Sudhinama

Thursday, December 17, 2015

हम कब जागेंगे

›
दामिनी ( निर्भया ) के साथ घटी दुर्दांत घटना को बीते हुए तीन साल हो गये हैं लेकिन क्या हम ज़रा सा भी चेते हैं ? क्या समाज में इस तरह की घ...
Monday, December 14, 2015

चेतावनी

›
देख लिया है मैंने तुझको ओ अनजाने और समझ ली भली तरह से फितरत तेरी कर ले जितनी चाहे तू मनमानी मूरख डिगा न पायेगा तिल ...
Sunday, December 13, 2015

" संवेदना की नम धरा पर "

›
" संवेदना की नम धरा पर " अपने प्रथम काव्य संकलन 'संवेदना की नम धरा पर' के कवर पेज एवं नीचे पुस्तक की ये तस...
Saturday, December 5, 2015

कुछ ग़मज़दा सी कहानियाँ

›
कुछ अनछुई सी निशानियाँ कुछ डगमगाती रवानियाँ जाने किस खला में बिला गयीं तेरे नाम थीं जो कहानियाँ ! हम कहा कि...
Wednesday, December 2, 2015

जग की रीत

›
उगते सूरज को सभी, झुक-झुक करें सलाम  जीवन संध्या में हुआ, यश का भी अवसान !  बहती जलधारा कभी, चढ़ती नहीं पहाड़  एक चना अदना कहीं, नहीं ...
Wednesday, November 25, 2015

‘काँच के शामियाने’ – मेरी नज़र से

›
  हाल ही में रश्मि रविजा जी का उपन्यास ‘काँच के शामियाने’ पढ़ कर समाप्त किया है ! कुछ उनके प्रखर लेखन के ताप से और कुछ काँच के शामियानो...
Sunday, November 22, 2015

जीवन की शाम

›
जनम दिया पालन किया, की खुशियाँ कुर्बान बोझ वही माता पिता, कैसी यह संतान ! झुकी कमर धुँधली नज़र, है जीवन की शाम जीवन...
‹
›
Home
View web version

मैं एक भावुक, संवेदनशील एवं न्यायप्रिय महिला हूँ यथासंभव लोगों में खुशियाँ बाँटना मुझे सुख देता है

My photo
Sadhana Vaid
View my complete profile
Powered by Blogger.