Sudhinama

Monday, October 9, 2017

कशमकश

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महीने के आरम्भ में चंद रुपये मेरी हथेली पर रख जिस तरह तुम निश्चिन्त हो जाते हो मैं थोड़े ही निश्चिन्त हो सकती हूँ अपनी सौ ज़र...
Thursday, October 5, 2017

थकन

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बहुत थक गयी हूँ मेरे जीवन साथी ! जीवन के इस जूए में जिस दिन से मुझे जोता गया है एक पल के लिए भी गर्दन बाहर निकाल लेने का मौ...
Sunday, October 1, 2017

अब तो मुझे सोने दो

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दीवार पर टंगी बापू की तस्वीर उदास है स्वर रुंधे हैं, आँखें बे आस हैं कल जन्मदिन जो आ रहा है लोगों की बनावटी, झूठी, असहनीय, ...
Thursday, September 28, 2017

अधिक उत्पादन – जी का जंजाल – क्या करे किसान

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अर्थ शास्त्र का सिद्धांत है कि यदि किसी वस्तु का उत्पादन माँग से अधिक होने लगता है तो उसकी कीमत गिर जाती है और उत्पादक को हानि होने लगत...
Wednesday, September 27, 2017

मैं ग़रीब हो गया

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मेरे मौला तूने तो मालामाल किया था मुझे प्यार की दौलत से मोहब्बत की दौलत से इल्म और इखलाक की दौलत से इंसानियत की दौलत से   म...
Friday, September 22, 2017

ज़रा ठहरो

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ज़रा ठहरो !  तुम इनको न छूना,  ये एक बेहद पाकीजा से रिश्ते के  टूट कर बिखर जाने से  पैदा हुई किरचें हैं जिन्हें छूते ही  ...
Sunday, September 17, 2017

बस ! अब और नहीं ---

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वक्त और हालात ने इतने ज़ख्म दे दिए हैं कि अब हवा का हल्का सा झोंका भी उनकी पर्तों को बेदर्दी से उधेड़ जाता है मैं चाहूँ कि...
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मैं एक भावुक, संवेदनशील एवं न्यायप्रिय महिला हूँ यथासंभव लोगों में खुशियाँ बाँटना मुझे सुख देता है

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