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Wednesday, March 25, 2026

गुफ्तगू – लघुकथा

 







महीनों से एक टूटे फूटे कनस्तर में पड़े पत्थर के थोड़े से कोयलों को बड़ी हैरानी हो रही थी ! आज मालकिन ने उन्हें सालों बाद बाहर निकाला है ! सूरज की रोशनी आज ज्यादह चमकदार लग रही थी ! हवा भी तो कितनी खुशनुमां लग रही थी ! वरना इतने दिनों से सीलन भरे डिब्बे में बंद पड़े उनका तो दम ही घुटा जा रहा था ! आज शांता बाई पुरानी-धुरानी अँगीठी को भी बड़े जतन से मरम्मत करके साफ़ सुथरी मिट्टी से पोत रही थी ! पास में एक थैली में कुछ उपले भी रखे थे ! आखिर कोयलों से रहा नहीं गया तो पूछ ही लिया उपलों से ! 

“आखिर बात क्या है उपले भाई ? इतने लम्बे समय से हम तो अपने कनस्तर में बंद पड़े सो रहे थे तो दुनिया की कुछ खबर ही नहीं है हमको ! आज मालकिन को हमारी याद कैसे आ गयी ?”

उपले कुछ गुमसुम से लग रहे थे !

“अरे, तो क्या तुम्हें युद्ध की कोई खबर नहीं है कोयला भाई ? यह जो अमेरिका और इरान में युद्ध छिड़ गया है उसके कारण खाना पकाने वाली गैस की कमी हो गई है ! इसीलिये अब मालकिन को हमारी याद आई है ! यह हमारी खातिर तवज्जो इसीलिये हो रही है कि अब घर वालों की भूख मिटाने के लिए हमें अपना बलिदान देना होगा !”

“अरे, इतनी भी चिंता क्यों कर रहे हो उपले भाई ! मैं हूँ ना चिर युवा ! मेरे होते तुम पर कोई आँच नहीं आएगी ! तुम्हारी साज सजावट तो सिर्फ इसलिए है कि घर में ब्याह शादी हो तो सारे बारातियों को सज धज के तैयार रहना चाहिए ! न जाने किसकी पुकार लग जाए ! तुम चिंता न करो ! मेरे होते तुम्हारी शहादत की ज़रुरत नहीं पड़ेगी इसका भरोसा है मुझे !”

तसल्ली देती यह आवाज़ थी इन्डक्शन चूल्हे की ! 


साधना वैद   

Thursday, March 19, 2026

हासिल

 



आज ओम प्रकाश जी के घर में उत्सव का माहौल है ! वर्षों से चले आ रहे ज़मीनी विवाद के मुकदमे का फैसला आखिरकार आज उनके हक़ में आ ही गया ! उनका छोटा भाई सूरज प्रकाश, जो गाँव के प्राइमरी स्कूल में टीचर है और आर्थिक रूप से भी कमज़ोर है, मुकदमा हार गया ! इस मुकदमे को जीतने के लिए कुछ कम करतब तो ओमप्रकाश जी ने भी नहीं किये थे ! कितनी तो तिकड़में लगाईं, कितनी चालें चलीं, अधिकारियों की जेबें भरने के लिए पैसा भी कम नहीं बहाया ! तो जीत तो उनके पाले में आनी ही थी ! सूरज प्रकाश की कहाँ औकात थी उनसे मोर्चा लेने की ! प्राइमरी स्कूल का अदना सा शिक्षक, बच्चों को नैतिक शिक्षा और सदाचरण का पाठ ही पढ़ाता रह गया और मुकदमे की मार से और गरीब होता चला गया ! नैतिक शिक्षा की चादर ओढ़ कर आज की दुनिया में कहीं मुकदमे जीते जाते हैं ?

रात भर ओमप्रकाश जी के घर में शराब और शबाब के दौर चलते रहे ! बड़े-बड़े नेता, विधायक, अधिकारी सभी आमंत्रित थे ! सूरज प्रकाश के घर में आज अंधकार छाया था ! रात को चूल्हा भी न जला था ! बच्चों को मन मसोस कर सुबह के बचे खाने से कुछ निवाले खिला दिए घरवाली ने और दोनों पति पत्नी दो घूँट पानी पीकर सोने का उपक्रम करते रहे ! बड़े भाई के घर के जश्न की आवाजें मन पर घन की सी टंकार करती रहीं !

सुबह हो गयी थी ! ओमप्रकाश जी के घर से जश्न की आवाजें आना बंद हो चुकी थीं लेकिन आगंतुकों की आवाजाही बढ़ गयी थी ! तभी सूरज प्रकाश का बड़ा बेटा घबराया हुआ आया !

“पापा, ताऊजी को बड़े जोर का हार्ट अटैक आया है ! गाँव के सारे डॉक्टर्स आये हैं ! शहर के बड़े अस्पताल ले जाने की बात हो रही है ! आप चलिए ना !”

