Sudhinama
Tuesday, February 9, 2016
परास्त रवि
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(१) आततायी सूर्य का, यह अनचीन्हा रूप लज्जित भिक्षुक सा खड़ा, क्षितिज किनारे भूप ! (२) बाँध धूप की पोटली, काँधे पर धर मौन...
Saturday, February 6, 2016
'सम्वेदना की नम धरा पर' - श्रीमती आशा लता सक्सेना जी की नज़र से
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“ सम्वेदना की नम धरा पर” फैली काव्य धारा विविधता लिए है | साधना की ‘साधना’ लेखन में स्पष्ट झलकती है | बचपन से ही साहित्य में रूचि और क...
Wednesday, February 3, 2016
सुहानी भोर
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(१) सात अश्व के यान पर, शोभित ललित ललाम भुवन भास्कर आ रहे, थामे हुए लगाम ! (२) दूर क्षितिज की कोर पर, उभरे रवि महा...
Sunday, January 31, 2016
कुछ अंतर्मन की और कुछ बाह्य जगत की
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'सम्वेदना की नम धरा पर ' डॉ. मोनिका शर्मा जी की नज़र से कुछ ...
Thursday, January 21, 2016
‘राहुल’ बनाम ‘राहुला’
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कल श्रीमान जी के साथ फिर बहस छिड़ गयी ! मुद्दा था ‘राहुल’ शब्द का अर्थ क्या होता है ! मेरा कहना था कि राहुल का अर्थ होता है सारे दुःख...
Thursday, January 14, 2016
शुभाशंसा
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जीवन जीने के लिये दो इतना अधिकार चुन कर दुःख तुम पर करूँ सुख अपने सब वार ! हर पग पर मिलती रहे तुम्हें जीत पर जीत फ़िक...
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