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Thursday, March 17, 2011

सुखद खबर – अब देश गरीब नहीं रहा !

पिछले पूरे सप्ताह दुःख भरी खबरें ही देखने और सुनने को मिलीं | क्रिकेट मैचों में भारत का प्रदर्शन साधारण रहा, नये-नये घोटालों की खबरें आती रहीं, लीबिया में जन आंदोलन हारता हुआ दिखा, देश में जगह-जगह ‘रास्ता रोको’ ‘रेल रोको’ आन्दोलनों के समाचार चिंताओं को बढ़ाते रहे, जापान के भूकंप और फिर सुनामी और अटॉमिक रेडीएशन की चिंता भरी खबरें और साथ में लगातार चलने वाले बैकग्राउंड म्यूज़िक की तरह हमारे महान नेताओं के कारनामों की दिल दुखाने वाली खबरें व्यथित करती रहीं पर अचानक आज एन डी टी वी इंडिया की न्यूज़ पर एक ऐसी खबर सुनी कि दिल बाग-बाग हो गया !

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में गरीबी की परिभाषा देकर अचानक सारे दुःख और चिंताएं दूर कर दीं ! सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि शहर में १७ रुपये प्रतिदिन या उससे भी कम कमाने वाले और गाँवों में १२ रुपये प्रतिदिन या उससे कम कमाने वाले लोग ही इस देश में गरीब हैं ! दिल खुशियों से भर गया ! सब चिंताएं दूर हो गयीं ! अचानक महसूस होने लगा कि हमारे देश में गरीबी तो लगभग खत्म ही हो चुकी है ! सरकार की मुहिम ‘गरीबी हटाओ देश बचाओ कामयाब हो चुकी है ! एक अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री को सत्ता में लाने के सुखद नतीजे तो अब सामने आये हैं ! हमारे घर की बर्तन माँजने वाली और झाडू पोंछा करने वाली बाई, जिसे हम ६०० रुपये माहवार देते हैं, और जो अन्य कई घरों में काम करके लगभग ३००० रूपए कमा ही लेती है, उसे हम व्यर्थ ही गरीब समझते रहे, हमारा ड्राइवर जिसे हम ५००० रुपये प्रतिमाह देते हैं और जो पुराने कपड़ों को भी माँग कर शान से पहन लेता है, गरीब कहाँ है ! श्रीमान जी का ऑफिस बॉय जो पिछले दो साल से हम सबसे चन्दा माँग कर अपनी पत्नी का इलाज करवा रहा था और फिर भी उसे बचा नहीं पाया वह भी कहाँ गरीब है उसकी तनख्वाह भी तो ३५०० रुपये प्रतिमाह है और उसका बेटा भी १०० रुपये की दिहाड़ी पर प्रतिदिन काम करता है ! आसपास की कई कोठियों में बेलदारी का काम करने वाला माणिक नाम का मजदूर भी तो अभी तक १०० रुपये प्रतिदिन कमाता था और अब तो तरक्की के साथ उसकी मजदूरी १२५ रुपये प्रतिदिन हो गयी है ! पर्क के रूप में जिसे रोज गरम चाय, पुराने जूते, कपडे, त्यौहार पर इनाम और मिठाई अलग से मिलती हैं वह भी गरीब कहाँ रहा ! यहाँ तक कि हमारी सहेली बीनाजी जो गरीब बच्चों के लिये ‘प्रयास’ नाम की संस्था चला रही हैं और उनके विकास के लिये काम करती है, उसमें आने वाले बच्चे भी तो कचरा बीन कर प्रतिदिन कम से कम ५० से ६० रुपये रोज कमा ही लेते हैं वह भी अब गरीब कहाँ रहे !

सरकारी आँकड़ों के अनुसार १७ रुपये और १२ रुपये तक की कमाई वाले लोग देश में केवल ३७% ही हैं ! बाकी ६३% तो गरीबी से मुक्ति पा चुके हैं ! आइये हम सब इस महान उपलब्धि का जश्न मनाएं और एक दूसरे को बधाई दें ! और लानत भेजें उन निराशावादी लोगों को जो कहते हैं कि देश के केवल १०% लोग ही अमीर हैं बाकी ९०% लोग आज भी गरीबी की चक्की में पिस रहे हैं ! क्या वास्तव में हमें अपना नज़रिया नहीं बदल लेना चाहिये ? घिसे पिटे कपड़े पहने, कंधे झुकाये, टूटी साइकिल घसीटने वाले वाले, दुखी और परेशान से दिखने वाले जिन लोगों को हम गरीब समझते रहे वे गरीब थोड़े ही हैं ! यह तो सिर्फ हमारी गलत फहमी थी ! अब तो अपने दिमाग पर जोर डाल कर सिर्फ उन ३७% लोगों के बारे में चिंता कीजिये जो वास्तव में १७ रुपये और १२ रुपये तक ही प्रतिदिन कमा पाते हैं वे बेचारे क्या करते होंगे ? क्या उनका जीवित रह पाना एक चमत्कार नहीं है ?

क्या ये सारी बातें आपको कुछ अजीब लग रही हैं ? विश्वास नहीं हो रहा है ? या ये तथ्य हजम नहीं हो पा रहे हैं ? मेरी सलाह मानिये ! अपने दिमाग पर जोर मत डालिये ! हमारे नेता और सरकारी अफसर बहुत मेहनती हैं उनकी कद्र कीजिये, उनकी बातें सुनिये और मानिये, तथा सिर्फ और सिर्फ सरकारी चश्मा लगाइए ! आपके सारे भ्रम दूर हो जायेंगे !