उद्विग्न सूरज प्रकाश चप्पल भी नहीं पहन पाए कि गगन भेदी विलाप के स्वर वातावरण में गूँज उठे ! सालों की जद्दोजहद के बाद मिली जीत को ओम प्रकाश जी चौबीस घंटे भी मना नहीं सके ! मुकदमा जीतने के बाद आखिर हासिल क्या हुआ उन्हें सब यही सोच रहे थे !


चित्र - गूगल से साभार 



साधना वैद
 


Tuesday, March 17, 2026

वह लड़का है - लघुकथा

 



राधिका बहुत खुश थी ! उसके परंपरावादी परिवार ने बड़ी कशमकश और तनातनी के बाद अंतत: बड़े भैया माधव के अंतरजातीय विवाह के लिए अनुमति दे ही दी ! उनके रूढ़िवादी ब्राहमण परिवार में यह एक ऐतिहासिक फैसला था कि माधव का विवाह उसके साथ पढ़ने वाली रागिनी के साथ होने जा रहा था ! यद्यपि उसके बाबा दादी और घर के अन्य वरिष्ठ सदस्य अभी भी इस निर्णय के खिलाफ थे ! ऐसा दुस्साहस अभी तक उनके खानदान में किसी ने नहीं किया था लेकिन इकलौते बेटे की जिद के आगे सबको अपने हथियार डालने ही पड़े ! राधिका खुश थी इसलिए कि अब उसका रास्ता भी साफ़ हो गया है ! जब माधव भैया का विवाह वैश्य समुदाय की कन्या के साथ हो सकता है तो उसका विवाह उसके कायस्थ दोस्त के साथ क्यों नहीं हो सकता ! विश्वास बहुत्त ही स्मार्ट, हैंडसम और प्रतिभाशाली नौजवान है और उसके साथ ही एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करता है ! उसके परिवार में सभी उच्च शिक्षित और प्रगतिशील सोच रखने वाले उदारमना लोग हैं ! मन ही मन उसने अपने सुन्दर भविष्य के सपने बुनने भी शुरू कर दिए थे ! रात को ही उसने विश्वास को पत्र में लिख दिया था कि माधव भैया की शादी के बाद वह अपने माता-पिता से अपने बारे में बात करेगी ! यह पत्र आज वह ऑफिस में विश्वास को देने वाली थी ! उसे माधव भैया और अपनी नई नवेली भाभी से भी समर्थन की पूरी आशा थी ! अधरों पर मीठी सी मुस्कान लिए उसने यही बात बताने के लिए विश्वास को वीडियो कॉल मिलाया !
उसी समय आँधी की तरह उसकी मम्मी ने कमरे में प्रवेश किया और उसके हाथ से फोन छीन कर दूर फेंक दिया ! उनके हाथ में राधिका का लिखा हुआ पत्र था !
“क्या है यह सब राधिका ?” माँ की आँखों से खून बरस रहा था !
“तुम्हारी हिम्मत भी कैसे हुई यह सब सोचने की और करने की ?”
“क्या हो गया मम्मी ? माधव भैया अपनी पसंद की लड़की से शादी कर सकते हैं तो मैं अपनी पसंद के लड़के से क्यों नहीं ?” राधिका सहम गयी थी !
“माधव से बराबरी करोगी तुम ? अरे वह लड़का है ! लड़कों के सौ गुनाह भी माफ़ हो जाते हैं लेकिन लड़की का एक गुनाह पूरे कुल को ले डूबता है ! जानती हो तुम
?




साधना वैद
 


Thursday, March 12, 2026

दोहा ग़ज़ल

 




बच्चे शिक्षक का नहीं, करते अब सम्मान
मौक़ा एक न छोड़ते, करते नित अपमान !

कोचिंग कक्षा की बड़ी, मची हुई है धूम
लेकिन लालच ने किया, इसको भी बदनाम !

दुगुनी तिगुनी फीस भर, माथा जाये घूम
कहते विद्या दान से, बड़ा न कोई दान !

साक्षरता के नाम पर, कैसी पोलम पोल
सच्चे झूठे आँकड़े
भरने से बस काम !

नैतिकता कर्तव्य को, ढीठ पी गए घोल !
प्रतिशत बढ़ना चाहिए, साक्षरता के नाम !

कक्षा नौ में छात्र सब, दिए गए हैं ठेल
ऐसी शिक्षा से भला, किसका होगा नाम !

अध्यापक और छात्र में, हो न परस्पर भीत  
शिष्य करें गुरुदेव का, मन से आदर मान !

करना होगा पितृ सम, शिक्षक को व्यवहार
बच्चे भी दर्शन करें शिक्षक में भगवान् !

 

साधना वैद

 


Wednesday, March 4, 2026

होली है

 




बुरा न मानें 

न चिढ़ें, न चिढ़ाएँ

रंग लगाएं

प्रेम और प्यार के 

दें शुभकामनाएं ।


प्यार का पर्व

है रंगों की बहार

मीठी गुंजार

है पानी की फुहार

है होली का त्योहार



चित्र - गूगल से साभार 


                साधना वैद