Sudhinama

Thursday, September 28, 2017

अधिक उत्पादन – जी का जंजाल – क्या करे किसान

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अर्थ शास्त्र का सिद्धांत है कि यदि किसी वस्तु का उत्पादन माँग से अधिक होने लगता है तो उसकी कीमत गिर जाती है और उत्पादक को हानि होने लगत...
Wednesday, September 27, 2017

मैं ग़रीब हो गया

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मेरे मौला तूने तो मालामाल किया था मुझे प्यार की दौलत से मोहब्बत की दौलत से इल्म और इखलाक की दौलत से इंसानियत की दौलत से   म...
Friday, September 22, 2017

ज़रा ठहरो

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ज़रा ठहरो !  तुम इनको न छूना,  ये एक बेहद पाकीजा से रिश्ते के  टूट कर बिखर जाने से  पैदा हुई किरचें हैं जिन्हें छूते ही  ...
Sunday, September 17, 2017

बस ! अब और नहीं ---

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वक्त और हालात ने इतने ज़ख्म दे दिए हैं कि अब हवा का हल्का सा झोंका भी उनकी पर्तों को बेदर्दी से उधेड़ जाता है मैं चाहूँ कि...
Monday, September 11, 2017

हम और तुम

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वर्षों से भटक रहे थे हम तुम   ज़िंदगी की इन अंधी गलियों में   कुछ खोया हुआ ढूँढने को   और मन प्राण पर सवार   कु...
Sunday, September 3, 2017

गुरू और शिष्य

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शिक्षक दिवस पर विशेष गुरू रहे ना देव सम, शिष्य रहे ना भक्त बदली दोनों की मती, बदल गया है वक्त ! शिक्षक व्यापारी बना, बदल गया प...
Sunday, August 27, 2017

धुंध

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नज़र कमज़ोर हो चली है आँखों से धुँधला दिखने लगा है अच्छा ही है ! धुंध के परदे में कितनी कुरूपताएं, विरूपताएं छिप जाती हैं पता...
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मैं एक भावुक, संवेदनशील एवं न्यायप्रिय महिला हूँ यथासंभव लोगों में खुशियाँ बाँटना मुझे सुख देता है

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