“रोहित, कहीं जा रहे हो क्या ? पहले मुझे बाज़ार से ये सामान लाकर दे जाना उसके बाद कहीं और जाना ! शाम को कुछ मेहमान आने वाले हैं खाने पर ! मुझे बहुत तैयारी करनी है !” बाहर का दरवाज़ा खटकने की आवाज़ आते ही सुमित्रा चौकन्नी हो गईं ! समझ गईं कि बेटा रोहित स्क्वैश खेलने के लिए अपने दोस्तों के साथ स्टेडियम जाने के लिए निकल रहा होगा ! कहीं चला न जाए यह सोच कर सुमित्रा ने किचिन से ही रोहित को आवाज़ लगाई और जल्दी-जल्दी सामान की सूची बनाने लगीं !
तभी रोहित खीझता हुआ किचिन में आया, “ओफ्फोह मम्मी, मैं जब खेलने के लिए जाने वाला होता हूँ आपको लास्ट मोमेंट पर ही शॉपिंग का ध्यान क्यों आता है ? आई एम् गेटिंग लेट !”
सुमित्रा ने जल्दी से उसे सामान की सूची थमाई, “आज कुछ मेहमान आ रहे हैं बेटा ! मुझे खाना बनाना है ! यह बहुत ज़रूरी सामान है ! समय से नहीं आया तो खाना बनाने में बहुत देर हो जाएगी !” सुमित्रा ने नर्म होकर रोहित को समझाने की कोशिश की !
रोहित सामान की फेहरिस्त देख कर बौखला रहा था, “यह क्या है मम्मी आपको कितनी बार कहा है लिस्ट इंग्लिश में बनाया करो ! मुझे नहीं समझ में आ रहा क्या लिखा है आपने ! सामान गलत-सलत आ जाए तो मुझे कुछ मत कहना !”
“सामान सब सही आए इसीलिये लिस्ट हिन्दी में बनाई है ! तुम्हें समझ में नहीं आ रहा है तो कोई बात नहीं दुकानदार को सब समझ में आ जाएगा ! उसके यहाँ सामान लेने वाले निन्यानवे प्रतिशत हिन्दी बोलने और लिखने पढ़ने वाले लोग ही आते हैं ! तुम्हारे जैसे अंग्रेज़ी के भक्त तो शायद एकाध प्रतिशत ही होंगे और तुम भी अंग्रेज़ी के आसमान से नीचे अपनी मातृभाषा की ज़मीन पर उतर आओ तो तुम्हारे लिए भी वही ठीक होगा ! कम से कम अपनी भाषा बोलने वाले लोगों से जुड़ तो सकोगे ! मुझे डर है कहीं तुम अपने ही देश में परदेशी न बन जाओ !”
चित्र - गूगल से साभार
साधना वैद
