Thursday, March 12, 2026

दोहा ग़ज़ल

 




बच्चे शिक्षक का नहीं, करते अब सम्मान
मौक़ा एक न छोड़ते, करते नित अपमान !

कोचिंग कक्षा की बड़ी, मची हुई है धूम
लेकिन लालच ने किया, इसको भी बदनाम !

दुगुनी तिगुनी फीस भर, माथा जाये घूम
कहते विद्या दान से, बड़ा न कोई दान !

साक्षरता के नाम पर, कैसी पोलम पोल
सच्चे झूठे आँकड़े
भरने से बस काम !

नैतिकता कर्तव्य को, ढीठ पी गए घोल !
प्रतिशत बढ़ना चाहिए, साक्षरता के नाम !

कक्षा नौ में छात्र सब, दिए गए हैं ठेल
ऐसी शिक्षा से भला, किसका होगा नाम !

अध्यापक और छात्र में, हो न परस्पर भीत  
शिष्य करें गुरुदेव का, मन से आदर मान !

करना होगा पितृ सम, शिक्षक को व्यवहार
बच्चे भी दर्शन करें शिक्षक में भगवान् !

 

साधना वैद

 


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