Sudhinama
Sunday, November 26, 2017
अनमना मन
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अंश मेरे, हर प्रखर मौसम की निर्मम मार से जिनको बचाया फड़फड़ा कर पंख उड़ कर दूर जाने को स्वयं आतुर हुए-से, मोह के सतरंग ध...
Friday, November 17, 2017
सन्नाटा
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दर्पण के सामने खड़ी हूँ लेकिन नहीं जानती मुझे अपना ही प्रतिबिम्ब क्यों नहीं दिखाई देता , कितने जाने अनजाने लोगों की ...
Saturday, November 4, 2017
व्यामोह
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यह कैसी नीरसता है जैसे अब किसी भी बात में ज़रा सी भी रूचि नहीं रही पहले छोटी-छोटी चीज़ें भी कितना खुश कर जाती थीं मोगरे या स...
Sunday, October 29, 2017
गुरु - गुरुदेव - गुरुघंटाल
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ढोंगी बाबाओं के आश्रमों का मकड़जाल इस लेख का मकसद उन सच्चे गुरुओं और उनके द्वारा संचालित आश्रमों का अपमान करना बिलकुल नहीं है जो अपन...
6 comments:
Saturday, October 21, 2017
एकाकी मोरनी
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बाट निहारूँ कब तक अपना जीवन वारूँ आ जाओ प्रिय तुम पर अपना सर्वस हारूँ सूरज डूबा दूर क्षितिज तक हुआ अंधेरा ...
Monday, October 9, 2017
कशमकश
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महीने के आरम्भ में चंद रुपये मेरी हथेली पर रख जिस तरह तुम निश्चिन्त हो जाते हो मैं थोड़े ही निश्चिन्त हो सकती हूँ अपनी सौ ज़र...
Thursday, October 5, 2017
थकन
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बहुत थक गयी हूँ मेरे जीवन साथी ! जीवन के इस जूए में जिस दिन से मुझे जोता गया है एक पल के लिए भी गर्दन बाहर निकाल लेने का मौ...
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