राधिका बहुत खुश थी ! उसके परंपरावादी परिवार ने बड़ी
कशमकश और तनातनी के बाद अंतत: बड़े भैया माधव के अंतरजातीय विवाह के लिए अनुमति दे
ही दी ! उनके रूढ़िवादी ब्राहमण परिवार में यह एक ऐतिहासिक फैसला था कि माधव का
विवाह उसके साथ पढ़ने वाली रागिनी के साथ होने जा रहा था ! यद्यपि उसके बाबा दादी
और घर के अन्य वरिष्ठ सदस्य अभी भी इस निर्णय के खिलाफ थे ! ऐसा दुस्साहस अभी तक
उनके खानदान में किसी ने नहीं किया था लेकिन इकलौते बेटे की जिद के आगे सबको अपने
हथियार डालने ही पड़े ! राधिका खुश थी इसलिए कि अब उसका रास्ता भी साफ़ हो गया है !
जब माधव भैया का विवाह वैश्य समुदाय की कन्या के साथ हो सकता है तो उसका विवाह
उसके कायस्थ दोस्त के साथ क्यों नहीं हो सकता ! विश्वास बहुत्त ही स्मार्ट,
हैंडसम और प्रतिभाशाली नौजवान है और उसके साथ ही एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम
करता है ! उसके परिवार में सभी उच्च शिक्षित और प्रगतिशील सोच रखने वाले उदारमना
लोग हैं ! मन ही मन उसने अपने सुन्दर भविष्य के सपने बुनने भी शुरू कर दिए थे ! रात
को ही उसने विश्वास को पत्र में लिख दिया था कि माधव भैया की शादी के बाद वह अपने
माता-पिता से अपने बारे में बात करेगी ! यह पत्र आज वह ऑफिस में विश्वास को देने
वाली थी ! उसे माधव भैया और अपनी नई नवेली भाभी से भी समर्थन की पूरी आशा थी !
अधरों पर मीठी सी मुस्कान लिए उसने यही बात बताने के लिए विश्वास को वीडियो कॉल मिलाया
!
उसी समय आँधी की तरह उसकी मम्मी ने कमरे में प्रवेश किया और उसके हाथ से फोन छीन
कर दूर फेंक दिया ! उनके हाथ में राधिका का लिखा हुआ पत्र था !
“क्या है यह सब राधिका ?” माँ की आँखों से खून बरस रहा था !
“तुम्हारी हिम्मत भी कैसे हुई यह सब सोचने की और करने की ?”
“क्या हो गया मम्मी ? माधव भैया अपनी पसंद की लड़की से शादी कर सकते हैं तो मैं
अपनी पसंद के लड़के से क्यों नहीं ?” राधिका सहम गयी थी !
“माधव से बराबरी करोगी तुम ? अरे वह लड़का है ! लड़कों के सौ गुनाह भी माफ़ हो जाते
हैं लेकिन लड़की का एक गुनाह पूरे कुल को ले डूबता है ! जानती हो तुम?”
साधना वैद
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