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Sunday, November 14, 2010

बाल दिवस – बच्चों की नज़र में

बच्चों का बहु प्रतीक्षित बाल दिवस फिर से आ पहुँचा है और बच्चे खुश हैं कि स्कूल में आज खूब मज़े आने वाले हैं उन्हें यूनीफ़ार्म नहीं पहननी होगी ! रंगीन कपडे पहन कर जा सकेंगे ! अपनी सबसे खूबसूरत ड्रेस पहनने का और सब दोस्तों को दिखा कर रौब जमाने का मौक़ा मिला है जिसे कोई भी गँवाना नहीं चाहता ! स्कूल में मिठाई मिलेगी और कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे ! आज के दिन टीचर्स की झिड़कियों और पढ़ाई के नीरस क्रम में कुछ ब्रेक लगेगा ! शायद किसी स्कूल में बच्चों को फिल्म दिखाई जाये या किसी स्कूल में बच्चों को पिकनिक पर ले जाया जाए ! जो कुछ भी हो बस आज खूब मस्ती होगी और खूब धमाल होगा ! आज के बच्चों के लिये ‘बाल दिवस’ का इतना ही महत्त्व है !
कल का अखबार देख कर दुःख हुआ कि शहर के नामी गिरामी स्कूलों के बच्चों से जब यह पूछा गया कि बाल दिवस क्यों मनाया जाता है तो अधिकाँश बच्चे इसका सही उत्तर नहीं दे पाए ! कई बच्चों में से केवल दो ही बच्चे बता पाये कि नेहरू जी के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि वे बच्चों से बहुत प्यार करते थे ! आश्चर्य होता है कि स्कूल्स में शिक्षक बच्चों को क्या पढ़ाते हैं और बच्चे क्या ग्रहण करते हैं ! जिस दिवस को हर साल इतने जोर शोर से मनाया जाता है, जिसके कार्यक्रमों के लिये कई दिन पहले से रिहर्सल होती रहती है क्या उस दिन के महत्त्व के बारे में बच्चों को कोई जानकारी नहीं दी जाती ! किसीने इसे डॉ. राधाकृष्णन का जन्मदिन बताया तो किसीने इंदिरा गाँधी का तो किसीने कह दिया ‘किसी नेता का जन्मदिन होता है नाम नहीं मालूम !’ दुःख होता है यह देख कर कि हम पौधों के पत्तों को तो खूब चमका रहे हैं धो पोंछ कर पर उनकी जड़ों की उपेक्षा कर रहे हैं ! जिस महामानव ने देश के लिये अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया, अपने शरीर के कण-कण को देश के लिये समर्पित करने के उद्देश्य से जिसने मरणोपरांत अपने शरीर की राख को गंगा में विसर्जित करने के स्थान पर देश की माटी में मिला देने की इच्छा व्यक्त की, उसके बलिदान को कितनी आसानी से सबने भुला दिया ! जब देश के नेताओं ने और प्रबुद्ध वर्ग ने ही नेहरू जी के आदर्शों को तिलांजलि दे दी है और उन्हें भुला दिया है तो बच्चों से क्या उम्मीद रखी जा सकती है ! वे अबोध तो उतना ही जान पायेंगे जितना उन्हें बताया जाएगा ! उनके चरित्र निर्माण का दायित्व, उनकी रुचियों की निखारने का दायित्व और उनकी सोच को एक सार्थक दिशा देने का दायित्व किसका है ? क्या शिक्षक गण और माता पिता अपने इस कर्तव्य को भूल गये हैं ? वरना क्या कारण है कि आज के बच्चे जितना अभिनेता अभिनेत्रियों के बारे में जानकारी रखते हैं अपने देश के नेताओं के बारे में कुछ भी नहीं जानते ! क्या हमें अपनी शिक्षा प्रणाली में कुछ सुधार लाने की ज़रूरत नहीं है या फिर माता पिता को भी अपने बच्चों के सामान्य ज्ञान के सन्दर्भ में कोई दिलचस्पी नहीं रह गयी है ?

