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Monday, July 6, 2015

विनती सुनो मोरी ( बाल गीत )





तिनका-तिनका चुन कर मैंने
एक बनाया सुन्दर नीड़
नोंच-नोंच कर फेंका तुमने
और बढ़ाई मेरी पीर !

मेरा सुख संसार रौंद कर
बोलो तुम क्या पाओगे ,
मेरे बच्चों के रोदन से
क्या तुम पिघल न जाओगे ?

काठ काँच के नकली पंछी
क्यों तुमको ललचाते हैं
उनके नकली रूप रंग से
क्यों सब भरमा जाते हैं ! 

घर के हर कोने-कोने में
उन्हें सजा कर रखते हो’
लेकिन जीवित विहग वृन्द को
दूर भगाते रहते हो ! 

है तुमको यदि प्यार प्रकृति से  
हमको भी बस जाने दो
अपने घर आँगन में हमको
जी भर कर कुछ गाने दो ! 

द्विगुणित हो जायेगी शोभा
खिल जाएगा घर संसार
मेरी मधुरिम स्वर लहरी से
होगा प्राणों में संचार ! 

सर्वश्रेष्ठ रचना हो प्रभु की
फिर क्यों छोटा हृदय प्रदेश
वृहद् विशाल तुम्हारे घर में  
वर्जित है क्यों हमें प्रवेश ?

साधना वैद