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Wednesday, March 4, 2026

होली है

 




बुरा न मानें 

न चिढ़ें, न चिढ़ाएँ

रंग लगाएं

प्रेम और प्यार के 

दें शुभकामनाएं ।


प्यार का पर्व

है रंगों की बहार

मीठी गुंजार

है पानी की फुहार

है होली का त्योहार



चित्र - गूगल से साभार 


                साधना वैद                

2 comments :

  1. आपने बहुत सरल शब्दों में बड़ा सुंदर संदेश दिया। मुझे खास तौर पर “न चिढ़ें, न चिढ़ाएँ” वाली बात बहुत अच्छी लगी, क्योंकि होली का असली मज़ा तभी आता है जब सब लोग खुशी और सम्मान के साथ रंग खेलें। सच कहु तो आपकी कविता में रंग, प्यार और मिठास तीनों साथ दिखाई देते हैं।

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    1. हार्दिक धन्यवाद आपका ! हृदय से आभार !

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