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Tuesday, August 3, 2010

अलविदा ! बड़ी जीजी ! एक पुण्य स्मरण !

जन्म, 6 दिसंबर, 1937 ----- अवसान, 28 जुलाई, 2010

मेरे जीवन के कथा संकलन में एक और बहुत ही सुन्दर कहानी का समापन हो गया ! बड़ी जीजी आप तो हम सबको छोड़ कर बैकुंठ के परमधाम में चिर विश्रान्ति का वरण कर वहाँ चली गयीं लेकिन हमारे विकल मन को कैसे शान्ति मिले इसका कोई उपाय हमें नहीं बता गयीं ! कोई बात नहीं आप जहाँ रहें सुख से रहें और अपने नए संसार और नए जीवन को सदैव अपनी कलात्मक अभिरुचियों से सजाती सँवारती रहें यही कामना है ! अपना मन बहलाने के लिये हमारी स्मृति मंजूषा में आपसे जुड़ी अनमोल यादों की इतनी विपुल दौलत है कि हर स्मृति को जीने के लिये दिन और रातों की यह अवधि भी कम पड़ जायेगी !
अपने विवाह के बाद सबसे पहला परिचय मेरा आपसे ही कराया गया था ! और आपकी स्नेहिल मुस्कान और आश्वस्त करने वाले ममता भरे स्पर्श ने मेरी सारी दुश्चिंताओं और घबराहट को पल भर में ही दूर कर दिया था ! और फिर उसके बाद प्यार, विश्वास और आत्मीयता का जो बंधन आपके और छोटी जीजी के साथ मेरा जुड़ा वह सदैव कायम रहा ! मेरे स्वागत के उपलक्ष्य में आपका लिखा, स्वरबद्ध किया और गाया हुआ गीत आज भी मेरे कानों में गूंजता है --
" धीरे-धीरे पवन थिरकती पात बजाते ताली
भैया मेरा आया लेकर भाभी प्यारी-प्यारी "
कितनी बातें याद करूँ ! किसका ज़िक्र करूँ किसे छोडूँ तय कर पाना मुश्किल हो रहा है ! आप गुणों की खान थीं ! आश्चर्य होता था कि कोई व्यक्ति एक साथ इतनी विधाओं में पारंगत कैसे हो सकता है ! आपके बनाए नवीनतम डिजाइन के एक से बढ़ कर एक आकर्षक स्वेटर्स परिवार के हर सदस्य के बदन पर वर्षों तक सजते रहे और उस ज़माने में जब संयुक्त परिवार की महिलायें ऊन सलाइयों में उलझी फंदों के जोड़-तोड़ और गुणा भाग में व्यस्त रहा करती थीं मैं बड़े इत्मीनान के साथ आपके इस शौक का फ़ायदा उठा जाड़ों की गुनगुनी धूप में मोटे-मोटे उपन्यासों के कथा संसार में विचरती रही और रातों को 'तामीले इरशाद' के बेमिसाल मधुर गीतों की स्वर लहरियों में डूबती उतराती रही ! आपने कभी ऊन और सलाइयों से उलझने का मुझे मौक़ा ही नहीं दिया ! हर नए डिजाइन को आप चैलेन्ज की तरह लेती थीं और चंद दिनों में ही ओरिजिनल से बेहतर स्वेटर तैयार हो जाता था ! आपके बनाए बेहद स्वादिष्ट और सुदर्शन समोसे, मक्खन से मुलायम दहीबड़े और बेहद जायकेदार गरमागरम रसीले गुलाबजामुनों का स्वाद इतने वर्षों के बाद भी जिव्हा से उतरना ही नहीं चाहता है ! आपके बनाए खूबसूरत फूल ना जाने कितने घरों के ड्रॉइंग रूम्स की शोभा आज भी बढ़ा रहे हैं और प्यार, स्नेह और सौहार्द्र का सन्देश प्रसारित कर रहे हैं ! जब भी आपके पास गए आपके गरिमामय आभिजात्यपूर्ण व्यक्तित्व, सुरुचिपूर्ण कलात्मक ढंग से सजे घर, और आपके आत्मीय एवं स्नेहिल आतिथ्य सत्कार से प्रभावित हुए बिना नही रह सके ! गूढ़ से गूढ़ विषय पर भी आपके एकदम स्पष्ट और मौलिक विचार हमेशा आपको विशिष्ट बनाते रहे और मैं हमेशा यही सोचती रही कि आपने चाहे बहुत अल्प काल के लिये ही पढ़ाया लेकिन वे छात्राएं कितनी भाग्यशाली रही होंगी जिनको आपसे कुछ सीखने समझने का सुअवसर मिला होगा ! आपने जीवन भर जिस निष्ठा और समर्पण के साथ अपने घर परिवार का ध्यान रखा, उनकी प्रतिष्ठा को बनाए रखा यह वास्तव में आपके विलक्षण व्यक्तित्व का ही परिचायक है ! आपसे दूर रह कर भी मैंने आपसे बहुत कुछ सीखा है लेकिन जितनी ईमानदारी और सच्चाई के साथ धैर्य, सहनशीलता एवं स्वीकार को आपने वरण कर लिया था उसके आगे नत मस्तक होने के अलावा कोई कुछ नहीं कर सकता !
आपसे बहुत कुछ और सीखना बाकी था बड़ी जीजी ! सोचा था अमेरिका से लौटते ही आपको अपने साथ ले आऊँगी ताकि रही सही कमी पूरी हो जाए लेकिन आपने बीच में ही अपनी आँखें मूँद लीं ! मैं स्वयम् को बहुत छला हुआ अनुभव कर रही हूँ ! अश्रुपूरित नेत्रों से बस यही कामना कर सकती हूँ कि आप जहाँ रहें खुश रहें और अपने बैकुंठ निवास को भी अपने हाथों के बनाए अनुपम फूलों से उसी तरह सजाती सँवारती रहें जैसे यहाँ सजाया करती थीं ! मुझे पूरा यकीन है कि इतने सुन्दर फूल तो देवराज इंद्र के उपवन में भी नहीं होंगे ! हम सब हमेशा बड़ी श्रद्धा, सम्मान और प्यार के साथ आपको तमाम उम्र याद करते रहेंगे और आपके आशीर्वाद की अपेक्षा करते रहेंगे ! आप वहीं से हम पर अपना प्यार और आशीष लुटाती रहिएगा !

