Tuesday, June 9, 2026

अजब तेरी लीला

 



औरतों ने पुरुषों की तरह पैसे कमाए 

तो भी किसीने उन्हें शाबाशी नहीं दी 

औरतों ने पुरुषों की तरह घर की बागडोर सम्हाली 

उन्हें तब भी किसी ने शाबाशी नहीं दी 

औरतों ने ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाई 

तब भी किसीने उनका साथ नहीं दिया 

औरत ईश्वर का रचा वह अक्षय पात्र है 

जिसका अवदान कभी घटता नहीं 

प्रेम, दया, करुणा

सेवा, सहानुभूति, संवेदना 

वह जितनी बाँटती है 

प्रभु उसका अक्षय पात्र फिर से भर देता है ! 

स्त्री से सिर्फ लोगों को अपेक्षा ही अपेक्षा है 

न उसका कोईअधिकार है  

न उसकी कोई ज़रुरत 

न उसका कोई ख्वाब है 

न उसकी कोई हसरत 

वह सिर्फ एक पेड़ की छाँव है 

जिसके नीचे पथिक अपनी थकन उतार कर 

चला जाता है और जाने के बाद 

कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखता 

कि किस पेड़ ने खुद दिन भर 

कठिन धूप में जल कर 

उसे ठंडी छाँव दी थी !  



चित्र - गूगल से साभार 

साधना वैद