और अंजना जी द्वारा प्रस्तुत की गयी गणेश स्तुति के उद्घोष के साथ चल पड़े आज के सफ़र पर ! सबसे पहले हमारा जत्था जिस स्थल पर पहुँचा वह था नोह्शंगथियांग फॉल्स अथवा सेवेन सिस्टर्स फॉल्स ! यह एक बहुत ही सुन्दर स्थान है जहाँ से हरी भरी वादियों की पृष्ठभूमि में दूर स्थित एक विशाल झरना दिखाई देता है !

नोहशंगथियांग फॉल्स चेरापूँजी से लगभग 4 किमी दूर स्थित एक आकर्षक झरना है जिसका नाम भारत के सबसे ऊँचे झरनों की सूची में शामिल है ! अगर आप चेरापूँजी की यात्रा करने जा रहे हैं तो आपको इस खूबसूरत झरने को देखने के लिए अवश्य जाना चाहिए ! नोहशंगथियांग फॉल्स मेघालय के मावसई गाँव में स्थित है, जिसमें पानी लगभग 1033 फीट की ऊँचाई से गिरता है और सात अलग-अलग भागों विभाजित हो जाता है ! चूँकि इस झरने का पानी सात भागों में विभाजित होता है इसलिए इसे सेवन सिस्टर वाटरफॉल भी कहा जाता है ! नोहशंगथियांग फॉल्स के आकर्षक दृश्य को पूरी भव्यता के साथ बारिश के समय ही देखा जा सकता है !

बहुत आनंद आ रहा था यहाँ सबको ! सबने एक दूसरे के साथ अलग अलग कोम्बिनेशंस में खूब तस्वीरें खींची भी और खिंचवाई भी ! पास ही सोवेनियर्स की एक छोटी सी शॉप भी थी जहाँ कुछ साथियों ने अपने पर्स में बंद बाहर निकलने को आतुर नोटों को यहाँ की हवा और रौशनी का आनंद लेने का भी पर्याप्त अवसर दिया !

चेरापूँजी में वर्ष में सबसे अधिक वर्षा होने का विश्व रिकॉर्ड भी दर्ज किया जा चुका है ! बारिश के महीनों के दौरान फॉल्स बहुत सक्रिय होते हैं और नोहशंगथियांग फॉल्स के अद्भुत दृश्य को देखने का यह सबसे अच्छा समय है। यहाँ जगह-जगह जाने अनजाने छोटे बड़े अनेकों झरने देखने को मिल जाते हैं ! सेवेन सिस्टर्स फॉल के ही पास सड़क के दूसरी तरफ एक और अनाम लेकिन बहुत ही सुन्दर सा झरना था ! झरने के ऊपर पुल था ! पुल के नीचे झरने के दूसरी तरफ एक खासी युवक बहते पानी में बर्तनों को धो रहा था !

2.मौसमाई गुफा (Mawsmai Cave)

हमारा अगला पड़ाव था मौसमाई गुफा ! यहाँ बड़े ही करीने से कटे हुए फल ठेलों पर बिक रहे थे ! हमें अपनी बैंकॉक यात्रा की याद आ गयी जहाँ शहर में बिलकुल फ्रेश एवं बड़े की कलात्मक ढंग से काटे गए ताज़े फलों के ठेले शहर के हर मार्ग पर वैसे ही दिखाई देते थे जैसे हमारे यहाँ छोले भटूरे, पाव भाजी और भेलपूरी के दिख जाते हैं ! सबको प्यास तो लग ही आई थी ! ताज़े रसीले फलों का आनंद लेकर सबने गुफा की ओर प्रस्थान किया ! विद्या जी, संतोष जी एवं प्रमिला जी ऊपर गुफा देखने नहीं गयीं ! लेकिन हम अपनी जिज्ञासा का शमन नहीं कर पा रहे थे ! राजन की पीठ में प्रॉब्लम थी मेरे घुटने में लेकिन यह सोच कर कि, जितनी दूर तक जा सकेंगे जायेंगे बहुत गहराई में नहीं जायेंगे, कम से कम क्या और कैसी जगह है यह तो देख आयेंगे, हमने भी टिकिट लिये और सीढ़ियों पर चढ़ने लगे !  

मौसमाई गुफा चेरापूँजी में सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक है, जो पर्यटकों के आकर्षण के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है ! यह चूने के पत्थर की गुफा है और चेरापूँजी से मात्र 6 किमी की दूरी पर स्थित है ! मावसई गुफा मेघालय के पूर्वी खासी पहाड़ियों में गुफाओं की एक लुभावनी भूलभुलैया है ! अन्दर काफी नमी और अन्धेरा है ! लेकिन जब जगमगाती रोशनी चूने की इन नम चट्टानों से टकराती है तो अनगिनत रंग और प्रकाश के पैटर्न का निर्माण होता है ! यदि मौसमाई गुफा के गहरे कोनों का पता लगाना है तो टॉर्च साथ लेकर जाना चाहिए ! गुफा की लंबाई सिर्फ 150 मीटर है जो क्षेत्र की अन्य गुफाओं की तुलना में कम है लेकिन यह निश्चित रूप से भूमिगत जीवन के रहस्य की एक झलक अवश्य प्रदान करती है !  मौसमाई गुफा चेरापूँजी का सबसे अधिक देखा जाने वाला पर्यटन स्थल है और यहाँ की विजिट निश्चित रूप से हमारे लिए बहुत ही रोमांचक एवं ज्ञानवर्धक रही ! इसके खुलने का समय सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक है व टिकिट प्रति व्यक्ति १०/- है !

