Sudhinama
Friday, November 30, 2018
आवाज़ें
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एक वक्त था जब ज़रा सा शोर , ज़रा सी हलचल या ज़रा सी भी आवाज़ नागवार गुज़रती थी लिखना पढ़ना हो , चिंतन मनन करना हो या फिर वि...
Tuesday, November 27, 2018
"एक फुट के मजनूमियाँ" आदरणीया रश्मि प्रभा जी की नज़र से
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# "एक फुट के मजनूमियाँ" Sadhana Vaid साधना वैद जी ============== ने दो किताबें भेजीं, एक मेरे लिए, एक कुनू ,अमु ...
Saturday, November 24, 2018
पन्नों में दबी एक रूमानी कहानी
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पन्नों के बीच सूखी सी पाँखुरियाँ गीली सी यादें तुम्हारी बातें जब आ...
7 comments:
Wednesday, November 21, 2018
मैं खड़ी हूँ आज भी उस मोड़ पर
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जिस्म ने तय कर लिये कई फासले , उम्र भी है चढ़ चुकी सीढ़ी सभी , रूह उस लम्हे में लेकिन क़ैद ...
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