Wednesday, November 18, 2009

सम्भल के रहना अपने घर में ----

अपने बचपन की यादों के साथ देश प्रेम और देश भक्ति के जो चन्द गाने आज भी ज़ेहेन में गूँजते हैं उनके सम्मोहन से इतने वर्षों बाद आज भी मुक्त हो पाना असम्भव सा लगता है । संगीत के सूक्ष्म गुण दोषों के पारखी महान संगीतकारों के लिये हो सकता है ये गीत अति सामान्य और साधारण गीतों की श्रेणी में शुमार किये जायें लेकिन बालमन पर इनका प्रभाव कितना स्थायी और अमिट होता था यह मुझसे बढ़ कर और कौन जान सकता है । “ दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल “, “ आओ बच्चों तुम्हें दिखायें झाँकी हिन्दुस्तान की “ ,“ सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा “ , जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़ियाँ करती हैं बसेरा “ ऐसे ही और भी ना जाने कितने गीत थे जिनको सुनते ही मन गर्व से भर उठता था और आँखे भावावेश से नम हो जाया करती थीं । उन्ही दिनों एक गीत और बहुत लोकप्रिय हुआ था जो वर्तमान समय में जितना सामयिक और प्रासंगिक है उतना शायद उन दिनों में भी नहीं होगा । वह गीत है _ “ कहनी है एक बात हमें इस देश के पहरेदारों से सम्भल के रहना अपने घर में छिपे हुए ग़द्दारों से “ । इस गाने की सीख को हम क्यों भुला बैठे ? यदि हमने इस बात पर ग़ौर किया होता तो आज हमारे देश को ये छिपे हुए ग़द्दार इस तरह से खोखला नहीं कर पाते ।
समाचार पत्र और टी वी के सभी न्यूज़ चैनल आतंकवादियों के नये-नये कारनामों और भारत के समाज और सरज़मीं पर उनकी गहरी जड़ों के वर्णन से रंगे रहते हैं । लेकिन क्या कभी कोई इस पर विचार करता है कि कैसे ये आतंकवादी ठीक हमारी नाक के नीचे इतने खतरनाक कारनामों को अंजाम दे लेते हैं और हम बेबस लाचार से इनके ज़ुल्म का शिकार हो जाते हैं और प्रतिकार में कुछ भी नहीं कर पाते । इसकी सिर्फ एक वजह है कि यहाँ चप्पे-चप्पे पर उनके मददगार बैठे हुए हैं जो उनकी हर तरह से हौसला अफ़ज़ाई कर रहे हैं , उनकी ज़रूरतें पूरी कर रहे हैं और अपने देश और देशवासियों के साथ ग़द्दारी कर रहे हैं । कोई उनको नकली पासपोर्ट बनाने में मदद कर रहा है, तो कोई उनको सैन्य गतिविधियों और संवेदनशील ठिकानों की जानकारी उपलब्ध करा रहा है, तो कोई उन्हें अपने घर में शरण देकर उनका आतिथ्य सत्कार कर रहा है और उन्हें अपने नापाक इरादों को पूरा करने देने के लिये अवसर प्रदान कर रहा है तो कोई उन्हें उनकी आवश्यक्ता के अनुसार हथियार और विस्फोटकों की आपूर्ति कर रहा है । जैसे कि वे कोई आतंकवादी नहीं हमारे कोई अति विशिष्ट सम्मानित अतिथि हैं । और आश्चर्य की बात यह है कि ऐसे “ मेहमान नवाज़ “ समाज के निचले वर्ग में ही नहीं मिलते ये तो समाज के हर वर्ग में व्याप्त हैं । नेता हों या अभिनेता , सैनिक अधिकारी हों या प्रशासनिक अधिकारी , प्राध्यापक हों या विद्यार्थी , धर्मगुरू हों या वैज्ञानिक , कम्प्यूटर विशेषज्ञ हों या वकील , सेना या पुलिस के जवान हों या ढाबों और चाय की दुकानों पर काम करने वाले ग़रीब तबके के नादान कर्मचारी जिनमें दुर्भाग्य से अबोध बच्चे भी शामिल हैं , सब अपने छोटे-छोटे व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के लिये अवसर पाते ही देश के साथ ग़द्दारी करने से पीछे नहीं हटते । फिर चाहे कितने ही निर्दोष लोगों की जान चली जाये या देश की फ़िज़ा में कितना ही ज़हर क्यों ना घुल जाये । इनके अंदर का भारतवासी मर चुका है । ये सिर्फ लालच का एक पुतला भर हैं जिन्हें ना तो देश से प्यार है ना देशवासियों से । किसी को पैसों का लालच है तो किसीको धर्म के नाम पर गुमराह किया जाता है । अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को दबा ये अपने विदेशी आकाओं की बीन पर नाचने के लिये मजबूर हो जाते हैं ।
