Sudhinama
Saturday, October 30, 2010
टूटे घरौंदे
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जब मन की गहनतम गहराई से फूटती व्याकुल, सुरीली, भावभीनी आवाज़ को हवा के पंखों पर सवार कर मैंने तुम्हारा नाम लेकर तुम्हें पुकारा था ! लेकिन मेर...
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Thursday, October 28, 2010
चुनौती
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खामोशियों के किनारों से मौन की निशब्द बहती धारा में मुझे बहुत गहरे उतरना है और अंगार सी धधकती सीपियों से शीतल, सुमधुर, सुशांत शब्दों के माणि...
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Sunday, October 24, 2010
संकल्प
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अब से आँखों के आगे पसरे मंज़रों को झुठलाना होगा, कानों को चीरती अप्रिय आवाजों को भुलाना होगा, मन पर पड़ी अवसाद की शिलाओं को सरकाना होगा, दुखों...
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Wednesday, October 20, 2010
कोई तो होता
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कोई तो होता जिसे अपने पैरों के छाले मैं दिखा पाती और जो महसूस कर पाता कि कितने दिनों से अंगारों पर मैं अकेली चली जा रही हूँ, वो आगे बढ़ कर मु...
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Thursday, October 7, 2010
* क्या है मेरा नाम *
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उस दिन अपनी एक डॉक्टर मित्र संजना के यहाँ किसी काम से गयी थी ! संजना अपने क्लीनिक में मरीजों को देख रही थी ! मुझे हाथ के संकेत से अपने पास...
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Monday, October 4, 2010
* अंतर्व्यथा *
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मेरी सपनीली आँखों के बेहद सुन्दर उपवन में अचानक सूने मरुथल पसर गए हैं जिनमें ढेर सारे ज़हरीले कटीले कैक्टस उग आये हैं , ह्रदय की...
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Friday, October 1, 2010
* कहाँ हो तुम बापू *
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बापू के पुण्य जन्म दिवस २ अक्टूबर पर उन्हें एक भावभीनी श्रद्धांजलि एवं एक सविनय प्रार्थना ! बापू तब तुमने जिनके हित बलिदान दिया, अपने...
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