साधना वैद

15 comments :

  1. बीनाशर्माNovember 14, 2010 at 8:28 AM

    बच्चो को तो वही मालूम होता है जिसे हम बताते है । जब हम बडो को ही बाल दिवस मनाने का औचित्य नही मालूम तब बेचारे बच्चे क्या करे। अब बचपन रहा भी कहा उसे तो मोटी -मोटी किताबे निगल गई ।

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  2. लेकिन आज तो रविवार है... हाँ कुछ विद्यालयों में जरूर कार्यक्रम आयोजित होंगे....

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  3. मेरे ब्लॉग पर पहचान कौन चित्र पहेली :-४

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  4. बीना जी ने सही कहा है। अगर कहीं बाल दिवस मनाये भी जाते हैं तो केवल दिखावे के लिये । रंगा रंग प्रोग्राम रखे जाते हैं फिलमी धुनो पर बच्चे नाचते हैं अपनी आज़ादी या देश के महान लोगों के बारे मे कुछ नही बताया जाता ये भी शायद ही बताया जाता हो कि आज जिन चाचा नेहरू का जन्म दिन है वो कौन थे और उन्होंने देश के लिये क्या किया। आभार।

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  5. अफ़सोस होता है यह सब देख कर ...

    पर आप बच्चों से बालदिवस के बारे में पूछते ही क्यों हैं ? उनसे जानिये वैलंटाईन डे के बारे में ...

    बाल दिवस के बारे में बच्चों को बताया तो जाता होगा स्कूल में ..पर बच्चे वही याद रखते हैं जिनके प्रति उनकी रूचि होती है ..

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  6. निर्मला जी और संगीता जी की बात से सहमत हूँ...... हाँ आपकी चिंता भी विचारणीय है......

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  7. बहुत ही दुखद स्थिति है यह....बच्चे क्या आप कुछ वयस्कों से भी पूछ कर देखिए (ब्लॉग जगत के नहीं) जिनकी पढने लिखने में रूचि ना हो...अपने देश की कई महत्वपूर्ण बातें नहीं बता पायेंगे...लोगों ने बस क्षण में जीना सिख लिया है...
    बहुत ही चिंतनीय विषय की तरफ ध्यान आकृष्ट किया....लोगों को बेसिक जानकारी तो होनी ही चाहिए

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  8. असल बात तो यह है कि आज का समाज खोखलेपन में जी रहा है. और आज के माता - पिता भी देश के महत्व को न जानकर अपने बच्चों को पश्चिमी सभ्यता की ओर धकेल रहे है.

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  9. नेहरू जी कि अपने पार्टी अपने ओउलाद ने ही जब उनके सिधान्तों को ता दिया तो दूसरों कि बात क्या करें ... बल दिवस शुभ हो .

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  10. आज के अधिकांश नेताओं में ऐसा कौन सा गुण है जो बच्चों को बताने लायक है? बेहतर तो यह होगा कि उन्हें 1950 के पहले के भारतीय नेताओं के बारे में ज्यादा बताया जाए।...बच्चों को सिखाने का दायित्व आजकल विद्यालय से ज्यादा माता-पिता का है। विद्यालय भी अब पहले जैसे कहां रहे।...बाल दिवस की शुभकामनाएं।

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  11. बाल दिवस पर शुभकामनाएं |आज रविवार होने कम कारण गहमागहमी नजर ही नहीं आई |बहुत अच्छा लिखा है बहुत बहुत बधाई |
    आशा

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  12. बेहतरीन पोस्ट लेखन के लिए बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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  13. बहुत अच्छा लेख प्रस्तुत किया है.

    समाज में नेता और अध्यापक या बच्चे अपने अपने कर्ताव्व्यों से विमुख हो चुके हैं तो माता पिता तो कदापि अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं हो सकते जो की धरती पर बच्चे के पहले गुरु होते हैं...और अगर आज के बच्चों को पूछने पर ये भी नहीं पता तो अभिभावक भी उतने ही जिम्मेदार हैं. इसलिए बेहतर है एक दूसरे पर ऊँगली उठाने की बजाये माता पिता पहले अपनी जिम्मेदारी भी समझे और ये बेसिक ज्ञान की बाते घर में भी देने का कार्यभार संभाले. दूसरे पर दोषारोपण कर के हर समस्या से छुटकारा नहीं पाया जा सकता.

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  14. बिलकुल सही बात कही आपने ....विचारणीय पोस्ट !!!

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  15. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है! हार्दिक शुभकामनाएं!
    लघुकथा – शांति का दूत

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