Sunday, May 14, 2017

रचना हूँ मैं तेरी माँ

मातृ दिवस पर विशेष 



मिट्टी से हूँ गढ़ी हुई

चौखट में हूँ जड़ी हुई

छाया हूँ मैं तेरी माँ !

रचना हूँ मैं तेरी माँ !


काँटों के संग उगी हुई

तीक्ष्ण धूप में पगी हुई

कलिका हूँ मैं तेरी माँ !

रचना हूँ मैं तेरी माँ !


युद्ध भूमि में डटी हुई

सुख सुविधा से कटी हुई

सेना हूँ मैं तेरी माँ !

रचना हूँ मैं तेरी माँ !


संघर्षों से दपी हुई

कुंदन जैसी तपी हुई

मूरत हूँ मैं तेरी माँ !

रचना हूँ मैं तेरी माँ !


अंतर्मन पर खुदी हुई

रोम रोम पर रची हुई

कविता हूँ मैं तेरी माँ !

रचना हूँ मैं तेरी माँ !


सात सुरों से सधी हुई

मीठी धुन में बंधी हुई

  विनती हूँ मैं तेरी माँ !  

रचना हूँ मैं तेरी माँ !


हर पल मेरे पास है तू

हर पल मेरे साथ है तू

धड़कन है तू मेरी माँ !

रचना हूँ मैं तेरी माँ !

साधना वैद




No comments:

Post a Comment