Sudhinama
Sunday, August 14, 2011
तुम्हारी याद में माँ
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यह सावन भी बीत गया माँ , ना आम, ना अमलतास, ना गुलमोहर, ना नीम, ना बरगद, ना पीपल किसी पेड़ की डालियों पे झूले ...
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Thursday, August 4, 2011
नीलकंठ का आर्तनाद
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Saturday, July 30, 2011
एक अकम्पित लौ
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तुम्हारी यादों का सिरहाना लगाये, तुम्हारे ख्यालों की चादर को कस कर अपने जिस्म से लपेटे, तुम्हारी छवि को आँखों में बसाये, तुम्हारी ...
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Tuesday, July 26, 2011
कश्ती
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विचारों की सरिता में कविता की कश्ती को भावनाओं के बहाव की दिशा में मैं शब्दों की पतवार से खेती आगे बढ़ी जाती हूँ इस प्रत्याशा मे...
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