Sudhinama
Thursday, October 22, 2009
कुछ तो करूँ
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थी चाह्त उजालों की मुझको बहुत अँधेरा जगत का मिटाना जो था । दिये तो जलाये थे मैने बहुत एक शमा रौशनी की जला ना सकी । थी चाहत कि महकाऊँ सार...
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Friday, October 2, 2009
बी.पी.एल. से नीचे रहने वालों के लिये आवासीय योजना में गम्भीर भूलें
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भारत में जनसंख्या की अधिकता की वजह से आवासीय समस्या बहुत गम्भीर होती जा रही है । गाँवों की अपेक्षा शहरों में यह समस्या और अधिक विकराल रूप धा...
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Thursday, October 1, 2009
सोचती हूँ
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सोचती हूँ जो आँसू तुमने मुझे दिये उन्हें एक दिन में बहा देना तो सम्भव नहीं इसलिये एक सागर अपने मन में ही क्यों ना रच लूँ । सोचती हूँ जो दु:ख...
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Monday, September 14, 2009
टुकड़ा टुकड़ा आसमान
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अपने सपनों को नई ऊँचाई देने के लिये मैंने बड़े जतन से टुकड़ा टुकडा आसमान जोडा था तुमने परवान चढ़ने से पहले ही मेरे पंख क्यों कतर दिये माँ ? क्य...
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Saturday, September 5, 2009
शिक्षक दिवस – आत्म चिंतन की महती आवश्यक्ता
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शिक्षक दिवस पर उन सभी विभूतियों को मेरा हार्दिक नमन और अभिनन्दन है जिन्होंने विद्यादान के पावन कर्तव्य के निर्वहन के लिये अपना सारा जीवन समर...
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Tuesday, August 25, 2009
क्या यह आत्मघात नहीं है ?
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स्वप्न नींदों मे, अश्रु नयनों में, गुबार दिल में ही छिपे रहें तो मूल्यवान लगते हैं यह माना । भाव अंतर में, विचार मस्तिष्क में, शब्द लेखनी म...
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Sunday, August 9, 2009
अतिथि देवो भव
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हमारी भारतीय संस्कृति की यह परम्परा रही है कि हम अपने अतिथियों को देवतुल्य मानते हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार उनके स्वागत सत्कार और अभ्यर्...
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