Sudhinama
Monday, February 25, 2013
रहिमन धागा प्रेम का
›
आप जानते हैं रिश्ते चाहे कितने भी प्रगाढ़ हों बेवजह की ईर्ष्या, बेबुनियाद नफरत और मन की संकीर्णता का वायरस यदि उन पर आक्रमण कर दे ...
13 comments:
Friday, February 22, 2013
नहीं जानती
›
नहीं जानती ज़िंदगी की बेहिसाब बेरहमियों के लिए उसका शुक्रिया करूँ या फिर कभी कभार भूले भटके बड़ी कंजूसी से भीख की तरह दि...
19 comments:
Tuesday, February 19, 2013
उपहार
›
याद है वर्षों पूर्व दिया था एक लैम्प का तुमने मुझे यह उपहार, जी जान से उसे आज तक सँजो कर रखती आई हूँ मैं ...
16 comments:
‹
›
Home
View web version