नमस्कार साथियो,
'चौपई' एक नई विधा है ! यह 'चौपाई' से भिन्न है !
इस पर मेरा एक प्रयास !
मुद्दत से दिल में थी प्यास
जाने कब पूरी हो आस
मिल कर जब बैठेंगे पास
बाटेंगे खुशियाँ तब ख़ास !
हो जाएंगे दुःख सब दूर
चिंता हो जाएगी चूर
मन्नत सबकी होगी पूर
चेहरों पर उतरेगा नूर !
चित्र - गूगल से साभार
साधना वैद
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