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Wednesday, January 11, 2012

तुम्हारा इंतज़ार है

मुक्ताकाश में सजी

तारक मालिका से

प्रेरणा ले मैंने

आज अपनी

पलकों की डोर में

अश्रु मुक्ताओं को पिरो कर

अपने नयनों के द्वारों को

मनमोहक बंदनवार से

तुम्हारे लिये

सजाया है !

बारिश की बूँदों पर

बिखरी सूर्य की

कोमल किरणों

की अनुकम्पा से

उल्लसित हो

अनायास मुस्कुरा उठे

इन्द्रधनुष से

प्रेरित हो मैंने

अपनी सारी

आशा और विश्वास,

श्रद्धा और अनुराग,

मान और अभिमान

हर्ष और उल्लास के

सजीले रंगों से

अपने हृदय द्वार को

सुन्दर अल्पना के

आकर्षक बूटों से

सजाया है !

झर-झर बहते

चंचल, उच्श्रंखल

निर्मल निर्झर से

एक सुरीली सी

तरल तान उधार ले

तुम्हारे लिये

कोमल स्वरों से सिक्त

एक सुमधुर

स्वागत गीत

भी गुनगुनाया है !

अब बस उस आहट

को सुनने के लिये

मन व्याकुल है

जब दिल की ज़मीन पर

तुम्हारे कदमों

के निशाँ पड़ेंगे

और पतझड़ की

इस वीरानी में

बहार के आ जाने का

एहसास होने लगेगा !

साधना वैद

38 comments :

  1. अपने ह्रदय द्वार को ------अल्पना से सजाया है '
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ |
    बहुत खूब लिखा है |
    आशा

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  2. जब दिल की ज़मीन पर

    तुम्हारे कदमों

    के निशाँ पड़ेंगे

    और पतझड़ की

    इस वीरानी में

    बहार के आ जाने का

    एहसास होने लगेगा !....waah, bahut achhe ehsaas

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  3. इंतज़ार के पलों को बेइंतहा खूबसूरती से सजाया है..

    बड़ी मासूम नाजुक सी कविता..

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  4. जब दिल की ज़मीन पर तुम्हारे कदमों के निशाँ पड़ेंगे और पतझड़ की इस वीरानी में बहार के आ जाने का एहसास होने लगेगा!!
    nature n feelings ka bahut hi sundar meljhol ...bahut hi umda rachana !!

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  5. आदरणीय मौसीजी,सादर वन्दे,मनभावन रचना है, मानो प्रतीक्षा की रंगोली सजी है | ऐसे तो ईश्वर भी मिल जाये |

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  6. जब दिल की ज़मीन पर

    तुम्हारे कदमों

    के निशाँ पड़ेंगे

    और पतझड़ की

    इस वीरानी में

    बहार के आ जाने का

    एहसास होने लगेगा !

    ...बहुत बढ़िया अहसास..

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  7. बहुत सुन्दर कोमल सा स्वागत है

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  8. बहार के आ जाने का एहसास क्यों बहार खुद आएँगी...सुन्दर रचना के लिए आभार आपका

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  9. खुबसूरत अल्फाजों में पिरोये जज़्बात....शानदार |

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  10. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 12- 01 -20 12 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज... उठ तोड़ पीड़ा के पहाड़

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  11. bahaar aane ka ehsaas kuchh aisa hi hota hai...!!
    sundar abhivyakti...!!

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  12. प्रकृति से प्रेरित हो बंदनवार सजाना , अल्पना बनाना और गीत गुनगुना कर इंतज़ार करना ... बहुत कोमल भाव लिए सुन्दर रचना

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  13. बहुत बहुत सुन्दर...

    सच में प्रकृति से बड़ी मीठी मीठी चोरियां की आपने उनके लिए..
    :-)
    सादर.

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  14. बढ़िया प्रस्तुति

    Gyan Darpan
    ..

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  15. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-756:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  16. लिंक गलत देने की वजह से पुन: सूचना

    आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 12- 01 -20 12 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज... उठ तोड़ पीड़ा के पहाड़

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  17. वाह ...बहुत ही बढिया भाव संयोजन ...आभार ।

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  18. komal ehsaas ke sath likhi gai rachna
    bahut sundar...!

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  19. bahut khoob
    sundar rachna
    super like

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  20. आपको पढ़ना हमेशा एक सुखद अनुभूति दे जाता है.

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  21. बहुत सुन्दर कोमल अहसास...बहुत भावमयी प्रस्तुति..

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  22. वाह ... शब्द जैसे प्रेम में पगे ... ह्रदय से निकले ... और बहार आने की प्रतीक्षा में खड़े ...

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  23. मन व्याकुल है
    जब दिल की ज़मीन पर
    तुम्हारे कदमों
    के निशाँ पड़ेंगे
    और पतझड़ की
    इस वीरानी में
    बहार के आ जाने का
    एहसास होने लगेगा !
    लाजवाब प्रस्तुति बहुत खूब लिखा है आपने

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  24. शब्दों का अनुपम प्रयोग ..बहुत सुन्दर

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  25. बहुत सुंदर कोमल भावनाओं की भावाव्यक्ति बधाई

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  26. prem ke dard se bhari bahut sunder rachna.

    shubhkamnayen

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  27. कल 14/1/2012को आपकी पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  28. Wah! kya benamoon sajavat hai...bahut khub.....

    www.poeticprakash.com

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  29. बहुत अच्छी सुंदर प्रस्तुति,बढ़िया अभिव्यक्ति, पंक्तियाँ अच्छी लगी.....
    new post--काव्यान्जलि : हमदर्द.....

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  30. अब बस उस आहट
    को सुनने के लिये
    मन व्याकुल है
    जब दिल की ज़मीन पर
    तुम्हारे कदमों
    के निशाँ पड़ेंगे
    और पतझड़ की
    इस वीरानी में
    बहार के आ जाने का
    एहसास होने लगेगा !
    ......
    साधना जी एक अत्यंत सरस कविता ...मन को छू गयी आपकी ये प्रतीक्षा !

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  31. सुन्दर नाजुक सा अहसास..

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  32. sach ! kaisa hoga vo milan jo itni kaamnaao ko piro kar aas deep prajwallit kar parwane se milne ko bekaraar hai.

    SUPERB !

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  33. bahut sunder rachanaa .

    आपकी पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली (२६) मैं शामिल की गई है /आप मंच पर आइये और अपने अनमोल सन्देश देकर हमारा उत्साह बढाइये /आप हिंदी की सेवा इसी मेहनत और लगन से करते रहें यही कामना है /आभार /लिंक है
    http://www.hbfint.blogspot.com/2012/01/26-dargah-shaikh-saleem-chishti.html

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  34. अब बस उस आहट को सुनने के लिये मन व्याकुल है जब दिल की ज़मीन पर तुम्हारे कदमों के निशाँ पड़ेंगे और पतझड़ की इस वीरानी में बहार के आ जाने का एहसास होने लगेगा !
    आशाओं से भरी सुन्दर रचना.
    मेरी कविता

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  35. बहुत ही सटीक भाव..बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    शुक्रिया ..इतना उम्दा लिखने के लिए !!

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