देख तेरे दामन से मैं नूर की
एक बूँद तोड़ने आई हूँ
तेरे मस्तक से नसीब की
एक लकीर मोड़ने आई हूँ
देख ले तू मेरी ज़िद और
परख ले तू आज मेरा हौसला
मैं तेरी रोशनी में अपनी
थोड़ी सी रोशनी जोड़ने आई हूँ !
तू है मेरी नज़र के सामने
तुझे अपनी नज़रों में क़ैद करने आई हूँ
मैं हूँ तेरी नज़रों के सामने
तेरी निगाहों में अपना वजूद ढूँढने आई
हूँ
देखा न होगा तूने मुझसा कोई और
सारे ज़माने में दूसरा
मैं बेपनाह खूबसूरत फूलों से लदी
एक नाज़ुक सी डाली
खुद तेरे हाथों पंखुड़ी पंखुड़ी
टूटने के लिए आई हूँ !
साधना वैद

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