साधना वैद

10 comments :

  1. अपनों के जाने का दुख, वो भी जिसे आप इस तरह चाहते रहे हों, समझ सकते हैं.

    ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दे एवं आप और आपके परिवार को इस दुख को सहने की क्षमता प्रदान करे, परम पिता परमेश्वर से यही प्रार्थना है.

    श्रृद्धांजलि!!

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  2. बहुत धीर गंभीर संस्मरण |आज भी उनका चहरा आँखों के सामने घूमता रहता है |ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे | तुम्हारी पोस्ट बहुत अच्छी लगी क्यूंकि उसमें सच्चाई है |तुम्हारे मन की आवाज है |
    आशा

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  3. अपने प्यारों के प्रति उनके जाने के बाद हम दुखी तो होते हैं मगर अक्सर कलमबद्ध नहीं कर पाते ताकि सनद रहे कि इस परिवार में प्यार करने वाले भी रहते हैं ! ऐसे लेखन उस परिवार का ही नहीं समाज के लिए भी उदाहरण होंगे !
    ऐसी संवेदनशीलता और स्नेहयुक्त ह्रदय के लिए आपके परिवार और पति को मुबारकबाद देता हूँ ! शुभकामनायें !

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  4. साधना जी ,
    ऐसे क्षण हर इंसान की ज़िंदगी में आता है जब कोई उनका प्रिय उन्हें छोड़ अपनी यात्रा पर निकल जाता है...आपने उनकी स्मृतियों को जिया है...कलमबद्ध किया है...ये बहुत बड़ी बात है ...
    ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और आपको और आपके परिवार को धैर्य ....

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  6. साधना जी,
    सबसे पहले तो माफ़ी चाहती हूँ...आपकी इस दुख की घड़ी में शामिल होने इतनी देर से पहुंची....रियली सॉरी
    अपने जितने स्नेह से उन्हें याद किया है...परिलक्षित हो रहा है..वे कितनी करीब थीं आपके.पर ह्रदय को पत्थर बनाना ही पड़ता है...वे स्मृतियों में हमेशा आपके साथ रहेंगी

    ईश्वर आपको इस अपूर्णीय क्षति को सहने की शक्ति प्रदान करे,बस यही प्रार्थना है..

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  7. श्र्द्धांजलि अर्पण ।

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  8. परिवार में इतने अपनों को खो चुकी हूँ कि जब आपकी पोस्ट पढ़ी ,तो काफीदेर तक निर्विकार हो गई | मेरे सामने सारे चेहरे एक एक कर आने लगे आपकी कुछ बातें तो दिल को गहरे छू गई | कैसे लिख पाती हैआप इतना सुन्दर और मन को बांधने वाला
    ईश्वर आपको धैर्य प्रदान करें |

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  9. परिवार में इतने अपनों को खो चुकी हूँ कि जब आपकी पोस्ट पढ़ी ,तो काफीदेर तक निर्विकार हो गई | मेरे सामने सारे चेहरे एक एक कर आने लगे आपकी कुछ बातें तो दिल को गहरे छू गई | कैसे लिख पाती हैआप इतना सुन्दर और मन को बांधने वाला
    ईश्वर आपको धैर्य प्रदान करें |

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