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Saturday, February 22, 2020

वेदना की राह पर

  

वेदना की राह पर
बेचैन मैं हर पल घड़ी ,
तुम सदा थे साथ फिर
क्यों आज मैं एकल खड़ी !

थाम कर उँगली तुम्हारी
एक भोली आस पर ,
चल पड़ी सागर किनारे
एक अनबुझ प्यास धर !

मैं तो अमृत का कलश
लेकर चली थी साथ पर ,
फिर भला क्यों रह गये
यूँ चिर तृषित मेरे अधर !

मैं झुलस कर रह गयी
रिश्ते बचाने के लिये ,
मैं बिखर कर रह गयी
सपने सजाने के लिये !

रात का अंतिम पहर
अब अस्त होने को चला ,
पर दुखों की राह का
कब अंत होता है भला !

चल रही हूँ रात दिन
पर राह यह थमती नहीं ,
कल जहाँ थी आज भी
मैं देखती खुद को वहीं !

थक चुकी हूँ आज इतना
और चल सकती नहीं ,
मंजिलों की राह पर
अब पैर मुड़ सकते नहीं

कल उठूँगी, फिर चलूँगी
पार तो जाना ही है ,
साथ हो कोई, न कोई
इष्ट तो पाना ही है !

साधना वैद

19 comments :

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार 24 फरवरी 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार यशोदा जी ! सप्रेम वन्दे !

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  3. वाह!!साधना जी ,बहुत खूबसूरत सृजन ।

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    1. हार्दिक धन्यवाद शुभ्रा जी ! आभार आपका !

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  4. कल उठूँगी, फिर चलूँगी
    पार तो जाना ही है ,
    साथ हो कोई, न कोई
    इष्ट तो पाना ही है !
    आपकी लेखनी को सादर नमन ।

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    Replies
    1. जी ! हृदय से बहुत बहुत आभार आपका पुरुषोत्तम जी ! सादर !

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  5. ह्रदयस्पर्शी ,लाज़बाब सृजन दी ,सादर नमन

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    1. हार्दिक धन्यवाद कामिनी जी ! आभार आपका !

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  6. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'बुधवार' २६ फ़रवरी २०२० को साप्ताहिक 'बुधवारीय' अंक में लिंक की गई है। आमंत्रण में आपको 'लोकतंत्र' संवाद मंच की ओर से शुभकामनाएं और टिप्पणी दोनों समाहित हैं। अतः आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/



    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'बुधवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।



    आवश्यक सूचना : रचनाएं लिंक करने का उद्देश्य रचनाकार की मौलिकता का हनन करना कदापि नहीं हैं बल्कि उसके ब्लॉग तक साहित्य प्रेमियों को निर्बाध पहुँचाना है ताकि उक्त लेखक और उसकी रचनाधर्मिता से पाठक स्वयं परिचित हो सके, यही हमारा प्रयास है। यह कोई व्यवसायिक कार्य नहीं है बल्कि साहित्य के प्रति हमारा समर्पण है। सादर 'एकलव्य'

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    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार एकलव्य जी ! सादर वन्दे !

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  7. बहुत सुन्दर साधना जी !
    'मैं झुलस कर रह गयी
    रिश्ते बचाने के लिये ,
    मैं बिखर कर रह गयी
    सपने सजाने के लिये !'
    इन चार पंक्तियों में तो आपने बेटी, बहन, पत्नी और माँ'की सम्पूर्ण जीवन-गाथा व्यक्त कर दी.

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    1. आपने कविता के मर्म को पहचाना हृदय से आभारी हूँ आपकी गोपेश जी ! हार्दिक धन्यवाद आपका !

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  8. अप्रतिम सृजन आदरणीया ।
    सादर ।

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    1. हार्दिक धन्यवाद पल्लवी जी ! आभार आपका !

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  9. Replies
    1. हृदय से धन्यवाद आपका केडिया जी ! दिल से आभार आपका !

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  10. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद जी आपका ! दिल से आभार !

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  11. As claimed by Stanford Medical, It's really the one and ONLY reason women in this country get to live 10 years longer and weigh on average 42 lbs lighter than we do.

    (And realistically, it is not about genetics or some secret exercise and absolutely EVERYTHING about "HOW" they eat.)

    P.S, What I said is "HOW", and not "what"...

    Click this link to find out if this quick quiz can help you find out your real weight loss possibility

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