आज ओम प्रकाश जी के घर में उत्सव का माहौल है !
वर्षों से चले आ रहे ज़मीनी विवाद के मुकदमे का फैसला आखिरकार आज उनके हक़ में आ ही
गया ! उनका छोटा भाई सूरज प्रकाश, जो गाँव के
प्राइमरी स्कूल में टीचर है और आर्थिक रूप से भी कमज़ोर है, मुकदमा हार गया ! इस मुकदमे को जीतने के लिए कुछ कम करतब तो ओमप्रकाश जी ने भी
नहीं किये थे ! कितनी तो तिकड़में लगाईं, कितनी चालें चलीं,
अधिकारियों की जेबें भरने के लिए पैसा भी कम नहीं बहाया !
तो जीत तो उनके पाले में आनी ही थी ! सूरज प्रकाश की कहाँ औकात थी उनसे मोर्चा लेने
की ! प्राइमरी स्कूल का अदना सा शिक्षक, बच्चों को नैतिक
शिक्षा और सदाचरण का पाठ ही पढ़ाता रह गया और मुकदमे की मार से और गरीब होता चला
गया ! नैतिक शिक्षा की चादर ओढ़ कर आज की दुनिया में कहीं मुकदमे जीते जाते हैं ?
रात भर ओमप्रकाश जी के घर में शराब और शबाब के
दौर चलते रहे ! बड़े-बड़े नेता, विधायक, अधिकारी सभी आमंत्रित थे ! सूरज प्रकाश के घर में आज अंधकार
छाया था ! रात को चूल्हा भी न जला था ! बच्चों को मन मसोस कर सुबह के बचे खाने से
कुछ निवाले खिला दिए घरवाली ने और दोनों पति पत्नी दो घूँट पानी पीकर सोने का उपक्रम
करते रहे ! बड़े भाई के घर के जश्न की आवाजें मन पर घन की सी टंकार करती रहीं !
सुबह हो गयी थी ! ओमप्रकाश जी के घर से जश्न की
आवाजें आना बंद हो चुकी थीं लेकिन आगंतुकों की आवाजाही बढ़ गयी थी ! तभी सूरज
प्रकाश का बड़ा बेटा घबराया हुआ आया !
“पापा, ताऊजी को बड़े जोर
का हार्ट अटैक आया है ! गाँव के सारे डॉक्टर्स आये हैं ! शहर के बड़े अस्पताल ले
जाने की बात हो रही है ! आप चलिए ना !”
उद्विग्न सूरज प्रकाश चप्पल भी नहीं पहन पाए कि
गगन भेदी विलाप के स्वर वातावरण में गूँज उठे ! सालों की जद्दोजहद के बाद मिली जीत
को ओम प्रकाश जी चौबीस घंटे भी मना नहीं सके ! मुकदमा जीतने के बाद आखिर हासिल
क्या हुआ उन्हें सब यही सोच रहे थे !
चित्र - गूगल से साभार
साधना वैद
