आपने बहुत सरल शब्दों में बड़ा सुंदर संदेश दिया। मुझे खास तौर पर “न चिढ़ें, न चिढ़ाएँ” वाली बात बहुत अच्छी लगी, क्योंकि होली का असली मज़ा तभी आता है जब सब लोग खुशी और सम्मान के साथ रंग खेलें। सच कहु तो आपकी कविता में रंग, प्यार और मिठास तीनों साथ दिखाई देते हैं।
आपने बहुत सरल शब्दों में बड़ा सुंदर संदेश दिया। मुझे खास तौर पर “न चिढ़ें, न चिढ़ाएँ” वाली बात बहुत अच्छी लगी, क्योंकि होली का असली मज़ा तभी आता है जब सब लोग खुशी और सम्मान के साथ रंग खेलें। सच कहु तो आपकी कविता में रंग, प्यार और मिठास तीनों साथ दिखाई देते हैं।
ReplyDeleteहार्दिक धन्यवाद आपका ! हृदय से आभार !
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