Tuesday, June 2, 2020

तुम किन्नर हो क्रिमिनल नहीं



दुःख मुझे भी होता है
तुम्हारा अपमान,
तुम्हारा तिरस्कार देख कर
दिल मेरा भी रोता है
सरे राह तुम्हारा अशोभनीय
एवं विचित्र आचरण देख कर !
माना कि विधाता से भूल हुई
तुम्हें बनाने में
लेकिन उस भूल को इस तरह
सरे आम उछालना ज़रूरी तो नहीं !
अपने रूप स्वरुप को और विकृत कर
इस तरह संयम और मर्यादा को त्याग
बेढंगा फूहड़ श्रृंगार कर सड़कों पर नाचना
अश्लील हरकतें करना, भीख माँगना
और लूट खसोट करना भी
कुछ ज़रूरी तो नहीं !
संसार में वह स्त्री भी अधूरी है
जो माँ नहीं बन सकती
वह पुरुष भी अधूरा है
जो पिता नहीं बन सकता  
लेकिन क्या सब इसी स्तर पर उतर आते हैं ?
तुम स्वयं अपने अधूरेपन को
जगजाहिर करते हो अपनी हरकतों से !
ना ज्ञान की कमी है तुम्हारे पास
न विवेक की, ना ही प्रतिभा की !
फिर क्यों इनका उपयोग नहीं करते ?
तुम स्वयं ना जताओ तो
कौन तुम्हारे इस दोष को जानेगा !
क्यों तुम एक डॉक्टर, इंजीनियर,
वैज्ञानिक या प्रोफ़ेसर नहीं बन सकते ?
कोई तुम्हें विवश नहीं कर सकता
इस नारकीय जीवन को भोगने के लिए
यदि तुम स्वयं न चाहो तो !
अपना स्वाभिमान जगाओ
अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनो
आत्म मंथन करो और तोड़ डालो
इन श्रंखलाओं को जो तुम्हीं ने बाँधी हैं
स्वयं को जकड़ने के लिए
इस समाज के डर से !
तुम किन्नर हो क्रिमिनल नहीं !
अपना जीवन सँवारने का हक़ है तुम्हें
तुम चाहोगे तो सम्मानपूर्वक भी जी सकोगे
वरना जो जीवन जी रहे हो
उससे शिकायत कैसी !
यह भी तो तुम्हारा ही चुनाव है !



साधना वैद

12 comments:

  1. नमस्ते,

    आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 04 जून 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार रवीन्द्र जी ! सादर वन्दे !

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  2. बहुत प्रभावशाली रचना

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    1. हार्दिक धन्यवाद एवं आभार केडिया जी !

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद शास्त्री जी ! आभार आपका !

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  4. व्वाहहहहह
    वेहतरीन
    सादर नमन

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    1. हार्दिक धन्यवाद यशोदा जी ! बहुत बहुत आभार आपका सखी !

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  5. उम्दा रचना यथार्थ को दर्शाती हुई |

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    1. हार्दिक धन्यवाद जीजी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  6. अपना जीवन सँवारने का हक़ है तुम्हें
    सार्थक रचना

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    1. हार्दिक धन्यवाद मान्यवर ! आभार आपका !

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