Sudhinama
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Tuesday, February 9, 2016
परास्त रवि
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(१) आततायी सूर्य का, यह अनचीन्हा रूप लज्जित भिक्षुक सा खड़ा, क्षितिज किनारे भूप ! (२) बाँध धूप की पोटली, काँधे पर धर मौन...
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