साधना वैद

16 comments :

  1. वाह ! तो ये महान उपलब्धि है अर्थ शास्त्री के हाथ में सत्ता आने की ??
    वैसे आप सच ही कह रही है साधना जी ये सब लोग गरीब कहाँ है ..उनमे संवेद्नाएं, सोचने समझने की क्षमताएं भी है ...गरीबी तो दिमागी दिवालियेपन में है जहाँ एक दिन की मूलभूत सुविधाएँ जुटाने की जद्दोजहद करते लोग भी आकड़ों के अंतर्गत गरीब नहीं . समझ सकती हूँ विचारों पर बड़ा आघात है ये तो !!
    क्या नाम दें?

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  2. संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है ...आंकड़े देख कर खुशफहमी पाल लेते हैं ..

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  3. वाह फिर तो हम बहुत अमीर हैं। लानत है ऐसी संवेदनहीनता पर। शुभकामनायें।

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  4. गरीब तो दिमाग हो गया है फिजूल का बातें सोच सोच कर |बी .पी .ल वाले लोग भी माध्यम वर्ग से अधिक अमीर हैं |सबसे गरीब के रूप मैं तो उभरा है माध्यम वर्ग |जो झूटी शान के लिए सब कुछ करने के लिए तैयार है |झूठे सपनों में कब तक जीते रहेंगे
    आशा

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  5. जी नहीं ये अर्थशास्त्री PM १२ रूपये प्रतिदिन को २ रूपये प्रतिदिन तक लायेंगे..
    तब गरीब भूखे मर जायेंगे
    तब भारत में सब अमीर हो जायेंगे..

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  6. जी नहीं ये अर्थशास्त्री PM १२ रूपये प्रतिदिन को २ रूपये प्रतिदिन तक लायेंगे..
    तब गरीब भूखे मर जायेंगे
    तब भारत में सब अमीर हो जायेंगे..

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  7. सही बात है... सरकारी चश्मा लगाइए और देश की तरक्की देखिये!
    सब सरकारी चश्मे का ही कमाल है!!
    सुन्दर सच...

    आभार
    चलता जीवन पर आपके विचारों का इंतज़ार है

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  8. कैसे ऐसी वास्तविकता से दूर बातें कह जाते हैं...लगता है सिर्फ उन्हें कागज़ काले करने हैं...और बैठकें करनी हैं....सच कहने का दम कहाँ...खुद को ही दिलासा दिए जा रहे हैं...या शायद खुद को यह कह कर...खुश हो रहे हैं..कि सिर्फ ३७% गरीब ही हैं...

    हास्यास्पद है ये सब...आपने बहुत ही बढ़िया खबर ली है,इस आलेख में...काश उनलोगों की नज़र भी पड़ जाए इस पर.

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  9. लानत हे ऎसे अर्थशास्त्री पर, जो दुम ना होने पर भी दुम हिलाने की कोशिश करता हे, जब भी हमारे बच्चे इतिहास मे इस का नाम पढेगे तो जयंचंद के संग इस पर भी थुकेगे, इन को कोई हिटलर ही सीधा कर सकता हे,

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  10. स्मिताMarch 17, 2011 at 10:46 PM

    असल में जब गरीब ही भूके मर जायेगें तो देश में गरीबी बचेगी ही नहीं |नां रहेगा बांस और नां बजेगी बांसुरी |

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  11. संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है.

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  12. होली की हार्दिक शुभकामनायें !

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  13. संवेदनहीन सरकार की ज्ञानेन्द्रियाँ शायद काम नहीं कर रहीं , इसीलिए मजबूर और दुखी जनता उन्हें गरीब नहीं दिख रही। क्यूंकि गरीब शिकायत नहीं करते । वो जानते हें दीवारों से सर फोड़ने का कोई लाभ नहीं है। अपना वक़्त वो दो जून की रोटी कमाने में लगाते हें।

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  14. रंग के त्यौहार में
    सभी रंगों की हो भरमार
    ढेर सारी खुशियों से भरा हो आपका संसार
    यही दुआ है हमारी भगवान से हर बार।

    आपको और आपके परिवार को होली की खुब सारी शुभकामनाये इसी दुआ के साथ आपके व आपके परिवार के साथ सभी के लिए सुखदायक, मंगलकारी व आन्नददायक हो। आपकी सारी इच्छाएं पूर्ण हो व सपनों को साकार करें। आप जिस भी क्षेत्र में कदम बढ़ाएं, सफलता आपके कदम चूम......

    होली की खुब सारी शुभकामनाये........

    सुगना फाऊंडेशन-मेघ्लासिया जोधपुर,"एक्टिवे लाइफ"और"आज का आगरा" बलोग की ओर से होली की खुब सारी हार्दिक शुभकामनाएँ..

    समय मिले तो ये पोस्ट जरूर देखें.
    "गौ ह्त्या के चंद कारण और हमारे जीवन में भूमिका!"
    लिक http://sawaisinghrajprohit.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

    आपका कीमती सुझाव और मार्गदर्शन अगली पोस्ट को और अच्छा बनाने में मेरी मदद करेंगे! धन्यवाद…..

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  15. आपको एवं आपके परिवार को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।

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  16. बहुत बढ़िया लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!
    आपको एवं आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें!

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