Wednesday, October 5, 2022

मनेगा दशहरा पूर्ण श्रद्धा से

 




देखो रावण

प्रतिबिम्बित होता  

अंतर्मन में

 

काम वासना

मद मोह लालच

स्वार्थ औ’ ईर्ष्या

 

क्रोध, अहम्

घमंड और घृणा

के दर्पण में

 

जो चाहते हो

मारना रावण को

त्यागो विकार

 

धारो शुचिता

करुणा, प्रेम, दया

भुला दो बैर

 

त्याग दो घृणा

ध्वंस करो अहम्

बनो विनम्र

 

तभी मरेगा

मन का दशानन

छाएगा सुख

 

और मनेगा

असली दशहरा

पूर्ण श्रद्धा से

 

साधना वैद

 

 


5 comments:

  1. बेहतरीन सृजन

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    1. हार्दिक धन्यवाद ओंकार जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  2. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार रवीन्द्र जी ! सादर वन्दे !

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  3. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद प्रतिभा जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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