राजन और मैं बहुत गहराई तक नहीं गए क्योंकि अन्दर फिसलन भी बहुत थी और जाने का रास्ता भी सुरक्षित और सुगम्य नहीं था ! जगदलपुर के पास कुटुम्बसर की चूने की केव्स मेरी पहले की देखी हुई हैं इसलिए मुझे अंदाज़ था कि अन्दर का नज़ारा कैसा होगा ! राजन की पीठ का ख़याल कर मैं जोखिम नहीं उठाना चाहती थी इसलिये थोड़ा सा अन्दर जाने के बाद ही हम बाहर आ गए ! अंजना जी, रचना और यामिनी ने गहराई तक जाकर पूरा लुत्फ़ लिया ! फ़ोटोज़ देख कर आपको इन गुफाओं का पूरा आइडिया हो जाएगा !

3. इको पार्क (The Eco Park)

हर स्थान के साथ कुछ मज़ेदार संस्मरण भी जुड़ जाते हैं ! बिना पार्क की स्पेलिंग की ओर ध्यान दिए हम लोग इसी मुग़ालते में रहे कि इस पार्क के आस पास की पहाड़ियों से अपनी आवाज़ की प्रतिध्वनि सुनाई देगी ! पार्क में प्रवेश करने के बाद हमने ज़ोर-ज़ोर से बच्चों के नाम पुकारने शुरू किये और बड़े ध्यान से सुनने की कोशिश की कि कहीं से तो हमारी आवाज़ की ईको सुनाई दे ! लेकिन कहीं से कोई आवाज़ नहीं आई तो अपनी ही बेवकूफी पर हँसी भी बहुत आई ! हमारी टीम की सबसे साइलेंट और धीर गंभीर सदस्य रचना ने ध्यान दिलाया कि यह प्रतिध्वनि वाला echo नहीं है पर्यावरण वाला eco है ! यहाँ सबने झूले का खूब आनंद लिया और लम्बे चौड़े पार्क के हर कोने की खूब सैर की ! यहाँ एक मजेदार सा खट्टा मीठा फल बिक रहा था चटपटे मसाले के साथ उसका भी सबने भरपूर स्वाद लिया और फोटो सेशन तो हर स्थान की अनिवार्य गतिविधि थी ही ! हमने और विद्या जी ने भी टाइटेनिक के पोज़ में खूब फोटो खिंचवाए जो कुछ तो दूरी की वजह से और कुछ बादलों की कृपा से बेहद धुँधले आये !

ईको पार्क चेरापूँजी के सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक है और चेरापूँजी शहर से 7 किलो मीटर्स की दूरी पर स्थित है ! इको पार्क राज्य सरकार द्वारा मेघालय के पठारों में बनाया गया है ! यह स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण का केंद्र है और पिकनिक के लिए भी खूब प्रयोग में आता है ! शिलौंग कृषि बागवानी ने इस पार्क को कई खूबसूरत ऑर्किड दिए हैं जिन्हें इको पार्क के ग्रीनहाउस में रखा गया है !

इको पार्क का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यहाँ से हम बांग्लादेश के सिलहट जिले के मैदानों के दृश्यों का आनंद भी ले सकते हैं ! यहाँ पर्यटक चेरापूँजी के ‘ग्रीन कैन्यन’ के साथ-साथ आसपास के झरनों के सुंदर दृश्य का आनंद भी ले सकते हैं ! इको पार्क की सीमाओं में एक क्रिस्टल क्लियर वाटर स्ट्रीम भी है !

ईको पार्क में घूमने के बाद सबको जम कर भूख लग आई थी ! अपने स्वादिष्ट भोजन और बेहद खूबसूरत लोकेशन के लिए मशहूर होटल ओरेंज रूट्स में हम सब खाना खाने के लिए गए ! यहाँ थाली सिस्टम था और खाना तो इतना लाजवाब कि क्या बताएं ! यहाँ की पारंपरिक खासी ड्रेस में बहुत ही प्यारी लड़कियाँ और लड़के खाना परोसने का कार्य कर रहे थे ! सब इतने सुन्दर लग रहे थे जैसे मॉडेलिंग कर रहे हों ! आस पास के खूबसूरत दृश्यों का आनंद लेते हुए हम सबने जी भर कर भोजन का मज़ा लिया ! मैंने नोटिस किया सभी वेट्रेसेज़ जो खाना सर्व कर रही थीं अतिरिक्त विनम्र और मिष्टभाषी थीं ! शायद मेहमाननवाज़ी का यह हुनर उनकी ट्रेनिंग का अनिवार्य हिस्सा रहा होगा ! एक हेड वेट्रेस ने मेरे अनुरोध पर खासी स्टाइल में मुझे मेरा दुपट्टा बाँधना भी सिखाया ! पोस्ट बहुत लम्बी हो गयी है ! लंच के बाद के पर्यटन स्थलों पर अब आपको अगली पोस्ट में ले जाउँगी ! आज की पोस्ट यहीं तक ! मुझे विदा दीजिये और अगली पोस्ट के लिए प्रतीक्षा करिए ! जल्दी ही आपसे मुलाक़ात होगी यह मेरा वादा है आपसे ! शुभरात्रि !

 

साधना वैद