विदेशों से आये आतंकवादियों की खोजबीन में जितनी कसरत कवायद की जाती है उसकी आधी भी यदि घर के भेदी इन “ विभीषणों “ को पहचानने में और उन पर कड़ी कार्यवाही करने में लगाई जाये तो आधी से ज़्यादह समस्या खुद ही समाप्त हो जायेगी और आतंकवादियों की जड़ें ढीली हो जायेंगी क्योंकि इनकी मदद के बिना बाहर से आये विदेशी आतंकवादी आसानी से घुसपैठ कर ही नहीं सकते । जब तक स्थानीय लोगों का साथ और सहयोग इन दुर्दांत आतंकवादियों को मिलता रहेगा इनके हौसले बुलन्द रहेंगे और मुम्बई, दिल्ली, गुजरात और हैदराबाद जैसी भीषण काण्ड घटित होते रहेंगे । अनेकों निर्दोष लोगों की बलि चढ़ती रहेगी और अनगिनत घर परिवार उजड़ते रहेंगे ।
सवाल यह उठता है कि देश का कामकाज चलाने के लिये और लोगों की सुरक्षा के लिये जिन ज़िम्मेदार व्यक्तियों को यह काम सौंपा है यदि वे ही अपने कर्तव्यपालन से चूक जाते हैं या बेईमानी पर उतर आते हैं तो आम आदमी किसके पास जाये अपनी फरियाद लेकर ? ऐसी स्थिति में हमें स्वयम ही खुद को सबल , समर्थ और सक्षम करना होगा । मेरा सभी भारतवासियों से निवेदन है कि सजग रहिये, सतर्क रहिये, चौकन्ने रहिये अपनी आँखे और कान खुले रखिये, यदि कोई भी संदेहास्पद गतिविधि या व्यक्ति आपकी नज़र में आते हैं तो उसे अनदेखा मत करिये और अपने देश को ऐसे ग़द्दारों के हाथों खोखला होने से बचाइये । देश को तोड़ने वालों की कमी नहीं है । आज ज़रूरत है देश को जोड़ने वालों की । उसे एकता के सूत्र में पिरोने वालों की । आज अपने देश की पहरेदारी के लिये हमें खुद कमर कस कर तैयार रहना होगा और इन छिपे हुए ग़द्दारों से अपने देश को बचाना होगा । अपने कर्तव्य को पहचानिये और मातृभूमि के प्रति अपने ऋण को चुकाने से पीछे मत हटिये । अशेष शुभकामनाओं के साथ आप सभी को मेरा जय भारत ! जय हिन्दोस्तान !

साधना वैद

2 comments:

  1. ACHEE POST HAI ... AAJ KI JAROORAT HAI ... GHER KE BHEDI KO DHOONDHNA BAHUT JAROORI HAI ...

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  2. I have read most of the writings of Sadhana Vaid and I am overwhelmed in finding her work in poetry, friction,stories for children, articles on social causes etc as unique, well written, delicately expressed,eye opener with wonderful spirit of dedication, sincerity in explaining the minutest details of social, ethnic, cultural relationship in human society in very realistic and literary order. Her every word gives a message to the society for reform and touches all delicate issues. Let her writings help in sociological reforms . She has always highlighted the weak and sad part of the human relationship and has gone very deep in such expression in a beautiful way.I wish her all the best in her literary journey and I am confident for her continued efforts in this direction.

    sbsaxena

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