Wednesday, October 5, 2016

देवी माँ के तृतीय एवं चतुर्थ स्वरुप - माता चंद्रघंटा एवं माता कूष्मांडा



सिंहवाहिनी
शिवदूती स्वरूपा
माँ चंद्रघंटा

दिव्य सुगंध
सुरभित हो जाये
सकल जग

चंद्र्वदिनी
पूजन करूँ तेरा
रक्त पुष्प से

माँ तेरा रूप
शांत, सौम्य औ' स्निग्ध
पावन करे

त्राण करो माँ
सकल व्याधियों से
हे दयामयी

झंकृत करो 
समस्त ब्रह्माण्ड में 
दिव्य ध्वनियाँ 

रिझाएँ देवी 
पीत वसन धारें 
पूजन करें

माँ चंद्रघंटा
पूजा सफल करो
विघ्न हरो माँ

 

सृष्टि निर्माता
ब्रह्मांड रचयिता
माता कूष्मांडा

सूर्य सी दीप्त
अष्ट भुजा धारिणी
कान्तिमयी माँ

ग्रहण करें
कुम्हड़े का प्रसाद
कूष्मांडा माता

सिंहवाहिनी
रिद्धि सिद्धि दायिनी
विघ्न नाशिनी

पूजन करें
पहनें हरे वस्त्र
देवी प्रसन्न

आरोग्यदायी
यशवर्धिनी माता
तुझे नमन 

साधना वैद

 

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