Tuesday, June 17, 2014

इल्तिजा


मेरे मौला
तेरी रहमत का शुक्रिया
कि तूने मेरे हाथों में
कंदील देकर मुझे
ज़रूरतमंदों की राह के
अंधेरों को दूर करने की
तौफीक अता की !
बस इतनी सी
इल्तिजा और है कि
कभी मुझमें इतनी
खुदगर्ज़ी, गुरूर और बेदिली
न आने देना कि कभी 
दूसरों की तकलीफों से
बेखबर हो मैं
बेमुरव्वती के साथ  
अपनी राह बदल दूँ
और तमाम मज़लूमों को
ठोकर खाने के लिये  
तारीक राहों पर 
तनहा छोड़ दूँ !
  
आमीन !

साधना वैद

1 comment:

  1. बहुत खूबसूरत अल्फाज लिए रचना |

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