Sudhinama
Thursday, July 22, 2010
अब तो जागो
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कब तक तुम अपने अस्तित्व को पिता या भाई पति या पुत्र के साँचे में ढालने के लिये काटती छाँटती और तराशती रहोगी ? तुम मोम की गुड़िया तो नहीं ! कब...
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Monday, July 19, 2010
क्या करूँ
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क्या करूँ मेरी कल्पना की उड़ान तो मुक्त आकाश में बहुत ऊँचाई तक उड़ना चाहती है लेकिन मेरे पंखों में इतनी ताकत ही नहीं है और मैं सिर्फ पंख फड़फड़ा...
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Thursday, July 15, 2010
मैं एकाकी कहाँ !
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मैं एकाकी कहाँ ! जब भी मेरा मन उदास होता है अपने कमरे की प्लास्टर उखड़ी दीवारों पर बनी मेरे संगी साथियों की अनगिनत काल्पनिक आकृतियाँ मुझे हाथ...
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Sunday, July 11, 2010
वो आँखें
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नहीं भूलतीं वो आँखें ! मुझे छेडतीं, मुझे लुभातीं, सखियों संग उपहास उड़ातीं, नटखट, भोली, कमसिन आँखें ! हर पल मेरा पीछा करतीं, नैनों में ही बाँ...
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Thursday, July 8, 2010
दिल दरिया
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लम्हा-लम्हा ज़िंदगी, तिनका-तिनका नशेमन, कतरा-कतरा हर खुशी, रेशा-रेशा पैरहन ! जो कुछ है बस ये ही मेरी पूँजी है, दो सुर की सरगम से दुनिया गूँज...
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Sunday, July 4, 2010
छोटी सी आशा
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मुट्ठी भर आसमान टुकड़ा भर धूप दामन भर खुशियाँ दर्पण भर रूप इतना ही बस मैंने तुमसे माँगा है ! नींद भर सपने कंठ भर गीत बूँद भर सावन नयन भर प्री...
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Thursday, July 1, 2010
शुभकामना
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मैंने तुम्हारे लिए एक खिड़की खोल दी है ताकि तुम स्वच्छंद हवा में, अनंत आकाश में, अपने नयनों में भरपूर उजाला भर कर , अपने पंखों को नयी ऊर्जा स...
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