बच्चे शिक्षक
का नहीं, करते अब सम्मान
मौक़ा एक न
छोड़ते, करते नित अपमान
!
कोचिंग कक्षा
की बड़ी, मची हुई है धूम
लेकिन लालच ने
किया, इसको भी बदनाम
!
दुगुनी तिगुनी
फीस भर, माथा जाये घूम
कहते विद्या
दान से, बड़ा न कोई दान !
साक्षरता के
नाम पर, कैसी पोलम पोल
सच्चे झूठे आँकड़े, भरने से बस काम !
नैतिकता
कर्तव्य को, ढीठ पी गए घोल
!
प्रतिशत बढ़ना
चाहिए, साक्षरता के
नाम !
कक्षा नौ में
छात्र सब, दिए गए हैं ठेल
ऐसी शिक्षा से
भला, किसका होगा नाम
!
अध्यापक और
छात्र में, हो न परस्पर
भीत
शिष्य करें गुरुदेव का, मन से आदर मान !
करना होगा पितृ
सम, शिक्षक को व्यवहार
बच्चे भी दर्शन करें शिक्षक में भगवान् !
साधना वैद

