Sudhinama
Monday, August 10, 2015
सुनती हो शुभ्रा
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“ सुनती हो शुभ्रा ! अरे भई कहाँ हो ? पड़ोस के शर्मा जी दस दिनों के लिये शिमला जा रहे हैं ! उनकी माताजी अकेली रह जायेंगी ! तुम उनके ख...
Wednesday, August 5, 2015
मुरली तेरी
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फूँक दो प्राण डाल दो सम्मोहन छेड़ दो तान अपनी मुरली से मेरे मनमोहन ! ओ बंसीधर गाती है गीत मेरे तेरी ब...
Saturday, August 1, 2015
बरसा सावन
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धरा नवोढ़ा डाले अवगुंठन प्रफुल्ल वदन तरंगित तन धारे पीत वसन उल्लसित मन विहँसती क्षण-क्षण ! उमड़े घन ...
Tuesday, July 28, 2015
सपने
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रफ्ता-रफ्ता सारे सपने पलकों पर ही सो गये , कुछ टूटे कुछ आँसू बन कर ग़म का दरिया हो गये ! कुछ शब की चूनर के तारे बन...
Sunday, July 19, 2015
जीने की वजह
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जीने की वजह पहले थीं कई अब जैसे कोई नहीं ! बगिया के रंगीन फूल, और उनकी मखमली मुलायम पाँखुरियाँ ! फूलों पर म...
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