Monday, July 23, 2012

जाग जाओ


  
मत डरो 
साहस जुटाओ
जाग जाओ !
 
बीन कंटक  
राह अपनी
खुद बनाओ !
हो सबल, 
अबला नहीं तुम
जान जाओ !
 
मुक्त होवो 
बेड़ियों को
काट डालो !
 
चल पड़ो
निज शस्त्र धारो
अरि हराओ !
 
मत भजो
देवी बनो खुद
असुर मारो ! 
 
भाल पर
चंदन रचा 
मस्तक सजाओ !

साधना वैद

18 comments:

  1. मत डरो
    साहस जुटाओ
    जाग जाओ !

    बीन कंटक
    राह अपनी
    खुद बनाओ
    बहुत ही सशक्‍त पंक्तियां ... आभार इस उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति के लिए

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  2. सभी पंक्तियाँ बहुत सुन्दर और सारगर्भित हैं..आभार

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  3. हौसला देती सशक्त रचना... आभार

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  4. राह में कोई भय नहीं है
    जान जाओ
    तुममें ही हर आन है
    यह जान जाओ

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  5. सशक्त सुंदर रचना,,,,,उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति

    RECENT POST काव्यान्जलि ...: आदर्शवादी नेता,

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  6. प्रेरक पंक्तियाँ ..
    सशक्त रचना ..
    सादर !!

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  7. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल २४/७/१२ मंगल वार को चर्चा मंच पर चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आप सादर आमंत्रित हैं

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  8. बहुत सुन्दर और प्रेरक क्षणिकाएं..

    सादर
    अनु

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  9. मत भजो
    देवी बनो खुद
    असुर मारो !
    @ इस 'आह्वाहन' की गूँज दूर तक जा रही है.

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  10. सार्थक बात कही है आपने .आभार

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  11. गहन विचार प्रस्तुत किये है छोटी छोटी पंक्तियों में |बहुत अच्छी लगी यह रचना |बधाई |
    आशा

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  12. बीन कंटक
    राह अपनी
    खुद बनाओ
    .... इस उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति के लिए .. आभार

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  13. बहुत सुंदर !!

    जरूरत अब इसी आह्वाहन की है
    जागना ही है तुझे अब सोच ले
    राम बन मौत पक्की रावण की है !!

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  14. बहुत सुंदर .............प्रेरक क्षणिकाएं..

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  15. मत भजो
    देवी बनो खुद
    असुर मारो !

    ....बहुत खूब! बहुत सार्थक प्रस्तुति...

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  16. बहुत ही बेहतरीन सारगर्भित रचना..
    :-)

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