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Sunday, October 2, 2011

जय जवान ! जय किसान


" जय जवान ! जय किसान " यह नारा दिया था हमारे स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधान मंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री ने ! शास्त्री जी, जिनकी सादगी, निष्ठा एवं संघर्षशीलता के बारे में जितना भी कहा जाये शब्द कम पड़ जायेंगे !

बचपन में उनके अभावग्रस्त जीवन के बारे में हर व्यक्ति जानता है ! कैसे वे मीलों दूर नंगे पैर पैदल चल कर विद्या ग्रहण करने के लिये स्कूल जाया करते थे ! कई बार तो नाव के पैसे ना चुका पाने की स्थिति में उन्होंने तैर कर भी नदी पार की है ! आज के बच्चे कार, बाइक, बस या स्कूटर्स पर सवार होकर स्कूल जाते हैं फिर चाहे स्कूल फर्लांग भर दूर ही क्यों न हो ! शास्त्री जी के बचपन के इन संघर्षों से भरे दिनों के किस्सों को सब कहानी की तरह पढ़ कर भूल भी जाते हैं ! शायद इसीलिये कि उनके जीवन के प्रसंगों को ना तो किसी पाठ्य पुस्तक में स्थान मिलता है, ना ही उनके ऊपर किसी फिल्मकार को कोई फिल्म बनाने की प्रेरणा हुई है कदाचित इसलिए कि कहीं यह घाटे का सौदा ना बन जाये ! उनके व्यक्तित्व के ऊपर कभी कोई सार्वजनिक चर्चा भी आयोजित नहीं की गयी ! आज शास्त्री जी के बारे में बहुत कम बच्चे जानते हैं ! जिन व्यक्तियों के जीवन के प्रसंग युवा पीढ़ी के लिये प्रेरक हो सकते हैं , उनके जीवन को प्रभावित कर सकते हैं और उनकी सोच को एक नयी सकारात्मक दिशा की ओर मोड़ सकते हैं उन्हें हमारे देश के प्रबुद्ध वर्ग ने भी भुला दिया है ! बस उनके जन्मदिन एवं निर्वाण दिवस पर चंद पलों के लिये उन्हें याद कर एक रस्म सी अदा कर दी जाती है और फिर उनके अध्याय को साल भर के लिये बंद कर दिया जाता है !

शास्त्री जी एक ऐसे नेता थे जब वे रेल मंत्री थे एक छोटी सी रेल दुर्घटना हो जाने पर उन्होंने स्वयं नैतिक जिम्मेदारी ले अपने पद से इस्तीफा दे दिया था ! जब वे गृहमंत्री थे और देश भीषण खाद्य समस्या से जूझ रहा था तब उन्होंने प्रत्येक सोमवार की रात एक समय का भोजन त्यागने की अपील देशवासियों से की थी ताकि भूखे व्यक्तियों के मुख को चंद निवाले मिल सकें ! वे स्वयं इस पर अमल करते थे ! उनके इस आह्वान पर तमाम भारतवासियों ने सोमवार की शाम का भोजन त्याग दिया था ! ऐसे करिश्माई नेता थे शास्त्री जी ! क्या आज के नेताओं से उनकी तुलना की जा सकती है जो भूखी जनता के मुख से निवाले छीन कर अपने बैंक बैलेंस को बढ़ाने में लगे हैं ! देश में कुछ ऐसे भी नेता हैं जो निजी हेलीकोप्टर में बैठ कर घर से ऑफिस जाते हैं और दोपहर के भोजन के लिये घर आने के लिये हेलीकोप्टर का ही प्रयोग करते हैं ! ऐसे नेताओं से क्या यह उम्मीद की जा सकती है कि वे देश की निर्धन जनता का ध्यान रख एक समय का अपना भोजन त्याग देंगे ? शास्त्री जी के समय में ही देश को पाकिस्तान के आक्रमण का सामना करना पड़ा था ! और इसी युद्ध के निराकरण के लिये जब वे कोसीजिन के आमंत्रण पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति अय्यूब खान के साथ बात करने रूस गये तो वहाँ हृदयगति रुक जाने से उनका निधन हो गया ! देश हित में देश के वीर सपूत ने अपने प्राणों की आहुति दे दी !
शास्त्री जी का मानना था कि देश की आतंरिक खाद्य समस्या का समाधान खेतिहर किसान ही कर सकते हैं और देश की सीमाओं की रक्षा की जिम्मेदारी हमारे सेना के जवानों के फौलादी कन्धों पर रहती है ! शास्त्री जी इस तथ्य से भली भाँति परिचित थे ! वे जानते थे खेतों में जब किसानों की मेहनत से फसलों का सोना उगेगा तभी देश की खाद्य समस्या का निराकरण हो सकेगा और देश की सीमाओं पर तैनात जवान जब तक सतर्क और चौकस रहेंगे देशवासी अपने अपने घरों में चैन की नींद सो सकेंगे ! इसीलिये उन्होंने यह नारा दिया था , " जय जवान ! जय किसान " !
आज उनके जन्म दिन पर हमारी भावपूर्ण श्रद्धांजलि उन्हें समर्पित है ! आज देश को ऐसे ही नेताओं की ज़रूरत है जो अपनी सोच में खुद से ऊपरदेश को रखें और विश्व फलक पर देश के परचम को सबसे ऊँचे फहराने की इच्छा रखें ! शास्त्री जी को हमारा नमन !

साधना वैद

14 comments :

  1. शास्त्री जी को हमारा नमन|

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  2. देश के वास्तविक सपूत को नमन. वास्तविक नेता को सच्ची श्रद्धांजलि यही है की उनके आदर्श अपनाए जाये उनकी सादगी का प्रसार किया जाये .

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  3. सामयिक और आवश्यक पोस्ट

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  4. बहुत अच्छा लेख |शास्त्री जी और गांधीजी को श्रद्धा पूर्वक नमन |
    आशा

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  5. अब गाँधी जी जैसे नेता कहाँ हैं इस देश में.गाँधी जी को नमन.

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  6. शास्त्री जी की जयंती पर आपने बहुत सही विचार व्यक्त किये हैं। आज आवश्यकता है कि जन जन को उनके द्वारा स्थापित आदर्शों के बारे मे जागरूक किया जाए।

    सादर

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  7. लाल बहादुर शास्त्री जैसे न नेता हैं और न ही ऐसे नेता अब मिलने की उम्मीद है ... शास्त्रीजी को नमन ..

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  8. शास्त्री जी और गांधीजी को उनके जन्मदिवस पर नमन.

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  9. सारगर्भित आलेख...शास्त्री जी और गांधीजी को नमन |

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  10. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 03-10 - 2011 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में ...किस मन से श्रृंगार करूँ मैं

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  11. ये है सच्चा नमन ………आज कहाँ वो जज़्बा रहा इन नेताओ मे ……………हमारा भी नमन है उस सच्चे सपूत को जिसे ये देश भुला चुका है।

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  12. shukriya is post ke zariye aapne kuchh bhoole hue logo ko shastri ji ki yaad dilayi.

    shastri ji ko sadar naman.

    aaj aise neta ki hamare desh ko sakht jarurat hai....lekin jante hain milega nahi.

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  13. शास्त्री जी को हमारा नमन|

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  14. जहां सब आज गांधी जो को याद कर रहे अहिं आपने शास्त्री जी याद कर के सच्ची राष्ट्रभक्ति दिखाई है ... नमन है अमर वीर को ...

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