Thursday, October 28, 2010

चुनौती

खामोशियों के किनारों से
मौन की निशब्द बहती धारा में
मुझे बहुत गहरे उतरना है
और अंगार सी धधकती सीपियों से
शीतल, सुमधुर, सुशांत शब्दों के
माणिक मुक्ता चुन कर लाने हैं !

दर्द भरे स्वरों के आरोह अवरोह पर
सवार हो वेदना के गहरे सागर में
डूब कर भी मुझे अपने कंठ के
अवसन्न मृतप्राय स्वरों में
उमंग और उल्लास के
जीवन से भरपूर उन
स्वरों को जिलाये रखना है
जो सुखों की सृष्टि कर सकें !

कड़वाहट के बदरंग घोल में
डूबे अपनी चाहतों के
जर्जर आँचल को मुझे
बाहर निकालना है
और उसे झटकार कर
दायित्वों की अलगनी पर
इस तरह सुखाना है
कि किसी पर भी उस
बदरंग घोल के छींटे ना आयें
और मेरे उस जर्जर आँचल से
हर्ष और उल्लास के
खुशनुमां सुगन्धित फूल
चहुँ ओर बिखर जाएँ !

साधना वैद

15 comments:

  1. soch sakaaraatmak ho to jag jeetaa jaa sakataa hai | bahut achchi post

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  2. दायित्वों की अलगनी पर
    इस तरह सुखाना है
    कि किसी पर भी उस
    बदरंग घोल के छींटे ना आयें

    आपकी कविताओं में बहुत गहरी सोच होती है....बार बार पढने को प्रेरित करती हुई.
    मनोभावों को बहुत ही सशक्त रूप से व्यक्त करने में सक्षम हुई है कविता.

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  3. "दाइत्वों की अलगनी पर इस तरह सुखाना है"
    बहुत अच्छी रचना के लिए बधाई |शब्द चयन बहुत सुंदर बन पड़ा है |
    आशा

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  4. दायित्वों की अलगनी , मजेदार ...जिन्दगी सचमुच एक तप है ...

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  5. अवसन्न मृतप्राय स्वरों में
    उमंग और उल्लास के
    जीवन से भरपूर उन
    स्वरों को जिलाये रखना है
    जो सुखों की सृष्टि कर सकें !

    नए बिम्ब ले कर गहन विचार प्रस्तुत किये हैं ...सुन्दर रचना .

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  6. अवसन्न मृतप्राय स्वरों में
    उमंग और उल्लास के
    जीवन से भरपूर उन
    स्वरों को जिलाये रखना है
    जो सुखों की सृष्टि कर सकें !
    बहुत सुन्दर सकारात्मक प्रेरक रचना। बधाई।

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  7. सबको सम्‍मान देने वाला व्‍यक्ति सदा स्‍वमान में रहता है। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!
    विचार-नाकमयाबी

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  8. Sorry for my bad english. Thank you so much for your good post. Your post helped me in my college assignment, If you can provide me more details please email me.

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  9. बहुत सुन्दर बिम्ब घड़े इस रचना में आपने ...उत्कृष्ट शब्दों का अमूल्य खज़ाना तो है ही आपके पास पर संवेदनाएं भी अपार है . ज़िन्दगी की जद्दोजहद में सकारत्मक द्रष्टिकोण से उभरने की प्रेरणा देती बहुत ही सशक्त अभिव्यक्ति है ......धन्यवाद !

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  10. दायित्वों की अलगनी पर
    इस तरह सुखाना है
    कि किसी पर भी उस
    बदरंग घोल के छींटे ना आयें

    सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  11. दायित्वों की अलगनी पर
    इस तरह सुखाना है
    ye do panktiya dil jeet le gayee.........
    sarthak lekhan.......
    sunder bhav aur vaisee hee abhivykti.
    Aabhar

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  12. असतोमासदगमय की इतनी अच्छी विवेचना देख कर में मुग्ध हूँ साधना जी| तमाम नकारात्मक बातों की मौजूदगी के बीच सकारात्मक प्रयासों को समर्पित आपकी यह रचना निश्चय ही प्रशंसनीय है|

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  13. मेरे ब्लॉग पर आने के लिये और अपनी प्रतिक्रया से मेरा उत्साह बढाने के लिये आप सबकी हृदय से आभारी हूँ !

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  14. दायित्वों की अलगनी पर
    इस तरह सुखाना है
    कि किसी पर भी उस
    बदरंग घोल के छींटे ना आयें
    और मेरे उस जर्जर आँचल से
    हर्ष और उल्लास के
    खुशनुमां सुगन्धित फूल
    चहुँ ओर बिखर जाएँ !

    बहुत गहरी सोच... सशक्त शब्द चयन ....
    मनोभावों की सुन्दर अभिव्यक्ति...

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