Friday, June 19, 2009

क्या कोई सुन रहा है ?

आगरा में राष्ट्रीय राजमार्ग पर मृत जानवरों के अंगों से चर्बी निकाल कर देशी घी बनाया जा रहा था और उसे धड़ल्ले से मशहूर ब्राण्ड्स के नकली रैपर लगा कर सालों से बाज़ार में बेचा जा रहा था लेकिन हमारी पुलिस और प्रशासन किसी को कानोंकान खबर भी ना हुई आश्चर्य होता है । फिर किसी तरह मामला संज्ञान में आया भी तो जिस त्वरित गति से उस पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है वह बेहद शर्मनाक है ।
जिस दिन से इस घिनौने कृत्य के बारे में पता चला है उसी दिन से अधिकारियों के द्वारा इस पर लीपापोती कर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है । सबूतों के साथ कोई छेड़ छाड़ ना हो सके इसके लिये ज़रूरत थी कि कारखाने को सील कर दिया जाता और सूक्ष्म निरीक्षण परीक्षण के लिये सारे सामान को ज्यों का त्यों छोड़ दिया जाता । लेकिन यहाँ तो उल्टी गंगा ही बहती है । कारखाने को सील करने के बजाय उस पर बुलडोज़र चलाकर उस जगह को मैदान में तब्दील कर दिया और सारे सबूत मिटा डाले । इस ग़ैर ज़िम्मेदाराना कार्यवाही के लिये कौन जवाब देगा ? किसके आदेश से वहाँ बुलडोज़र चलाया गया ? क्या उस अधिकारी को कोई दण्ड मिलेगा ? कारखाना किसका था , किसके वरद हस्त के नीचे वह इस जघन्य काण्ड को बेखौफ चला पा रहा था , उसके इस गुनाह में कौन विशिष्ट लोग उसके भागीदार थे क्या इन रहस्यों से पर्दा उठेगा ? इस विषय पर सारे अधिकारी मौन क्यों साधे हुए हैं ? आखिर किसे बचाने के लिये सारी मशक्कत की जा रही है ? वैसे तो मीडिया तिल का ताड़ बनाने में माहिर है लेकिन इस मामले में वह भी दबे स्वरों में दिन भर में एकाध संक्षिप्त समाचार देकर चुप्पी साध लेता है ?
समाज को भयमुक्त और अपराधमुक्त बनाने के मुख्यमंत्री जी के दावे कहाँ गये ? आगरा आजकल आये दिन होने वाली आपराधिक वारदातों से थर्राया हुआ है । हर रोज़ समाचार पत्र चोरी , डकैती , लूट , खसोट , हत्या , आगजनी आदि के समाचारों से भरे रहते हैं । अपराधी इतने निडर हैं कि दिन दहाड़े ऐसे जघन्य कारनामों को अंजाम देते हैं और कोई कुछ नहीं कर पाता ना पुलिस ना प्रशासन । आखिर क्यों ? यह सब किसकी शै पर हो रहा है ? आगरा ही नहीं पूरा उत्तर प्रदेश अपराधियों की गिरफ्त में है ? क्या हमारे नेता निजी स्वार्थों से अपना ध्यान हटा कर आम जनता के हितों के बारे में भी कभी सोचेंगे या जनता के साथ अंतरंगता केवल चुनाव के महीने में चन्द आम सभाओं तक ही सिमट कर खत्म हो जाती है ? अभी कुछ समय पूर्व नकली दूध के काले धन्धे का पर्दाफाश हुआ था । टी वी पर बाकायदा नकली दूध बनाने वालों के साक्षात्कार तक दिखाये गये थे ? क्या हुआ इस मामले में ? अपराधियों को क्या सज़ा मिली ? अगर नहीं मिली तो कब मिलेगी ? इसी तरह इस केस की फाइल भी सालों के लिये किसी न्यायालय के गोदाम में धूल चाटती रहेगी और मिलावटी खाद्य पदार्थों के बनाने और बचने का सिलसिला इसी तरह से धडल्ले के साथ बखौफ चलता रहेगा । है कोई माई का लाल जो इसको रोक सके ?
हमें कब तक इन हृदयहीन मुनाफाखोरों के हाथों का खिलौना बने रहना पड़ेगा जिनके पास ना तो मानवीयता है ना ही उन्हें ईश्वर का भय है ? राजनीति के बाहुबलियों के साथ साँठ गाँठ उनके ऐसे काले धन्धों को पनपने पसरने में मददगार सिद्ध होती है । जनता के स्वास्थ्य और विश्वास के साथ खिलवाड़ किया जाता है और हम निरुपाय हो सब सहने के लिये मजबूर हैं क्योकि यह तो अंधेर नगरी चौपट राजा का देश बन चुका है । जिनसे न्याय की आशा हो वे ही गुनाहों के दलदल में आकण्ठ डूबे हों तो आम आदमी किसके सामने जाकर अपना दुखडा रोये और उसके आँसू पोंछने के लिये किसके हाथ उठेंगे ? ऐसे में ज़रूरत है कि जनता को समाज के चन्द प्रबुद्ध प्रतिनिधियों के नेतृत्व में एकजुट हो इस तरह के जघन्य काण्डों का पुरज़ोर विरोध करना चाहिये और जब तक मामले की गहन जाँच पड़ताल होकर ठोस नतीजे सामने ना आ जायें प्रशासनिक कार्यवाही पर पैनी नज़र रखनी चाहिये कि वे मामले को दबाने की कोशिश ना कर पायें ।
साधना वैद

2 comments:

  1. Can there be anything more cruel than playing with innocent person's life.We have become shameless class and law and order are things of the past.UP govt is good at slapping NSA on smallest excuse...why is it quiet now?

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  2. आपकी बात से शत्प्रतिशत सहमत हूं।विचारक केवल आम जनता के ह्रुदय मे@ सम्वेदन पैदा कर सकता है।देखना यह है कि वे सारे शीर्षस्थ अधिकारी जिन्हें इस विषय में सही निर्णय लेने होते है,किन दवाबों में घिरे हैं,वे अपने ह्रुदय की आवाज को अनदेखा क्यों कर देते है?
    आम जन के बीच साफ्गोइ से ,बेबाकी से अपनी बात रखने के लिये

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