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Wednesday, May 20, 2015

नूर की बूँद





देख तेरे दामन से मैं नूर की

एक बूँद तोड़ने आई हूँ

तेरे मस्तक से नसीब की

एक लकीर मोड़ने आई हूँ

देख ले तू मेरी ज़िद और

परख ले तू आज मेरा हौसला

मैं तेरी रोशनी में अपनी

थोड़ी सी रोशनी जोड़ने आई हूँ !

 

तू है मेरी नज़र के सामने

तुझे अपनी नज़रों में क़ैद करने आई हूँ

मैं हूँ तेरी नज़रों के सामने

तेरी निगाहों में अपना वजूद ढूँढने आई हूँ

देखा न होगा तूने मुझसा कोई और

सारे ज़माने में दूसरा

मैं बेपनाह खूबसूरत फूलों से लदी

एक नाज़ुक सी डाली

खुद तेरे हाथों पंखुड़ी पंखुड़ी

टूटने के लिए आई हूँ !

 

 

साधना वैद

 

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