Sudhinama

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Tuesday, February 23, 2016

बातों की पोटली

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(१) काम क्रोध मद लोभ सब, हैं जी के जंजाल इनके चंगुल जो फँसा, पड़ा काल के गाल ! (२) परमारथ की राह का, मन्त्र मान...
Wednesday, December 2, 2015

जग की रीत

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उगते सूरज को सभी, झुक-झुक करें सलाम  जीवन संध्या में हुआ, यश का भी अवसान !  बहती जलधारा कभी, चढ़ती नहीं पहाड़  एक चना अदना कहीं, नहीं ...
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मैं एक भावुक, संवेदनशील एवं न्यायप्रिय महिला हूँ यथासंभव लोगों में खुशियाँ बाँटना मुझे सुख देता है

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Sadhana Vaid
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