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Sunday, May 31, 2026

फूल और काँटे

 




फूलों की चाह है तो काँटों को चुनना होगा 

उड़ने की चाह है तो पंखों को खुलना होगा 

ऐसे ही नहीं होती हर चाहत किसी की पूरी 

कुछ बनने की चाह है तो सपनों को बुनना होगा ! 


साधना वैद  


 



प्यारी बिटिया 

कितनी मोहक 

कितनी आकर्षक है 

तुम्हारे अधरों पर 

ठिठकी यह मुस्कान !

कितना लुभा रहे हैं  

तुम्हारे खुले बिखरे ये बाल !

लगता है दो तीन दिन से 

कंघी ने स्पर्श नहीं किया है इन्हें, 

लेकिन फिर भी कितना 

खिल रहा है तुम्हारा चेहरा 

इस बिखरी केशराशि से घिरा !

आँखों में कितना निश्छल सा आग्रह है 

कितना निष्पाप सा आमंत्रण है 

अपना अधखाया हुआ 

जूठा सैंडविच साझा करने का !

कैसे न बलिहारी जाऊँ 

तुम्हारी मासूमियत पर 

मेरी प्यारी सी गुड़िया रानी ! 

माँ हूँ न तुम्हारी ! 

सौ सौ जान कुर्बान जाती हूँ  

तुम्हारी इस दरियादिली पर 

तुम्हारी लाड़ भरी मनुहार पर !

किसीकी नज़र ना लगे 

मेरी राजकुमारी को 

बस यही दुआ है 

नसीबों वाली इस माँ की ! 


साधना वैद 





Saturday, May 30, 2026

तू आस पास है - अलिवर्ण पाद छंद

 




गहरा सागर

उत्ताल तरंगें

कम्पित बदन

कूल न किनारा

घना अँधियारा

व्याकुल है मन !

 

लम्बी पगडंडी

दूर है मंज़िल

थके हुए पाँव

मुश्किल है जाना

ठौर न ठिकाना

ले चल तू गाँव !

 

विहँसती हवा

मुस्काता गगन

खिलते सुमन

कहते कान में

दिन क्यों ख़ास है

तू आसपास है !

 


चित्र - गूगल से साभार 


साधना वैद

 

 

 

 

 

Sunday, May 17, 2026

ग्रीष्म ऋतु

 





आ ही गयी 

ग्रीष्म ऋतु भी 

ज्येष्ठ मास की 

भीषण गर्मी 

और विकट गर्मी से 

व्याकुल प्राण

स्वेद बिन्दुओं से सिक्त 

बोझिल अंग

शिथिल शरीर और 

कल्पनाएँ निष्प्राण 

कोमल बदन को 

भस्मसात करते

गर्म लू के थपेड़े और 

सुलगती हवाएं 

प्रचंड आँधी तूफानों से 

थर-थर काँपते वृक्ष 

और दरकती धराएं

बूँद-बूँद को तरसते 

प्यासे पंछी और

गुमसुम कुम्हलाए फूल 

खामोश भँवरे और 

स्वेद में भीगे ललनाओं के 

मुलायम दुकूल 

इन गर्म हवाओं की छुअन 

मुझे सदा ही

व्याकुल कर जाती है 

ग्रीष्म ऋतु मुझे 

सबसे कम भाती है !


चित्र - गूगल से साभार 


साधना वैद


Saturday, May 16, 2026

परिवार - हाइकु

 



वटवृक्ष सा 

हमारा परिवार 

शीतल छाँव 


मासूम बच्चे 

करते कलरव 

गूँजता घर 


बाबा की सीख 

दादी की कहानियाँ

हमारी नींव 


चाचा का लाड़

चाचियों का दुलार

बुआ का प्यार 


माँ अन्नपूर्णा 

पिता शिव शंकर 

दीदी लक्ष्मी सी 


सारे अपने 

सुर नर किन्नर 

स्वर्ग सा घर 


बचपन का

अनमोल खजाना 

अमीर हम 


मिली सुशिक्षा 

संस्कार, सुविचार 

परिवार में 


है परिवार 

प्रथम पाठशाला 

सब बच्चों की 


अनुशासन, 

सभ्यता, शिष्टाचार 

सीखते यहीं 


जीवन मूल्य 

सीखे हमने इसी 

परिवार में 


बने समाज 

सशक्त औ’ सुदृढ़ 

परिवारों से 


जो कुछ पाया 

उपकार मानते

परिवार का  


मान मर्दन  

कभी होने न देंगे 

इस प्यार का !


चित्र - गूगल से साभार 


साधना वैद 







Friday, May 15, 2026

नसीहत

 


सद्कर्मों का सद्परिणाम

धीरज से तुम लेना काम 

रखना तुम खुद पर विश्वास 

पूरी होगी हर इक आस ! 


मिहनत से होता है नाम 

करना होगा तुमको काम 

घबरा कर मत जाना बैठ 

रखनी होगी गहरी पैठ !


रहना तुम हर पल तैयार 

हर बाधा कर लोगे पार 

श्रम से ही मिलता सम्मान  

मिले तुम्हें प्रभु का वरदान !


चित्र - गूगल से साभार 

साधना वैद 

Monday, May 11, 2026

चौपई – एक प्रयास

 




नमस्कार साथियो,
'चौपई' एक नई विधा है ! यह 'चौपाई' से भिन्न है ! 
इस  पर मेरा एक प्रयास !


मुद्दत से दिल में थी प्यास 

जाने कब पूरी हो आस 

मिल कर जब बैठेंगे पास 

बाटेंगे खुशियाँ तब ख़ास !


हो जाएंगे दुःख सब दूर 

चिंता हो जाएगी चूर 

मन्नत सबकी होगी पूर

चेहरों पर उतरेगा नूर !



चित्र - गूगल से साभार 


साधना वैद